sabse pehle shyam mandir mein surajgarh nishan chade bhajan lyrics
एक बार की बात है, सूरजगढ़ गाँव में एक सुंदर श्याम मंदिर था, जहाँ हर वर्ष भक्तजन बड़ी श्रद्धा से अपने इष्ट देवता श्याम बाबा की पूजा करते थे। श्याम बाबा की महिमा सुनकर दूर-दूर से भक्त यहाँ आते थे। भक्तों का विश्वास था कि यहाँ आकर उनकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।
एक दिन, गाँव में एक भक्त, जो बहुत गरीब था, श्याम बाबा की भक्ति में लीन होकर मंदिर की ओर चल पड़ा। उसका नाम था भक्त मंगलाराम। वह पैदल चलकर मंदिर पहुँचा और वहाँ पहुँचकर उसने मन ही मन ठान लिया कि वह श्याम बाबा के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर देगा।
भक्त मंगलाराम ने देखा कि मंदिर का ताला बंद था। उसने सोचा, 'भगवान को भोग लगाने के लिए तो मुझे अंदर जाना ही होगा।' उसने अपने दिल में बहुत प्रार्थना की और तब उसकी भक्ति से प्रेरित होकर, श्याम बाबा ने उसके हाथ में मोरपंख डाल दिया। जैसे ही उसने मोरपंख से ताले को छुआ, ताला अपने आप खुल गया।
मंदिर के अंदर जाकर, भक्त मंगलाराम ने श्याम बाबा की पूजा की और वहाँ उपस्थित सभी भक्तों ने उसकी भक्ति देखकर जयकारा लगाया। सभी ने मिलकर श्याम बाबा को नमन किया और उनकी महिमा का गुणगान किया।
कुछ समय बाद, श्याम बाबा की कृपा से भक्तों की झोली भर गई। गाँव में खुशियाँ छा गईं। भक्तों ने सूरजगढ़ के मंदिर में एक नया निशान चढ़ाने का निश्चय किया। उन्होंने फागण की ग्यारस के दिन यह तय किया कि लाखों भक्त इस दिन बाबा के चरणों में भेंट चढ़ाएंगे।
इस दिन भक्तों ने मिलकर भव्य दरबार सजाया और सभी ने मिलकर नाच-गाना किया। भक्तों की भक्ति देखकर श्याम बाबा स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने भक्तों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा, 'जो भक्त सच्चे मन से मेरी भक्ति करते हैं, उनके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।'
भक्तों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर बाबा की महिमा का गुणगान किया और जब निशान चढ़ा तो पूरा सूरजगढ़ गूंज उठा। सबके मन में एक नई उमंग भर गई।
इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से भगवान हमारे साथ होते हैं। जब हम अपने इष्ट देवता के प्रति समर्पित होते हैं, तो वह हमें हर संकट से निकालने की क्षमता देते हैं।
इस प्रकार, भक्त मंगलाराम की भक्ति और श्याम बाबा की कृपा से सूरजगढ़ का मंदिर और भी भव्य हो गया। सभी भक्तों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करेंगे और सच्चे मन से श्याम बाबा की भक्ति करेंगे।
एक दिन, गाँव में एक भक्त, जो बहुत गरीब था, श्याम बाबा की भक्ति में लीन होकर मंदिर की ओर चल पड़ा। उसका नाम था भक्त मंगलाराम। वह पैदल चलकर मंदिर पहुँचा और वहाँ पहुँचकर उसने मन ही मन ठान लिया कि वह श्याम बाबा के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर देगा।
भक्त मंगलाराम ने देखा कि मंदिर का ताला बंद था। उसने सोचा, 'भगवान को भोग लगाने के लिए तो मुझे अंदर जाना ही होगा।' उसने अपने दिल में बहुत प्रार्थना की और तब उसकी भक्ति से प्रेरित होकर, श्याम बाबा ने उसके हाथ में मोरपंख डाल दिया। जैसे ही उसने मोरपंख से ताले को छुआ, ताला अपने आप खुल गया।
मंदिर के अंदर जाकर, भक्त मंगलाराम ने श्याम बाबा की पूजा की और वहाँ उपस्थित सभी भक्तों ने उसकी भक्ति देखकर जयकारा लगाया। सभी ने मिलकर श्याम बाबा को नमन किया और उनकी महिमा का गुणगान किया।
कुछ समय बाद, श्याम बाबा की कृपा से भक्तों की झोली भर गई। गाँव में खुशियाँ छा गईं। भक्तों ने सूरजगढ़ के मंदिर में एक नया निशान चढ़ाने का निश्चय किया। उन्होंने फागण की ग्यारस के दिन यह तय किया कि लाखों भक्त इस दिन बाबा के चरणों में भेंट चढ़ाएंगे।
इस दिन भक्तों ने मिलकर भव्य दरबार सजाया और सभी ने मिलकर नाच-गाना किया। भक्तों की भक्ति देखकर श्याम बाबा स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने भक्तों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा, 'जो भक्त सच्चे मन से मेरी भक्ति करते हैं, उनके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।'
भक्तों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर बाबा की महिमा का गुणगान किया और जब निशान चढ़ा तो पूरा सूरजगढ़ गूंज उठा। सबके मन में एक नई उमंग भर गई।
इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से भगवान हमारे साथ होते हैं। जब हम अपने इष्ट देवता के प्रति समर्पित होते हैं, तो वह हमें हर संकट से निकालने की क्षमता देते हैं।
इस प्रकार, भक्त मंगलाराम की भक्ति और श्याम बाबा की कृपा से सूरजगढ़ का मंदिर और भी भव्य हो गया। सभी भक्तों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करेंगे और सच्चे मन से श्याम बाबा की भक्ति करेंगे।
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संपादकीय एवं संदर्भ समीक्षा
यह सामग्री उपलब्ध पौराणिक संदर्भों, सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार की गई है। भक्तिलोक टीम का उद्देश्य सनातन ज्ञान को सरल, शुद्ध एवं प्रमाणिक भाषा में जन-जन तक पहुंचाना है।