🪔 घट स्थापना: नवरात्रि की आधारशिला

Kalash Sthapana Vidhi, Mantra, Katha evam Mahatva

🙏 नवरात्रि का प्रथम दिन – घट में स्थापित होती है सृष्टि की आदि शक्ति 🙏

🕉️ घट स्थापना का महत्व एवं रहस्य (Significance of Kalash Sthapana)

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आते ही सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण विधि होती है – घट स्थापना (Kalash Sthapana)। यह केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण नवरात्रि साधना की आधारशिला है। मान्यता है कि जिस प्रकार एक बीज से विशाल वृक्ष की उत्पत्ति होती है, उसी प्रकार इस घट में स्थापित कलश नौ दिनों तक चलने वाली साधना, उपासना और उत्सव का प्रतीक होता है। घट स्थापना के बिना नवरात्रि व्रत अधूरा माना जाता है।

"घट" का शाब्दिक अर्थ मिट्टी का बर्तन होता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है। मिट्टी के इस पात्र में जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा और पांच पत्तियां रखी जाती हैं, जो पंच महाभूतों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक हैं। इसके ऊपर स्थापित नारियल और लाल वस्त्र देवी मां की शक्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया हमें यह सिखाती है कि जीवन और जगत का संचालन इन्हीं पंच तत्वों से होता है, और इनके ऊपर विराजमान हैं मां दुर्गा।

📜 घट स्थापना में छिपी दिव्य शक्ति की कथा – Ghat Sthapana Ki Katha

प्राचीन काल की बात है, जब देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था। दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे। असुरों के सेनापति महिषासुर ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को परास्त कर दिया। सभी देवता स्वर्ग से निकलकर पृथ्वी पर आ गए और उन्होंने परम शक्ति की आराधना करने का निर्णय लिया।

तब देवताओं ने ब्रह्मा जी के निर्देशन में एक विशेष विधान का आयोजन किया। उन्होंने एक सोने का कलश स्थापित किया, जिसमें गंगाजल, पांच पवित्र पत्ते, सुपारी, दूर्वा और सिक्का रखा। इस कलश के ऊपर एक नारियल रखा गया और उसे लाल वस्त्र से ढक दिया गया। इस कलश को शक्ति का केंद्र मानकर, सभी देवताओं ने मिलकर ९ दिनों तक कठोर साधना की और मां दुर्गा का आवाहन किया।

इसी घट (कलश) में देवी ने अपनी शक्ति का संचार किया और नौवें दिन देवी प्रकट हुईं। उन्होंने महिषासुर का वध किया और देवताओं को पुनः स्वर्ग का अधिकारी बनाया। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना करके देवी का आवाहन किया जाता है और नौ दिनों तक उनकी उपासना की जाती है।

एक अन्य कथा के अनुसार, राजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था, लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री सती के पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था। सती को यह अपमान सहन न हुआ और उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव ने वीरभद्र का निर्माण करके पूरे यज्ञ को नष्ट कर दिया। बाद में, भगवान शिव ने तपस्या करके मां शक्ति को पुनः प्राप्त किया। मान्यता है कि उस समय भी मां शक्ति का आवाहन एक कलश की स्थापना के माध्यम से ही किया गया था।

'जिस घट में स्थापित है कलश, उसमें वास करती हैं मां जगदंबा। सुख-समृद्धि की दाता, मिटाती हैं सब संकटा।।'

🪔 सही घट स्थापना विधि और मुहूर्त (Ghat Sthapana Vidhi & Muhurat)

घट स्थापना का सबसे उपयुक्त समय प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त (सुबह 10:30 से 12:00 बजे के बीच) माना जाता है। यदि यह समय न मिले तो सूर्योदय के बाद जितना जल्दी हो सके, यह कार्य कर लेना चाहिए। इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

घट स्थापना के लिए सामग्री (Samagri): मिट्टी का चौड़ा पात्र (घट), साफ मिट्टी, जौ के बीज, कलश (तांबे, पीतल या मिट्टी का), गंगाजल, सुपारी, लौंग, इलायची, सिक्का, दूर्वा घास, आम के पांच पत्ते, पका हुआ नारियल, लाल वस्त्र, कलावा, रोली, चंदन, अक्षत, फूल-माला और दीपक।

विधि: सबसे पहले चौड़े पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ के बीज बोएं और थोड़ा जल डालें। फिर कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा और पांच पत्ते डालें। कलश के मुंह पर लाल वस्त्र बांधकर उस पर कलावा लपेटें। नारियल पर रोली, चंदन और अक्षत लगाकर उसे लाल वस्त्र में लपेटें और कलश के ऊपर स्थापित करें। इसके बाद विधिवत पूजन करें और मंत्रों का उच्चारण करें।

📿 घट स्थापना के मंत्र (Kalash Sthapana Mantras)

  • ॐ गं गणपतये नमः। (गणेश पूजन)
  • ॐ ह्रीं नमः। (कलश स्थापना मंत्र)
  • ॐ एह्येहि भगवति दुर्गे नवरात्रे व्रतं करोमि।
  • ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

🎵 घट स्थापना विशेष आरती Lyrics in Hindi (Ghat Sthapana Aarti)

जय जय कलश वाली माता, जय जय कलश वाली माता।
घट में वास करो मैया, सब सुखदाता।। जय जय...

प्रथम पूजा गणपति की, करें हम आज।
शक्ति स्थापित हो घट में, पूजो सब काज।। जय जय...

जौ बोए मिट्टी में, हरियाली छाए।
सुपारी, पत्ता, नारियल से, सुख संपदा आए।। जय जय...

नौ दिनों तक रहे यह घट, शक्ति का स्थान।
करो कृपा मां भवानी, पूरो मन काम।। जय जय...

घट स्थापना की आरती, जो कोई गावे।
सुख-समृद्धि से भरपूर, उसका जीवन पावे।। जय जय कलश वाली माता...
            

✨ घट स्थापना के लाभ (Benefits of Kalash Sthapana)

  • ✅ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ✅ नौ दिनों तक मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • ✅ व्यापार और नौकरी में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
  • ✅ परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है।
  • ✅ मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और संकट दूर होते हैं।
  • ✅ पितृ दोष एवं वास्तु दोष से मुक्ति मिलती है।
  • ✅ आर्थिक तंगी दूर होती है और धन लाभ होता है।
  • ✅ आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति मिलती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या घट स्थापना के बिना नवरात्रि व्रत कर सकते हैं?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि व्रत की पूर्णता के लिए घट स्थापना अनिवार्य मानी गई है। यदि किसी कारणवश न कर सकें तो मानसिक संकल्प करके देवी की उपासना की जा सकती है।

प्रश्न 2: घट स्थापना के लिए किस दिशा का ध्यान रखें?
उत्तर: घट स्थापना हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए।

प्रश्न 3: घट स्थापना के बाद क्या करें?
उत्तर: नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम कलश की पूजा करें, दीपक जलाएं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और नवमी के दिन कलश का विसर्जन करें।

घट स्थापना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का संगम है। यही वह दिव्य घट है जिसमें मां दुर्गा की शक्ति का वास होता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर विधिवत घट स्थापना करें और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। जय माता दी। 🙏