प्रातः जागरण, करदर्शन एवं भूमि वंदना
सूर्योदय से पूर्व के दो मुहूर्त (लगभग ९६ मिनट पूर्व) को ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है। इस काल में वातावरण में सत्त्वगुण की प्रधानता होती है। बिस्तर छोड़ते ही सर्वप्रथम अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर दर्शन करना चाहिए, क्योंकि हथेलियों के अग्रभाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में माँ सरस्वती और मूल में भगवान गोविंद का वास माना गया है।
करदर्शन महामंत्र:
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥
भूमि क्षमा प्रार्थना:
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥