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Meri Lagti Na Hari Bin Ankhiya Lyrics - मेरी लगती न हरि बिन अंखियां

17 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: भक्तिलोक टीम
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Meri Lagti Na Hari Bin Ankhiya Lyrics - मेरी लगती न हरि बिन अंखियां

प्रभु के प्रति असीम प्रेम व्यक्त करने वाला एक भजन।

मेरी लगती न हरि बिन अंखियां,
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

अंखियां, हे री सखी अंखियां,
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

मैं भी रंगाई संग हरि भी रंगाया,
मैं भी रंगाई संग हरि भी रंगाया।

और रंगाई सारी सखियां,
सखी री लगती न हरि बिन अंखियां।
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

मैं भी जगाई संग हरि भी जगाया,
मैं भी जगाई संग हरि भी जगाया।

और जगाई सारी सखियां,
सखी री लगती न हरि बिन अंखियां।
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

ज्ञान का दीपक मेरे श्याम जलाया,
श्याम ने जलाया, मेरे श्याम ने जलाया।

घोर अंधेरा काटणिया,
मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

अंखियां, हे री सखी अंखियां,
हे मेरी लगती न हरि बिन अंखियां।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में, 'मेरी लगती न हरि बिन अंखियां' का अर्थ है कि जब तक हरि का सानिध्य नहीं होता, तब तक आंखों का कोई महत्व नहीं है। यह भाव भक्ति का एक गहरा संकेत देता है। गायक अपने सखी से कहता है कि उसकी आंखें हरि के बिना अधूरी हैं, जो यह दर्शाता है कि भक्ति में सच्चा प्रेम हरि के प्रति होना चाहिए। साथ ही, 'मैं भी रंगाई संग हरि भी रंगाया' का मतलब है कि भक्ति का रंग हरि के साथ मिलकर और भी गहरा होता है। जब भक्त हरि के साथ रंगते हैं, तब जीवन में समर्पण और प्रेम का रंग भर जाता है।

भजन के भावार्थ में गहराई से जाने पर हमें यह महसूस होता है कि भक्त की आत्मा हरि की खोज में है। यह भजन केवल एक साधारण भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह एक गहरी भावना का प्रतीक है। जैसे जैसे गायक कहता है, 'ज्ञान का दीपक मेरे श्याम जलाया', वह संकेत करता है कि हरि का ज्ञान ही जीवन के अंधकार को दूर करता है। इस भजन में न केवल प्रेम, बल्कि विश्वास और समर्पण की भावना का भी गहन संकेत है, जो हर भक्त के हृदय में होना चाहिए।

भक्ति मार्ग की इस यात्रा में, भजन के प्रत्येक शब्द भक्त के हृदय में हरि के प्रति प्रेम को उजागर करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि हरि के बिना हमारा जीवन अधूरा है। वास्तव में, 'घोर अंधेरा काटणिया' का अर्थ है कि हरि का ज्ञान और प्रेम ही हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। यह भक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है कि भक्त को हरि में अपने अस्तित्व का अनुभव करना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व केवल इसके शब्दों में नहीं, बल्कि इसके भाव में है। यह भजन भक्तों को हरि के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करने का एक साधन प्रदान करता है। भक्तों का मानना है कि जब वे इस भजन को गाते हैं, तब उनके हृदय में हरि का प्रेम और ज्ञान बढ़ता है। यह भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से उन्हें हरि के निकट ले जाता है। इस प्रकार, यह भजन न केवल एक गाना है, बल्कि भक्ति का एक अद्भुत अनुभव है।

इस भजन को सुनने और गाने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त होती है। यह भजन मन को स्थिर करता है और भक्त की आत्मा को हरि के प्रेम में डुबो देता है। नियमित रूप से इसे गाने से भक्ति में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना सबसे उपयुक्त है। जाप करते समय ध्यान केंद्रित करें और हरि के स्वरूप का ध्यान करें। भक्त को चाहिए कि वह भक्तिपूर्ण मन से इस भजन का गान करें, जिससे उसकी भक्ति और भी प्रगाढ़ हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि हरि के बिना जीवन अधूरा है और हरि का प्रेम ही सच्चा प्रेम है।

क्या इस भजन को किसी विशेष अवसर पर गाना चाहिए?

इस भजन को किसी भी धार्मिक अवसर पर गाया जा सकता है, खासकर जब भक्त हरि की कृपा के लिए प्रार्थना कर रहे हों।

क्या इस भजन का कोई विशेष अर्थ है?

इस भजन का अर्थ है कि प्रेम और भक्ति का रंग हरि के साथ मिलकर ही गहरा होता है, और हरि का ज्ञान जीवन का अंधकार दूर करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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