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भक्ति रस काव्य व भजन

Bulake Hmako Bankebihari Bhajan Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

7 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: भक्तिलोक टीम
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Bulake Hmako Bankebihari Bhajan Lyrics - बुला के हमको बांके बिहारी

बांके बिहारी के प्रति भक्ति और प्रेम का अद्भुत भजन।

बुला के हमको बांके बिहारी , छुप गए क्यों मुरारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !
दिखा दो हमको सूरत प्यारी , आये शरण तुम्हारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है !!

ओ रे संवरिया मेरे, मैं तो रंगा हूँ तेरे रंग में , हा रंग में ,
मुझसे मिला के नज़रे , चल दो बिहारी मेरे संग में , हा संग में ,
सेवा करूँगा मैं भी तुम्हारी , बन के तेरा पुजारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

ओ रे संवरिया मेरे, दिल में छुपे हैं कई राज रे, कई राज रे ,
कैसे बताऊ मोहन तुमको दिल की सारी बात रे ,सारी बात रे,
दिल में मेरे तुम रहते हो , ओढ़ के कामल कारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है , हुए
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ,

हँसने लगे हैं मुझपे दुनिया के सारे लोग रे , सारे लोग रे ,
कैसा लगाया तुमने मुझको मुरारी ये रोग रे , ये रोग रे,
रोग ये दिल का तुमने लगाया , सुना के बंशी प्यारी ,
ये पर्दा क्यों किया है , ये पर्दा क्यों किया है ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'बुला के हमको बांके बिहारी' में भक्त की गहरी भावना व्यक्त की गई है। पहले अंतरे में भक्त भगवान से कहता है कि 'बुला के हमको बांके बिहारी', यह दर्शाता है कि भक्त अपने प्रियतम, भगवान कृष्ण की खोज में है। वह पूछता है कि 'ये पर्दा क्यों किया है?' यह एक गहरी भावना है, जहां भक्त भगवान से मिलने की इच्छा रखता है, लेकिन उसके बीच में कुछ बाधाएं हैं। इस सवाल में एक प्रकार की भक्ति और प्रेम की इच्छा छिपी है। भक्त की यह भावना दर्शाती है कि वह भगवान की उपासना में डूबा हुआ है और उन्हें अपने जीवन में अनुभव करने की चाह रखता है।

भजन के अगले हिस्से में भक्त कहता है, 'ओ रे संवरिया मेरे, मैं तो रंगा हूँ तेरे रंग में', जो यह दर्शाता है कि भक्त ने अपने जीवन को भगवान में रंग दिया है। वह कहता है कि वह भगवान के रंग में रंगा हुआ है और उनसे मिलकर सेवा करने की इच्छा रखता है। यह भाव भक्त की गहरी भक्ति को दर्शाता है, जहाँ वह खुद को भगवान के समर्पित करता है। इस भजन में प्रेम की एक गहरी लहर है, और भक्त की इस इच्छा की गहराई को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। वह नहीं चाहता कि कोई पर्दा या बाधा उनके प्रेम के बीच आए।

इस भजन में दर्शन और भक्ति के महत्वपूर्ण तत्व भी समाहित हैं। भक्त अपने दिल के राज़ों को भगवान को बताने की इच्छा रखता है। 'दिल में मेरे तुम रहते हो' से यह स्पष्ट होता है कि भगवान भक्त के हृदय में बसे हुए हैं। इसका तात्पर्य है कि जब हम भगवान को अपने दिल में स्थान देते हैं, तो हर भक्ति और प्रेम का अनुभव हमें मिलता है। यह भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहां भक्त अपने हृदय की गहराइयों से भगवान के प्रति जुड़ता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति में सच्चाई और समर्पण होना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ बहुत महत्वपूर्ण है। भगवान कृष्ण, जिन्हें बांके बिहारी के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में प्रेम और भक्ति के प्रतीक हैं। यह भजन उन भक्तों के लिए है जो उनके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करना चाहते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है, और यह भजन उसी प्रेम को दर्शाता है। भक्तों के लिए यह भजन एक साधना का माध्यम है, जिससे वे अपने हृदय के भावों को भगवान के समक्ष रख सकते हैं।

इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है। यह ध्यान और साधना का एक साधन है, जो भक्त को भगवान के साथ एक गहरे संबंध में लाता है। जब भक्त इस भजन का जाप करते हैं, तो वे अपने हृदय की गहराइयों से प्रेम और भक्ति की भावना को अभिव्यक्त करते हैं। इससे नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना सबसे अच्छा होता है। साधक को एक शांत और पवित्र वातावरण में बैठकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मन में भक्ति और प्रेम के भाव होने चाहिए। नियमित साधना से भक्त को भगवान के प्रति एकाग्रता और निष्ठा में वृद्धि होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन रोज़ गाया जा सकता है?

जी हां, यह भजन रोज़ गाया जा सकता है। इससे मन में शांति और भक्ति का अनुभव होता है।

इस भजन के विशेष समय क्या हैं?

इस भजन का जाप सुबह और शाम के समय विशेष रूप से लाभकारी होता है।

क्या इस भजन से कोई विशिष्ट लाभ होता है?

इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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