🙏 सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ – शेरावाली माता को पुकार
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(Sher Te Sawaar Ho Ke Aaja Daatiye) – माता रानी भजन
📖 परिचय – माँ के प्रति व्याकुल पुकार
“सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ” यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की वह व्याकुल पुकार है, जो माँ शेरावाली (माता दुर्गा / वैष्णो देवी) के द्वार पर सिर झुकाकर अपनी मन्नत माँगते हैं। यह भजन एक ऐसे भक्त के हृदय से निकली हुई करुण प्रार्थना है, जिसने अपने घर में माँ के आगमन की सम्पूर्ण तैयारी कर ली है। वह माँ से आग्रह करता है कि वह सिंह पर सवार होकर उसके घर आएँ, और उसकी हर मुराद पूरी करें। इस भजन की हर पंक्ति में माँ के प्रति अटूट विश्वास, श्रद्धा और समर्पण की भावना झलकती है।
इस लेख में हम आपको यह भजन की सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी और पंजाबी लिपि में, इसका भावार्थ, इसके पीछे की भावना और जीवन में इसके गहरे संदेश को समझाएंगे। आइए, माँ के इस स्नेहिल भजन में डूब जाएँ।
📜 भजन लिरिक्स (मूल पंजाबी एवं हिंदी अनुवाद)
॥ स्थायी / टेक ॥
सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ
सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ
साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ
राहा विच तेरे असी फूल मां विछाऐ से
शेर पर सवार होकर आ जा दातीऐ
शेर पर सवार होकर आ जा दातीऐ
हमारे घर जागरण (जगराते) का फेरा लगा दे दातीऐ
हमने तुम्हारे रास्ते में फूल बिछा दिए हैं
॥ अंतरा १ ॥
फूल मां विछाऐ ने फूल मां विछाऐ से
अऊन दी उडीक विच भवन सजाऐ ने
भवन सजाऐ ने मां भवन सजाऐ ने
चार चन्न , जागे विच ला जा दातीऐ
साडे घर जागा फेरा पाजा दाती...|
हमने फूल बिछा दिए हैं, फूल बिछा दिए हैं
तुम्हारी प्रतीक्षा में हमने भवन सजा दिए हैं
भवन सजा दिए हैं माँ, भवन सजा दिए हैं
चार चाँद, जागरण में लगा दो दातीऐ
हमारे घर जागरण का फेरा लगा दो दातीऐ...|
॥ अंतरा २ ॥
कृपा तेरी दे नाल जागा करवाया ऐ
जागा करवाया ऐ मां जागा करवाया ऐ
खूशीआ दे नाल असी जसन मनाऐया ऐ
जसन मनाऐया ऐ मां जसन मनाऐया ऐ
दात खूशीआ दी, झोली विच पाजा दातीऐ
साडे घर जागा फेरा पाजा दाती...|
तुम्हारी कृपा से हमने यह जागरण करवाया है
जागरण करवाया है माँ, जागरण करवाया है
हमने बड़ी खुशियों के साथ यह उत्सव मनाया है
उत्सव मनाया है माँ, उत्सव मनाया है
खुशियों का दान, हमारी झोली में डाल दो दातीऐ
हमारे घर जागरण का फेरा लगा दो दातीऐ...|
॥ अंतरा ३ ॥
तेरे ता दीदार असी कंजका चो पाऐ ने
कंजका चो पाऐ ने मां कंजका चो पाऐ ने
चरना च सीस माऐ सब ने झूकाऐ ने
सब ने झूकाऐ ने मां सब ने झूकाऐ ने
आ के बच्चेआ से, कषट मिटा जा दातीऐ
साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ ...|
हमें तुम्हारे दर्शन कन्याओं के समान पवित्रता से मिले हैं
मिले हैं माँ, मिले हैं माँ
तुम्हारे चरणों में सिर माँ, सबने झुका दिया है
झुका दिया है माँ, झुका दिया है
आकर मेरे बच्चों के सारे कष्ट मिटा दो दातीऐ
हमारे घर जागरण का फेरा लगा दो दातीऐ ...|
॥ अंतरा ४ ॥
चल के जनाल पिंडों भगत मां आऐ ने
भगत मां आऐ ने मां भगत मां आऐ ने
फल फूल भेंटा नाल नारीअल लिआऐ
नारीअल लिआऐ ने मां नारीअल लिआऐ ने
बले बले पपी दी करा जा दातीऐ
बले बले शान दी करा जा दातीऐ
साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ ...|
चलकर ‘जनाल’ गाँव से भक्त माँ के पास आए हैं
भक्त आए हैं माँ, भक्त आए हैं
फल, फूल, और नारियल की भेंट लेकर आए हैं
नारियल लाए हैं माँ, नारियल लाए हैं
हमें ‘बले-बले’ (प्रशंसा) और शान से जीने का वरदान दो
हमें ‘बले-बले’ और शान से जीने का वरदान दो दातीऐ
हमारे घर जागरण का फेरा लगा दो दातीऐ ...|
✍️ रचनाकार :- जसपाल जनाल (Jaspal Janal)
📞 संपर्क :- 8699406500
🔍 भजन का अर्थ (लाइन-बाय-लाइन व्याख्या)
इस भजन में भक्त माँ से अपने घर पधारने का अनुरोध कर रहा है। यह भजन निम्नलिखित भावों को स्पष्ट करता है:
- सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ: भक्त बार-बार माँ से आग्रह करता है कि वह अपने वाहन सिंह पर सवार होकर उसके घर आएँ। यह माँ के आगमन की अत्यधिक तीव्र व्याकुलता और प्रतीक्षा को दर्शाता है।
- साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ: भक्त अपने घर जागरण (रात्रि जागरण) का फेरा लगाने का आशीर्वाद माँ से माँगता है। इसका अर्थ है कि उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी हो जाएँ और घर में खुशहाली आए।
- राहा विच तेरे असी फूल मां विछाऐ से: भक्त ने माँ के स्वागत के लिए उनके रास्ते में फूल बिछा दिए हैं। यह पूर्ण सम्मान और समर्पण का प्रतीक है।
- अऊन दी उडीक विच भवन सजाऐ ने: भक्त लंबे समय से माँ की प्रतीक्षा कर रहा है और उनके आगमन के लिए अपने घर को सजा चुका है।
- चार चन्न , जागे विच ला जा दातीऐ: भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसके जागरण को चार चाँद (चारों तरफ प्रसिद्धि और खुशी) लगा दे।
- दात खूशीआ दी, झोली विच पाजा दातीऐ: भक्त माँ से खुशियों का दान (दात) अपनी झोली में डालने का आग्रह करता है।
- आ के बच्चेआ से, कषट मिटा जा दातीऐ: भक्त माँ से अपने बच्चों के सारे कष्ट दूर करने की विनती करता है।
- बले बले पपी दी करा जा दातीऐ: ‘बले-बले’ का अर्थ है ‘प्रशंसा’ या ‘जयकारा’। भक्त माँ से वरदान माँगता है कि उसके घर में हमेशा खुशियाँ रहें और लोग उसकी प्रशंसा करें।
📖 भजन की प्रेरणा और पृष्ठभूमि
इस भजन की रचना पंजाब के एक छोटे से गाँव ‘जनाल’ के रहने वाले भक्त जसपाल जनाल (Jaspal Janal) द्वारा की गई थी। यह भजन उनके मन में माँ के प्रति गहरी आस्था और विश्वास से उपजा। उनके अनुसार, एक बार उनके गाँव में एक बहुत बड़ी महामारी फैल गई थी। सभी लोग घबरा गए थे। तब जसपाल जनाल ने माँ शेरावाली से प्रार्थना की और यह भजन गाकर उनसे अपने गाँव की रक्षा करने की विनती की। माँ की कृपा से वह महामारी समाप्त हो गई। तब से यह भजन उनके गाँव में हर नवरात्रि पर विशेष रूप से गाया जाता है और आज यह पूरे उत्तर भारत में लोकप्रिय हो चुका है।
🌟 एक प्राचीन कथा: सिंह पर सवार होकर आई माँ
एक बार की बात है, एक गरीब विधवा की बेटी को कोई असाध्य रोग हो गया। सब इलाज करवाने के बाद भी वह ठीक नहीं हुई। निराश होकर माँ ने माता रानी को पुकारा। उसने ठान लिया कि जब तक माता रानी नहीं आएँगी, वह अपने घर से नहीं हिलेगी। उसने पूरे घर को सजाया, फूल बिछाए, और माँ के आने का इंतज़ार करने लगी। उसकी आस्था और प्रेम से प्रसन्न होकर माँ शेरावाली सच में सिंह पर सवार होकर उसके घर आ पहुँचीं और बच्ची को स्वस्थ किया। तब से यह मान्यता है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से माँ को पुकारता है और पूरी तैयारी के साथ उनके आगमन का इंतज़ार करता है, तो माँ अवश्य आती हैं।
नैतिक शिक्षा: सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास के आगे कोई भी विपत्ति टिक नहीं सकती। माँ शेरावाली अपने भक्तों की कभी निराश नहीं करतीं।
🤝 इस भजन का वास्तविक जीवन में महत्व
यह भजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हर व्यक्ति के लिए एक सहारा है। जब हम किसी मुश्किल में होते हैं, तो हम भी इस भक्त के समान एक "इशारे" की प्रतीक्षा करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि मुश्किलों में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि माँ से दिल खोलकर प्रार्थना करनी चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। नवरात्रि के पावन अवसर पर लाखों लोग इस भजन को गाकर माँ का आह्वान करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। यह हमें यह भी बताता है कि अपने घर में किसी शुभ अवसर (जागरण) का आयोजन करना कितना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक चेतना से जोड़ता है।
🕉️ देवी श्लोक एवं माँ के सिंह का महत्व
॥ देवी स्तुति ॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: हे देवी, जो इस सारे संसार में शक्ति के रूप में विद्यमान हो, उस देवी को हम बार-बार नमन करते हैं।
माता दुर्गा का वाहन सिंह है, जो शक्ति, साहस, पराक्रम और न्याय का प्रतीक है। जब देवी सिंह पर सवार होती हैं, तो इसका अर्थ है कि वह बुराई का नाश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह भी माना जाता है कि सिंह के दर्शन मात्र से ही भक्तों के मन का भय समाप्त हो जाता है। इस भजन में “सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ” का बार-बार प्रयोग इसी साहस और विजय के प्रतीक को आमंत्रित करने का एक मार्मिक तरीका है।[reference:0][reference:1]
✨ इस भजन का आध्यात्मिक संदेश
इस मार्मिक भजन का गहरा आध्यात्मिक संदेश है:
- पूर्ण समर्पण और विश्वास: यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम किसी कार्य को करने से पहले अपना सब कुछ ईश्वर को समर्पित कर देते हैं (घर सजाना, फूल बिछाना), तो सफलता निश्चित है।
- व्याकुलता ही भक्ति है: “आजा दातीऐ” की बार-बार पुकार यह दर्शाती है कि भगवान से सच्ची लगन और व्याकुलता ही उन्हें बाँध सकती है।
- सेवा का भाव: भक्त बार-बार माँ की सेवा (भवन सजाना, फूल बिछाना, भेंट चढ़ाना) के लिए तैयार रहता है। यह “निष्काम कर्म” का भाव है, बिना किसी स्वार्थ के केवल प्रेम से सेवा करना।
- सामूहिक चेतना का उत्सव: “जागा फेरा पाजा दातीऐ” का अर्थ केवल अनुष्ठान नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से जागरूक होकर भक्ति में डूबने का आह्वान है।
🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय अम्बे जय जगदम्बे ।।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: इस भजन के गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन की रचना और स्वर जसपाल जनाल (Jaspal Janal) ने दिए हैं। यह भजन उनकी मातृ-भक्ति का सजीव उदाहरण है।
प्रश्न 2: क्या इस भजन का कोई विशेष अवसर पर अधिक महत्व है?
उत्तर: हाँ, यह भजन नवरात्रि के पावन अवसर पर, विशेषकर जब लोग अपने घरों में जागरण (रात्रि जागरण) का आयोजन करते हैं, अत्यधिक श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
प्रश्न 3: “दातीऐ” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: “दातीऐ” (Daatiye) शब्द पंजाबी भाषा का है, जिसका अर्थ होता है “दान देने वाली” या “दाता”। इस भजन के संदर्भ में यह माँ दुर्गा के लिए प्रयुक्त हुआ है, क्योंकि वह अपने भक्तों को भक्ति, शक्ति और सुख-समृद्धि का दान देती हैं।[reference:2]
प्रश्न 4: क्या मैं इस भजन को अपने घर के किसी शुभ अवसर पर गा सकता हूँ?
उत्तर: बिल्कुल। यह भजन किसी भी शुभ अवसर, विशेषकर जब आप माता रानी की पूजा या जागरण कर रहे हों, गाया जा सकता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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