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Narayan Mil Jayega Lyrics (नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आ कर) – Divine Bhajan 2026 | Prem Prabhu Ka Baras Raha Hai

88 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 नारायण मिल जाएगा – पता नहीं किस रूप में आ कर

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Narayan Mil Jayega Lyrics In Hindi) – Divine Bhajan 2026 | Prem Prabhu Ka Baras Raha Hai

प्रेम प्रभु का बरस रहा है

📝 भजन विवरण

🎤 शैली: दिव्य भजन / प्रेरणादायक भजन
🏷️ श्रेणी: नारायण भजन / विष्णु भजन
📍 भाव: आध्यात्मिक, दार्शनिक, प्रेम, समर्पण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

प्रेम प्रभु का, बरस रहा है, पी ले, अमृत प्यासे,
सातों तीर्थ, तेरे अंदर, बाहर, किसे तलाशे ॥
कण, कण में हरि, क्षण, क्षण में हरि,
मुस्कानों में, अंसुवन में हरि ।
मन की आंखें, तूने खोली, तो ही, दर्शन पाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥

॥ अंतरा १ ॥

नियति भेद, नहीं करती जो, लेती है, वो देती है,
जो बोएगा, वो काटेगा ये, जग कर्मों की, खेती है ।
यदि, कर्म तेरे, पावन हैं सभी,
डूबेगी नहीं, तेरी नाव कभी ।
तेरी बाँह, पकड़ने को वो, भेस बदलकर आएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥

॥ अंतरा २ ॥

नेकी व्यर्थ, नहीं जाती हरि, लेखा जोखा रखते हैं,
औरों को, फूल दिए जिसने, उसके भी, हाथ महकते हैं ॥
कोई, दीप मिले, तो बाती बन,
तूँ भी तो, किसी का, साथी बन ।
मन को मान, सरोवर करले, तो ही मोती पाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥

॥ अंतरा ३ ॥

कान लगाके, बातें सुन ले, सूखे हुए, दरख्तों की,
लेता है, भगवान परीक्षा, सबसे, प्यारे भक्तों की ।
एक प्रश्न है, गहरा जिसकी, हरि को, थाह लगानी है,
तेरी श्रद्धा, सोना है या, बस सोने का, पानी है ।
जो फूल धरे, हर डाली पर,
विश्वास तो रख, उस माली पर ।
तेरे भाग में, पत्थर है तो, पत्थर भी, खिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥

पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह दिव्य भजन "नारायण मिल जाएगा" आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेम का अद्भुत संगम है। यह हमें सिखाता है कि प्रभु का प्रेम हर जगह बरस रहा है, बस हमें उसे पीने के लिए प्यासा होना होगा। सातों तीर्थ हमारे भीतर ही हैं, बाहर किसे ढूंढ़ते हो?

"कण, कण में हरि, क्षण, क्षण में हरि" – भगवान हर कण में, हर पल में विद्यमान हैं। वे हमारी मुस्कानों में भी हैं और आंसुओं में भी। जब हम मन की आंखें खोलते हैं, तभी हमें उनके दर्शन होते हैं।

"नियति भेद नहीं करती जो, लेती है वो देती है" – यह संसार कर्मों की खेती है। जो बोओगे, वही काटोगे। यदि तुम्हारे कर्म पवित्र हैं, तो तुम्हारी नाव कभी नहीं डूबेगी। प्रभु स्वयं कोई न कोई रूप धारण करके तुम्हारा हाथ पकड़ने आएंगे।

"नेकी व्यर्थ नहीं जाती" – भगवान हर अच्छे कर्म का हिसाब रखते हैं। जो दूसरों को फूल देता है, उसके हाथ भी महकते हैं। इसलिए किसी के दीपक की बाती बनो, किसी के साथी बनो।

"मन को मान सरोवर करले, तो ही मोती पाएगा" – यदि अपने मन को सरोवर की तरह शांत और स्वच्छ कर लो, तभी तुम्हें मोती (प्रभु) मिलेंगे।

"तेरी श्रद्धा सोना है या बस सोने का पानी है" – भगवान हमारी श्रद्धा की परीक्षा लेते हैं। यदि तुम्हारे भाग्य में पत्थर भी है, तो विश्वास रखो, वह पत्थर भी खिल जाएगा। नारायण किसी न किसी रूप में जरूर मिलेंगे।

🔍 इस दिव्य भजन का विशेष महत्त्व

प्रेम प्रभु का बरस रहा है: यह भजन की पहली पंक्ति ही हमें बताती है कि भगवान का प्रेम हमेशा हम पर बरस रहा है, लेकिन हमें उसे ग्रहण करने के लिए प्यासा होना होगा। यह आध्यात्मिक पिपासा (प्यास) का प्रतीक है।

सातों तीर्थ तेरे अंदर: यह अद्वैत वेदांत का सिद्धांत है कि सभी तीर्थ हमारे भीतर ही हैं। बाहर ढूंढ़ने से नहीं, भीतर देखने से मिलते हैं नारायण।

कण-कण में हरि: भगवान का सर्वव्यापी स्वरूप - वे हर कण में, हर क्षण में मौजूद हैं। यह हमें याद दिलाता है कि हम कभी अकेले नहीं हैं।

कर्मों की खेती: "जो बोएगा वो काटेगा" – यह कर्म सिद्धांत का सार है। हमारे अच्छे और बुरे कर्म ही हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। पवित्र कर्म ही हमें नारायण के पास ले जाते हैं।

दूसरों के काम आना: "कोई दीप मिले तो बाती बन, तूँ भी तो किसी का साथी बन" – यह हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना ही सच्ची भक्ति है। जो दूसरों के काम आता है, उसके हाथ महकते हैं।

श्रद्धा की परीक्षा: भगवान हमारी श्रद्धा को परखते हैं। यह प्रश्न कि "तेरी श्रद्धा सोना है या बस सोने का पानी है" हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है। क्या हमारी श्रद्धा असली है या नकली?

पत्थर भी खिल जाएगा: अंतिम पंक्तियाँ हमें विश्वास दिलाती हैं कि यदि हमारे भाग्य में पत्थर भी है, तो विश्वास और श्रद्धा से वह पत्थर भी खिल सकता है। नारायण किसी न किसी रूप में अवश्य मिलेंगे।

💖 आध्यात्मिक ज्ञान का सागर

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि नारायण (भगवान) कहीं दूर नहीं हैं। वे हमारे भीतर, हर कण में, हर पल में विद्यमान हैं। उन्हें पाने के लिए बस मन की आंखें खोलनी हैं और अपने कर्मों को पवित्र रखना है। वे किसी न किसी रूप में हमसे जरूर मिलेंगे - चाहे किसी जरूरतमंद के रूप में, किसी मित्र के रूप में, या किसी और भेष में।

✨ दर्शन और भक्ति का संगम

नारायण मिल जाएगा केवल एक भजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दर्शन और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह हमें कर्म सिद्धांत, ईश्वर की सर्वव्यापकता, सेवा का महत्व और श्रद्धा की गहराई को समझाता है। यह भजन हर उस आत्मा के लिए मार्गदर्शक है जो नारायण से मिलने की राह देख रही है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || हरि ॐ || नारायण नारायण 🙏

🔔 भजन की प्रमुख पंक्तियाँ

  • ✦ प्रेम प्रभु का, बरस रहा है, पी ले, अमृत प्यासे
  • ✦ सातों तीर्थ, तेरे अंदर, बाहर, किसे तलाशे
  • ✦ कण, कण में हरि, क्षण, क्षण में हरि
  • ✦ मन की आंखें, तूने खोली, तो ही, दर्शन पाएगा
  • ✦ जो बोएगा, वो काटेगा ये, जग कर्मों की, खेती है
  • ✦ औरों को, फूल दिए जिसने, उसके भी, हाथ महकते हैं
  • ✦ तेरी श्रद्धा, सोना है या, बस सोने का, पानी है
  • ✦ तेरे भाग में, पत्थर है तो, पत्थर भी, खिल जाएगा
॥ दिव्य नारायण भजन ॥
॥ पता नहीं, किस रूप में आ कर, नारायण मिल जाएगा ॥

प्रेम प्रभु का बरस रहा है | Prem Prabhu Ka Baras Raha Hai

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Narayan Mil Jayega Lyrics (नारायण मिल जाएगा पता नहीं किस रूप में आ कर) – Divine Bhajan 2026 | Prem Prabhu Ka Baras Raha Hai" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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