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शनि चालीसा (Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

188 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

शनि चालीसा (Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

शनि चालीसा (Shani Chalisa Lyrics in Hindi) 


जय गणेश गिरिजा सुवन

मंगल कर्ण किरपाल

दीन के दुःख दूर करि,

कीजये नाथ निहाल,


जय-जय श्री शनिदेव प्रभु,

सुनहु विनय महराज।

करहुं कृपा हे रवि तनय,

राखहु जन की लाज।।


जयति जयति शनिदेव दयाला।

करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥


चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।

माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥


परम विशाल मनोहर भाला।

टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥


कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।

हिये माल मुक्तन मणि दमके॥


कर में गदा त्रिशूल कुठारा।

पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥


पिंगल कृष्णों छाया नन्दन।

यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन॥


सौरी मन्द शनि दशनामा।

भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥


जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं।

रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥


पर्वतहू तृण होई निहारत।

तृणहू को पर्वत करि डारत॥


राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो।

कैकेइहुं की मति हरि लीन्हयो॥


बनहूं में मृग कपट दिखाई।

मातु जानकी ग‍ई चुरा‍ई॥


लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।

मचिगा दल में हाहाकारा॥


रावण की गति मति बौराई।

रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥


दियो कीट करि कंचन लंका।

बजि बजरंग बीर की डंका॥


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।

चित्र मयूर निगलि गै हारा॥


हार नौंलखा लाग्यो चोरी।

हाथ पैर डरवायो तोरी॥


भारी दशा निकृष्ट दिखायो।

तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥


विनय राग दीपक महँ कीन्हयो।

तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हयो॥


हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।

आपहुं भरे डोम घर पानी॥


तैसे नल पर दशा सिरानी।

भूंजी-मीन कूद गई पानी॥


श्री शंकरहि गहयो जब जाई।

पार्वती को सती कराई॥


तनिक विलोकत ही करि रीसा।

नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥


पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।

बची द्रोपदी होति उधारी॥


कौरव के भी गति मति मारयो।

युद्ध महाभारत करि डारयो॥


रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।

लेकर कूदि परयो पाताला॥


शेष देव-लखि विनती लाई।

रवि को मुख ते दियो छुड़ई॥


वाहन प्रभु के सात सुजाना।

जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥


जम्बुक सिंह आदि नख धारी।

सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥


गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।

हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥


गर्दभ हानि करै बहु काजा।

गर्दभ सिंद्धकर राज समाजा॥


जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।

मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥


जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।

चोरी आदि होय डर भारी॥


तैसहि चारि चरण यह नामा।

स्वर्ण लौह चाँदि अरु तामा॥


लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।

धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै॥


समता ताम्र रजत शुभकारी।

स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी॥


जो यह शनि चरित्र नित गावै।

कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥


अदभुत नाथ दिखावैं लीला।

करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥


जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।

विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥


पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।

दीप दान दै बहु सुख पावत॥


कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।

शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को,

की हों विमल तैयार।

करत पाठ चालीस दिन,

हो भवसागर पार॥


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "शनि चालीसा (Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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