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भक्ति रस काव्य व भजन

अपनी तो जैसे तैसे (apni to jaise taise lyrics in hindi) - Bhaktilok

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गौरां रानी की भक्ति: सच्चे प्रेम की अद्वितीय अभिव्यक्ति

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग की सरलता और प्रेम का अनूठा अनुभव करें।

अपनी तो जैसे तैसे भांग धतूरा खाके कट जाएगी... आपका क्या होगा ओ गौरां रानी आपके पैरों की पायल है बड़ी ही कीमती मेरे तो पैरों में घुँघरू बोले हैं छम छम छम छम आपका क्या होगा ओ गौरां रानी अपनी तो जैसे तैसे... आपके अंगो का लंहगा है बड़ा ही कीमती मेरे तो अंग मृग छाला तन पर है रमी भबूति आपका क्या होगा ओ गौरां रानी अपनी तो जैसे तैसे... आपके माथे का टीका है बड़ा ही कीमती मेरे तो सर पर जूड़ा जूड़े से बहती गंगा माथे पर है चंदा ओ गौरां रानी अपनी तो जैसे तैसे... आपके गले का हरवा है बड़ा ही कीमती मेरे तो गले नाग हैं बिच्छू है और ततैईया आपका क्या होगा ओ गौरां रानी अपनी तो जैसे तैसे... आपके हाथों का चूड़ा है बड़ा ही कीमती मेरे तो हाथ कमण्डल दूजे में डम डम डमरू आपका क्या होगा ओ गौरां रानी अपनी तो जैसे तैसे...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भक्त और देवी गौरां रानी के बीच प्रेम और समर्पण का संदेश है। भक्ति में व्यक्ति अपने साधारण जीवन को दर्शाते हुए कहता है कि उसकी भौतिक वस्तुएं और संपदा अनमोल नहीं हैं, लेकिन देवी की कृपा और प्रेम सबसे महत्वपूर्ण हैं। 'आपका क्या होगा ओ गौरां रानी' इस पंक्ति से भक्त देवी को संबोधित करते हुए पूछते हैं कि उनके पास कीमती सामान हैं, जबकि उनके पास केवल साधारण वस्त्र हैं। यह एक गहरा भाव प्रदर्शित करता है कि वस्तुओं की भव्यता से ज्यादा महत्वपूर्ण है आंतरिक समर्पण।

भजन में भावना की गहराई से भक्त अपनी आत्मा की सच्चाई को प्रकट करता है। 'मेरे तो पैरों में घुँघरू' इस शब्द का अर्थ समझाता है कि शांति और सरलता में भी आनंद है। भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों को धूमिल करते हुए एक सहजता से स्वीकार करता है, कि अंत में देवत्व केवल प्रेम और भक्ति से अनुभव किया जा सकता है। देवी गहन सौंदर्य और संपत्ति की प्रतीक हैं, जबकि भक्त का साधारण व्यक्तित्व यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति में बाह्य रूप की कोई आवश्यकता नहीं है।

भक्ति मार्ग का यह गान हमें यह सिखाता है कि आध्यात्मिकता भौतिकता से भिन्न है। भक्त अपनी साधारणता में गौरां रानी की महिमा का गुणगान करता है, जो हमें इस विचार की ओर ले जाता है कि हमारी श्रद्धा और प्रेम ही सर्वोच्च हैं। इस पाठ में एहसास होता है कि ध्यान और साधना का सही अर्थ प्रेम और समर्पण है, न कि भौतिक दुनिया की चमक। यहीं से भक्ति का मार्ग खुलता है, जहाँ भक्त अपने इंद्रियों को नियंत्रित कर पूर्णता की ओर अग्रसर होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भारतीय संस्कृति में भक्ति एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जहाँ भक्त के व्यक्तित्व की साधारणता एक विलक्षण अनुभव में बदल जाती है। इस भजन का संदर्भ प्रेम और भक्ति को दर्शाने वाली पुरानी परंपराओं से है, जैसे भक्ति सूफी परंपरा या भक्ति आंदोलन। भक्तों के लिए, यह गीत उनकी आस्था की ओर एक स्पष्ट दृष्टिकोण बनाता है, साथ ही विभिन्न पुराणों में उल्लेखित देवी देवताओं के प्रति उनकी श्रद्धा को भी दर्शाता है। यह भजन हमें यह यथार्थ बताता है कि प्रेम भक्ति का पथ है, जो आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने और सुनने से मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। इससे भक्त की भक्ति में वृद्धि होती है, जो चिंता और तनाव को दूर करने में सहायता करती है। भजन के राग-रागिनियाँ शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाएं और मनस्विता में सांगीतिक आनंद का अनुभव कराते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सूर्योदय और सूर्यास्त के समय करें। एक साफ स्थान पर बैठकर दूध, शहद, या सफेद फूलों की भेंट चढ़ाएं। हाथ में कमल, तुलसी या शिवलिंग जैसा नैतिक वस्तु रखकर ध्यान की अवस्था में रहें। 'अपनी तो जैसे तैसे' को गाते समय मन में प्रेम और समर्पण का भाव भरें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी पर आधारित है?

यह भजन देवी गौरां रानी पर आधारित है, जो अपने भक्तों का प्रेम और समर्पण स्वीकार करती हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

भजन का मुख्य संदेश है कि भक्ति में बाहरी वैभव की कोई आवश्यकता नहीं है, सच्ची भक्ति सरलता और प्रेम में होती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष अवसर है?

इस भजन का जाप विशेष रूप से त्योहारों, विशेष पूजा, या किसी भी सामान्य दिन में किया जा सकता है, जिससे भक्तों को मानसिक शांति और खुशी प्राप्त हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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