ram Hridayam सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

दया थोड़ी सी कर दो न मेरे दामन को भर दो ना (Daya thodee see kar do na mere daaman ko bhar do na lyrics in Hindi)

इस भजन में श्याम से दया की प्रार्थना की गई है। भक्त अपने सुख-दुख के लिए श्याम की कृपा की याचना करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम की अनुकंपा: भक्ति का संजीवनी साधन

इस भजन में भक्तिकाल की गहराई और श्याम से दया की प्रार्थना की गई है।

दया थोड़ी सी कर दो न मेरे दामन को भर दो नालाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँओ श्याम मेरे श्याम ............प्रभु मुझ पे कृपा कर दे तू तो ममता की मूरत हैमैं प्यासा हूँ तू सागर है मुझे तेरी ज़रूरत हैदया की बून बरसाओ मुझे ना और तरसाओलाल मैं भी तुम्हारा हूँतो फिर क्यों बेसहारा हूँदया थोड़ी सी कर दो न ............सभी का बन गया मैं पर कोई मेरा न बन पायाबड़ी ही आस लेकर के तुम्हारे दर पे मैं आयातुम्ही तो हो मेरी हिम्मत तेरे बिन क्या मेरी कीमतलाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँदया थोड़ी सी कर दो न ............मेरे हालात पे माधव हर कोई तंज कसता हैतड़पता देख कर मुझको ज़मान खूब हँसता हैये दुनिया लाज की दुश्मन दुखाती है ये मेरा मनलाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँदया थोड़ी सी कर दो न ............दुखों की रात है तो क्या सुख का सूरज भी निकलेगादेख कर के मेरे आंसू श्याम तेरा दिल पिघलेगाहलक पे जान है मेरी दया का दान दे दे रेलाल मैं भी तुम्हारा हूँ तो फिर क्यों बेसहारा हूँदया थोड़ी सी कर दो न ............ओ श्याम मेरे श्याम ............
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भक्ति और प्रेम से भरपूर यह गीत भक्त के हृदय की गहराइयों से निकलती प्रार्थना है। यहाँ, भक्त भगवान श्याम से दया की याचना कर रहा है, जब वह कहता है, "दया थोड़ी सी कर दो न मेरे दामन को भर दो न।" इस वाक्य में आत्मीयता और विनम्रता का भाव है। भक्त अपने दीन-हीन अवस्था का वर्णन करते हुए यह पूछता है कि, "मैं भी तुम्हारा हूँ, तो फिर क्यों बेसहारा हूँ?" यह प्रश्न भक्त के हृदय में झलकता है, जहाँ वह अपने दुख-दर्द को श्याम के सामने रखता है। इसी प्रकार, "प्रभु मुझ पे कृपा कर दे तू तो ममता की मूरत है" का भाव दर्शाता है कि भक्त भगवान की ममता और करुणा का अनुभव करना चाहता है। भक्त खुद को श्याम के सागर से तुलना करते हुए कहता है, "मैं प्यासा हूँ, तू सागर है", यह बताता है कि केवल श्याम से ही जीवन की सच्ची संतोष की प्राप्ति हो सकती है।

भावार्थ के अनुसार, इस भजन में श्याम के प्रति गहरी श्रद्धा और अगाध विश्वास है। भक्त कहता है, "सभी का बन गया मैं पर कोई मेरा न बन पाया।" यहाँ भक्त का त्याग और दर्द स्पष्ट है, जिससे यह सिद्ध होता है कि अध्यात्म की राह में अपने प्रियजनों का भी त्याग करना पड़ता है। भक्त का यह भाव कि, "तुम्ही तो हो मेरी हिम्मत, तेरे बिन क्या मेरी कीमत" उस निर्भीकता और सुरक्षा का प्रतीक है जो एक सच्चे भक्त को अपने आराध्य में मिलती है। उत्तरदायी शक्ति की प्राप्ति का यह अहसास ही भक्त को संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

इस भजन का मूल सिद्धांत भक्ति मार्ग की सरलता और गहराई को दर्शाता है। "दुखों की रात है तो क्या सुख का सूरज भी निकलेगा" यह जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, यह हमें सिखाता है कि भक्ति की राह में भले ही हम दुखों का सामना करें, लेकिन अंत में सुख का सामना भी करना पड़ता है। भक्त का अनुरोध कि, "देख कर के मेरे आंसू श्याम तेरा दिल पिघलेगा" भगवान के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। यह विश्वास भक्ति के मार्ग का एक महत्वपूर्ण सबक है, जो भक्त को सिखाता है कि भगवान सदा अपने भक्तों की हर स्थिति में सहायता करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान कृष्ण के प्रति इस भजन में आस्था कृतज्ञता का प्रदर्शन है, जो अग्रगण्य पुराणों में मिलता है। भक्तिभाव में लीन होकर किए गए इस प्रकार के प्रार्थना-गीतों का महत्व वेदों एवं उपनिषदों में है। यह मान्यता भी है कि जब भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास से भगवान की आराधना करता है, तो वह न केवल अपनी समस्याओं का समाधान पा सकता है, बल्कि आत्मिक संतोष भी प्राप्त कर सकता है। श्रीमद्भगवद गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि, "जो भक्त सच्चे मन से मुझे याद करते हैं, मैं उन्हें कभी नहीं भुलाता।" यह भजन इसी आश्वासन की पुष्टि करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति, और आध्यात्मिक विकास होता है। भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि और समर्पण का अनुभव होता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से जीवन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो निराशा को दूर करने में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय से पूर्व या संध्याकाल में किया जा सकता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और फूलों, फल, या दूध का भोग अर्पित करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, पूर्ण मन से भजन का गायन करना चाहिए ताकि भक्ति की भावना में कोई विघ्न न आए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन की विशेषता क्या है?

यह भजन भक्त की श्यामी हृदय की गहराइयों को प्रकट करता है, जहाँ वह दया और कृपा की याचना करता है।

क्या इस भजन का जाप करने से लाभ होता है?

जी हाँ, इस भजन का जाप मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।

इस भजन में भक्त किस प्रकार की भावनाएँ प्रकट करता है?

भक्त अपनी दीन-हीन अवस्था, दुख, और दिव्यता की याचना करते हुए अपने आराध्य के प्रति गहरी श्रद्धा से प्रकट करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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