Matarani Bhajan सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

चौसठ जोगणी रे भवानी लिरिक्स (Chausath Jogani Re Bhawani Dewaliye Ramajay Lyrics in Hindi) - Matarani Bhajan

चौसठ जोगणी भजन द्वारा देवी भवानी की भक्ति और शक्तियों का गुणगान करें, जो जीवन में शक्ति और संजीवनी प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

चौसठ जोगणी: देवी की महिमा का अनुग्रह

भक्तों के लिए एक दिव्य भजन, जो माँ भवानी के चौसठ जोगिणियों की स्तुति करता है।

चौसठ जोगणी रे भवानीदेवलिये रमजायघूमर घालणि रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥देवलिये रमजाय म्हारेआंगणिये रमजायचौसठ जोगणी रे भवानीदेवलिये रमजायघूमर घालनी रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥हंस सवारी कर मोरी मैयाब्रम्हा रूप बणायोब्रम्हा रूप बणायो नवदुर्गाब्रम्हा रूप बणायोचार वेद मुख चार बिराजेचारा रो जस गायो ॥घूमर घालनी रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥गरुड़ सवारी कर मेरी मैयाविष्णु रूप बणायोविष्णु रूप बणायो नवदुर्गाविष्णु रूप बणायोगदा पदम संग चक्र बिराजेमधुबन रास रचायो ॥घूमर घालनी रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥नंदी सवारी कर मेरी मैयाशक्ति रूप बणायोशक्ति रूप बणायो नवदुर्गाशक्ति रूप बणायोजटा मुकुट मै गंगा खळकेशेष नाग लीपटायो ॥घूमर घालनी रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥सिंघ सवारी कर मेरी मैयाशक्ति रूप बणायोशक्ति रूप बणायो नवदुर्गाशक्ति रूप बणायोसियाराम तेरी करे स्तुतिभक्त मंडल जस गायो ॥घूमर घालनी रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥चौसठ जोगणी भवानीदेवलिये रमजायघूमर घालणि रे भवानीदेवलिये रमजाय ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश माँ भवानी की सार्वभौमिक शक्ति और उनके विभिन्न अवतारों की महिमा का गुणगान करना है। चौसठ जोगिणियों का उल्लेख करके यह भजन दिव्य शक्तियों और तत्वों का मिसाल प्रस्तुत करता है। जैसे हंस, गरुड़, नंदी, और सिंह का उल्लेख किया गया है, ये सभी देवी के स्वरूप और शक्तियों का प्रतीक हैं। 'हंस सवारी कर मोरी मैया' में यह संकेत है कि माँ के साथ हर भक्ति भावना के साथ यात्रा की जा सकती है। इस भजन में वेदों के चार मुखों का उल्लेख भी है, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि वेदों का ज्ञान और मंत्रों का जप माँ के प्रति समर्पित है। माँ का यह स्वरूप भक्तों को शक्ति और साहस देता है, जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की ओर ले जाता है।

इसके भावार्थ में माँ भवानी की जोगिणियों का जिक्र न केवल उनके दिव्य रूपों का महत्त्व है, बल्कि यह भी है कि भक्त कैसे उनके प्रति समर्पण और श्रद्धा से जुड़ सकते हैं। 'घूमर घालनी रे भवानी' का अर्थ है कि देवी की कृपा के साथ भक्त का जीवन हर दिशा में सुगम बना होता है। यह निर्भीकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है जो शिष्य को कई दुर्जय बाधाओं को पार करने की क्षमता प्रदान करता है। इस भजन का गान करते समय भक्त अपनी समस्याओं, चुनौतियों और विफलताओं को मात करने का विश्वास प्रकट करते हैं और माँ की रहमदिली के प्रति अपनी भक्ति को प्रकट करते हैं।

इस भजन के धार्मिक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्तों को कैसे माँ भवानी की कृपा प्राप्त होती है। यह देवी की भक्ति का एक उच्च स्तर है, जहाँ भक्त विभिन्न रूपों में उनकी स्तुति करते हैं। भक्ति का यह रास्ता ध्यान, साधना और स्थायित्व लेकर आता है। भजन में शक्ति का अनुपम स्वरूप भी देखा जाता है, जो अपने भक्तों को किसी भी कठिनाई का सामना करने और मानसिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है। यहाँ तक कि भक्त मंडल की संगति से भी शक्तियों की आभा को महसूस किया जा सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का ऐतिहासिक संदर्भ कई पुराणों में मिलता है, जहाँ देवी की जोगिणियाँ और उनकी विभिन्न शक्तियों का वर्णन मिलता है। देवी भागवत में विशेषकर माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया गया है, जो इस भजन में उल्लेखित हैं। रामायण और महाभारत में भी देवी की शक्ति को प्रमुखता से दर्शाया गया है। ये जोगिणियाँ अनेक रूपों में प्रकट होती हैं और अपने भक्तों को व्यक्तिगत दृष्टि से मार्गदर्शन करती हैं। इस भजन का जप करने से भक्तों में आस्था और विश्वास की वृद्धि होती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जप मानसिक शांति, आत्मविश्वास और उर्जा को बढ़ाने वाला होता है। यह भक्तों को भावनात्मक स्थिरता देता है और जीवन में आने वाले संकटों का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा, यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि नियमित भजन से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मानसीक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को सुबह या संध्या काल में गाया जा सकता है। इसे गाते समय एक शांत स्थान पर बैठना चाहिए और ध्यान को केंद्रित करना चाहिए। पूजा करते समय दीया जलाना, माँ को फूलों की माला अर्पित करना और मिठाई का भोग अर्पित करना अच्छा रहता है। भजन का सच्चे मन से गाना और माँ की कृपा पर विश्वास रखना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

चौसठ जोगणी क्या हैं और उनका महत्व क्या है?

चौसठ जोगणी देवी माँ के विभिन्न स्वरूपों का संग्रह हैं, जो भक्तों को शक्ति और कौशल प्रदान करते हैं। ये देवी शक्ति का प्रतीक हैं और भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और उत्साह भरते हैं।

इस भजन का जप करने का सही समय कौन सा है?

इस भजन का जप सुबह सूर्योदय से पहले या संध्या समय करना सर्वोत्तम होता है। ये समय मानसिक और आध्यात्मिक शांति के लिए आदर्श होते हैं।

क्या इस भजन को गाने के लिए किसी विशेष पूजा विधि की आवश्यकता है?

भजन को गाने के लिए केवल एक शुद्ध मन और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। साधक को यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे पूजा में संलग्न रहें और माँ को प्रसन्न करने का प्रयास करें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 16 Oct 2026

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