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भक्ति रस काव्य व भजन

प्रभु ही सहारा लिरिक्स (Prabhu Hi Sahara Lyrics in Hindi) - by CA. Puneet Thukral Shyam Bhajan - Bhaktilok

142 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रभु का सहारा: जीवन के रत्न

अपने मन के डर और संकोच को समाप्त करने के लिए इस भजन को गाएं और प्रभु से मदद मांगें।

प्रभु ही सहारा लिरिक्स (Prabhu Hi Sahara Lyrics in Hindi) -भटकी है नाव मेरी दिखे ना किनारा प्रभु आके मुझको दे दो सहारा साथी ना कोई मेरा तेरे सिवा है मुझे आके जो देदे सहारा भटकी है नाव मेरी................ श्याम मेरे श्याम , श्याम मेरे श्याम सागर सी गहरी दुखों की ये घड़ियाँ बिखरी हुई जैसे जीवन की कड़ियाँ आकर पिरो दो बाबा माला में मोती जीवन में खुशियों की बरसात होगी भटकी है नाव मेरी.............. अगर साथ दोगे तो चलता रहूँगा जीवन की हर बाधा हंस के सहूंगा भरोसा ना टूटे बाबा कृपा ऐसी करना अपनी चौखट से बाबा दूर ना करना भटकी है नाव मेरी.............. पूछे कोई पंकज से नाम तेरा ले लूँ पता तेरे दर का बाबा सबको मैं दे दूँ मूरत मैं तेरी बाबा दिल में बसा लूँ खाटू को अपने घर का पता में बना लूँ भटकी है नाव मेरी दिखे ना किनारा प्रभु आके मुझको दे दो सहारा....||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य अर्थ तिमाही के जीवन की चुनौतियों में प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण है। पहला ही स्त्रोक यह बताता है कि कैसे जीवन की नाव भटक गई है, किनारा नहीं दिखाई दे रहा है। यहाँ 'प्रभु' से सहारे की विनती की जा रही है, जो कि भक्ति में समर्पण का एक महत्वपूर्ण पहलू है। भक्त कहता है कि उसके अलावा कोई साथी नहीं है, जो उसकी सहायता कर सके। यह भावना भक्त के दिल की गहराई को दर्शाती है, जब वह प्रभु को अपने जीवन का एकमात्र सच्चा साथी समझता है। इसी प्रकार, भक्ति का यह मार्ग हमें सिखाता है कि जब हम संकट में होते हैं, तभी हम अपने ईश्वर के निकट पहुँचते हैं और उनसे मार्गदर्शन का अनुरोध करते हैं।

निर्गुण ब्रह्म की भक्ति में यही गहराई देखने को मिलती है कि भक्त ने अपनी समस्त पीड़ाओं का उल्लेख किया है। 'सागर सी गहरी दुखों की ये घड़ियाँ' वाली पंक्ति इसे और स्पष्ट करती है। यहाँ 'बाबा' के नाम से संबोधित करना उनके प्रति श्रद्धा, प्रेम और सम्मान प्रकट करता है। भक्त का मानना है कि यदि प्रभु उनका साथ देंगे तो वे हर बाधा को हंसते-हंसते सह लेंगे। यह एक गहरे विश्वास की बात है कि सकारात्मक मनोवृत्ति के साथ हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है, जो इस भजन के साधारण yet profound भावार्थ को दर्शाता है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग की गूढ़ताएँ स्पष्ट होती हैं। श्रध्दालु अपने मन में प्रभु की मूरत को बसाने का उल्लेख करता है, जो हमें यह सिखाता है कि भक्ति केवल पूजा-आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने हृदय के भीतर अनुभव करना भी आवश्यक है। दयालुता और करुणा के प्रतीक में अपने सच्चे प्रेम को पहचानते हुए हम खुद को एकतरफा प्रेम के सफर पर ले जा सकते हैं। ये भावनाएँ न केवल भक्ति को प्रमाणित करती हैं, बल्कि जीवन के गहरे अर्थ को भी सुगम बनाती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन पारंपरिक भक्ति साहित्य की एक अद्भुत कड़ी है जो विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के विचारों को समाहित करता है। उदाहरण के लिए, रामायण में भक्तों की ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण को दर्शाने वाली अनेक कथाएँ मिलती हैं। महाभारत में भी भक्तिभाव का स्वरूप हमें मिलता है। भक्ति का यह मार्ग व्यक्ति को जीवन के दुखों से उबरने का प्रेरणा देता है और एक मजबूत मानसिकता बनाने में मदद करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मानसिक संतुलन स्थापित होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। भक्तिभाव से भरा यह भजन उन लोगों के लिए विशेष लाभदायक है जो कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। नियमित रूप से इसे गाने से आंतरिक शांति और सौम्यता का अनुभव होता है, जिससे दिमाग को राहत मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम है। पूजा स्थल पर दीप जलाना और अग्नि में गंधर्व धूप या अगरबत्ती लगाना शुभ रहता है। इस भजन को श्रद्धा और ध्यान के साथ बैठ कर गाना चाहिए; यह समर्पण की भावना को प्रगाढ़ करती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रभु ही सहारा भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब जिंदगी कठिनाई से भरी होती है, तब हमें अपने ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए और उनकी कृपा से सहारा मांगना चाहिए।

इस भजन का कौन सा हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है?

भजन के हर हिस्से में भक्त की भावनाएँ और प्रभु से सहारे की आवश्यकता का उल्लेख है, लेकिन 'भटकी है नाव मेरी' पंक्ति इसे और गहरा बनाती है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना सबसे अच्छा माना जाता है, जब वातावरण शांति और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 07 Sep 2026

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