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है कौन बड़ा तुमसे मैया ओ त्रिभुवन की प्रतिपाली लिरिक्स (Hai Kaun Bada Tumse Maiya O Tribhuvan Ki Pratipaali Lyrics in Hindi) - Sherawali Bhajan - Bhaktilok

146 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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त्रिभुवन की माता: माँ दुर्गा का भव्य स्तुति

इस भव्य भजन के माध्यम से माँ दुर्गा की अद्वितीय महिमा का गान करें और भक्ति में स्वयं को लीन करें।

है कौन बड़ा तुमसे मैया ओ त्रिभुवन की प्रतिपाली।श्लोक नमामि दुर्गे नमामि कालीनमामि देवी महेश्वरीनमामि साक्षातपरब्रम्ह परमेश्वरीनमामि माता सुरेश्वरी।है कौन बड़ा तुमसे मैयाओ त्रिभुवन की प्रतिपालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।।जो ध्यान तेरा करले मन मेंवो जग से मुक्ति पाए(जय माँ ३ जगदम्बे)जो ध्यान तेरा करले मन मेंवो जग से मुक्ति पाएतू प्रलयकाल में आकर केभक्तो को मात बचाएभक्तो को मात बचाएअपने भक्तो की करती हैहर संकट में रखवालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।।जब हाहाकार मचा जग मेंसब सुर और नर घबराए(त्राहिमाम ३ दुर्गे)जब हाहाकार मचा जग मेंसब सुर और नर घबराएतब त्राहिमाम माता दुर्गेकह देव शरण में आएसब देव शरण में आएझट महिषासुर वध करने कोतुमने कृपाण संभालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।।तू ममता की भंडार हो माँहो शिव शक्ति रुद्राणी(जय माँ ३ जगदम्बे)तू ममता की भंडार हो माँहो शिव शक्ति रुद्राणीनित सुमिरण करते नाम तेरासारी दुनिया के प्राणीसारी दुनिया के प्राणीजिसने जो माँगा वर उसकोतू पलभर में दे डालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।।ओ मैया बस तेरी सेवा में हीबीते सारा जीवन(जय माँ ३ जगदम्बे)एक बार दया कर शर्मा औरलख्खा को दे दो दर्शनभक्तो को दे दो दर्शनअपने भक्तो की विनती कोबस तू ही सुनने वालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।।है कौन बड़ा तुमसे मैयाओ त्रिभुवन की प्रतिपालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावालीजगदम्बे दुर्गे कालीमेरी मैया शेरावाली।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ दुर्गा की महिमा और उनके अनुग्रह की भावना को स्थापित करना है। भजन के आरंभ में पूछा गया है, 'है कौन बड़ा तुमसे मैया', जो दर्शाता है कि माँ दुर्गा का स्थान विश्व में सर्वोच्च है। 'त्रिभुवन की प्रतिपाली' से स्पष्ट होता है कि वे कण-कण में व्याप्त हैं और संपूर्ण सृष्टि की रक्षक हैं। माँ का नाम सुनते ही भक्त का मन अपने भीतर की शांति और शक्ति का अनुभव करता है। यह भजन ऐसा आत्मबल प्रदान करता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, वह कष्टों से मुक्त होकर सच्चे सुख का अनुभव कर सकता है। जब यह कहा जाता है कि 'जो ध्यान तेरा करले मन में, वो जग से मुक्ति पाए', इसका तात्पर्य है कि माँ की ध्यान में लीन होने से ही वास्तविक मुक्ति की प्राप्ति होती है।

भावार्थ में, भक्त हाहाकार की स्थिति को देखकर माँ दुर्गा की ओर आकृष्ट होते हैं, जब पृथ्वी पर संकट आता है। 'जब हाहाकार मचा जग में, सब सुर और नर घबराए', यहां यह संकेत मिलता है कि जब सभी देवता और मानव के हृदय में भय समा जाता है, तब केवल माँ की कृपा ही समाधान प्रदान कर सकती है। माँ दुर्गा की क्षमताओं की अद्वितीयता को दर्शाते हुए यह भजन हमें बताता है कि कैसे उन्होंने महिषासुर का समूल वध किया, उनके कल्याण की भावना लिए। भक्त की विनती करती है कि 'बस तू ही सुनने वाली', यानि माँ का प्रेम, अनुकंपा और उनकी करुणा अद्वितीय है। इस भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि आत्मिक संतोष और आदर्श जीवन जीने के लिए माँ दुर्गा का ध्यान करना अत्यंत आवश्यक है।

इस भजन में ध्यान, भावना और भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है, जहां भक्त अपनी समस्याओं, भय और चिंताओं को माँ के चरणों में समर्पित करते हैं और उनके अनुग्रह की कामना करते हैं। 'तू ममता की भंडार हो माँ', यह पंक्ति माँ दुर्गा के मातृ स्वरूप को प्रकट करती है। शिक्षा यह है कि यदि हम सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं, तो हमें अवश्य ही उनके आशीर्वाद प्राप्त होंगे। वो ज्ञान प्रदान करने वाली, संकटमोचक और लागों की समस्त मां है। भक्ति का यह मार्ग हमें सच्चे प्रेम, आशा और संतोष से भरता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और पौराणिक संदर्भ अत्यंत समृद्ध है। देवी दुर्गा को सम्पूर्ण सृष्टि की पालनहार और संकटमोचक माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि जब दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है, तब माँ दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में उनकी विजय का वर्णन देवी महात्म्य में मिलता है, जो यह दर्शाता है कि कैसे वे बुराई का संहार करती हैं। यहाँ भजन का यह संदर्भ हमें यह सिखाता है कि जब हम संकट में होते हैं, तब माँ दुर्गा की भक्ति हमें सुरक्षित करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन के नियमित जप से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इसे गाने या सुनने से भक्त को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह भजन दीर्घकालिक बीमारी में भी संजीवनी देता है और भक्त को ауру मुक्त करता है साथ ही किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है। यह भजन ध्यान के लिए एक उत्तम माध्यम है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही जप सुबह या शाम के समय विशेष प्रभावी होता है। पूजा स्थान पर एक दीया जलाना चाहिए और गाय के घी या तिल के तेल का उपयोग करना चाहिए। भक्त को शुद्ध मन और निस्वार्थ भावना के साथ ध्यान करना चाहिए। साधना करते समय माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा भाव रखना आवश्यक है। भक्त को चाहिए कि वह ध्यान मुद्रा में बैठकर मन में सकारात्मक विचार रखें और माँ का नाम जपें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन में माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान किया गया है, जो उन्हें सृष्टि की रक्षक और संकटों से मुक्त करने वाली बताता है।

क्या इस भजन का नियमित पाठ करना फायदेमंद है?

हां, इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करता है, साथ ही यह मानसिक तनाव को भी कम करता है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए, जब मन शांत और एकाग्र हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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