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Sita mata Bhajan

लाल लाल चुनरी सितारों वाली जिसे ओड कर आई है माँ शेरावाली (Lal lal chunari sitaro vali jise odh kar aai hai maa sheravali Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

143 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ शेरावाली का भव्य स्तोत्र: अनुग्रह की पहचान

माँ शेरावाली की कृपा से हर भक्त के जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि का संचार होता है।

लाल लाल चुनरी सितारों वालीजिसे ओड कर आई है माँ शेरावालीजिसको ब्रह्मा ने बनाया जिसको विष्णु ने सजायाजिसको भोले ने रंग में रंग डालीलाल लाल चुनरी सितारों वालीरंग चुनरी का शक्ति आपार देतापाप मन वसे इसको मार देताइसने सारी अला बला भगतो की टालीजिसे ओढ़के के आई है माँ शेरावाली...इसके कौने में रिद्धि सिद्धि रहती हैशुभ और लाभ भक्तो को देती हैभक्तो के मन को ये चुनरी renforcer लिताजी ओढ़के के आई है माँ शेरावाली...माँ के सिर पे ये चुनरी सुहानी लगतीसारी दुनिया है इसकी दीवानी लगतीदुःख के बदल दूर ये भगने वालीलाल लाल चुनरी सितारों वालीअपनी चुनरी की छाया में बिठाले श्याम कोलखा जाप्ता रहे तेरे नाम कोमतारी दत्त को देदे माँ अमृत की प्यालीजिसे ओढ़के के आई है माँ शेरावाली...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय देवी माँ शेरावाली की महिमा और उनके प्रति भक्तों की भक्ति व्यवस्था है। 'लाल लाल चुनरी सितारों वाली' इस पंक्ति के माध्यम से माँ की सुंदरता और दिव्यता का वर्णन किया गया है। यह चुनरी, जो देवी माँ ने ओढ़ रखी है, शक्ति और सुखों का प्रतीक है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव का नाम लेकर यह भजन यह दर्शाता है कि सृष्टि के हर तत्व में देवी माँ का योगदान है। यह क्रमश: दिखाता है कि वे न केवल सृष्टि की रचना करती हैं, बल्कि उसे सजाने और रंगीन बनाने में भी मदद करती हैं। इसके बाद यह भी कहा गया है कि यह चुनरी भक्तों के पापों को समाप्त करने में सहायक है, जिससे सभी बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं।

भजन में माँ की लाल चुनरी को 'शुभ' और 'लाभ' देने वाली बताया गया है, जो भक्तों को मनोबल और ऊर्जा प्रदान करती है। इससे भक्तों का मन सकारात्मकता की ओर अग्रसर होता है। माँ का यह आशीर्वाद भक्तों को सभी प्रकार की समस्याओं और दुखों से दूर करने का आश्वासन देता है। 'दुःख के बदल दूर ये भगने वाली' यह पंक्ति हमें यह समझाती है कि माँ का आशीर्वाद न केवल भौतिक सुख दे सकता है, बल्कि मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है। देवी माँ की कृपा से भक्तों का हृदय भक्तिमय हो जाता है और वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

इस भजन का गहरा धार्मिक और दार्शनिक संदर्भ है। यह भक्ति मार्ग का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त अपनी श्रद्धा, भक्ति और प्रेम से देवी माँ की आराधना करते हैं। यह उन ब्रह्मिक शक्तियों को प्रकट करता है जो माँ की चुनरी के माध्यम से हमारि जीवन को आध्यात्मिक शक्तियों से भर देती हैं। भक्ति का यह मार्ग भव्यता, विश्वास और प्रेम से विकसित होता है, जहाँ भक्त अपने दुखों और कठिनाइयों को माँ के चरणों में अर्पित कर देते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का उल्लेख भारतीय धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में व्यापक रूप से किया जाता है। माता दुर्गा, जिन्हें शेरावाली भी कहा जाता है, का वर्णन देवी भागवत, देवी महात्म्य, और कई अन्य पुराणों में मिलता है। यह भजन दार्शनिकता और भक्ति का प्रतिष्ठित सम्पर्क है, और भक्तों के लिए ये सुनहरे अवसरों की खोज में उनके धर्म के अनुशासन की ओर ले जाती हैं। महाकवि तुलसीदास ने भी श्रीराम की भक्ति में देवी माता की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सुख और सकारात्मकता प्राप्त होती है। यह जीव में भक्ति की भावना जागृत करती है और भक्त को ईश्वर के साथ एकता का अनुभव कराती है। निरंतर इसे गाने से भक्त की आस्था और विश्वास में वृद्धि होती है, जिससे जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या रात को किया जा सकता है, जब मन शांत हो। जाप से पहले एक दीपक जलाएं और माँ शेरावाली के चित्र का पूजन करें। समर्पित मन से भक्ति भाव में बैठकर इस भजन का गान करें, जिससे आपकी भक्ति शक्ति और संप्रदाय में वृद्धि होगी।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

माँ शेरावाली की उपासना का सही तरीका क्या है?

माँ शेरावाली की उपासना करते समय शुद्ध मन और श्रद्धा से उनका ध्यान करना चाहिए। दीप जलाएँ, फूल चढ़ाएँ और इस भजन का स्वरूप करें। इससे माँ की कृपा प्राप्त होती है।

क्या इस भजन का पाठ रोज करना चाहिए?

हाँ, इस भजन का पाठ नियमित रूप से करने से मानसिक तनाव कम होता है और भक्त को शांति एवं समृद्धि मिलती है। यह चित्त को स्थिर करने में मदद करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष महात्म्य है?

इस भजन का महात्म्य माँ शेरावाली की कृपा का प्रकट करना है। यह भक्तों को देरी, तनाव और समस्याओं से उबारने का आश्वासन देता है, जिससे भक्त की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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