शनि अष्टोत्तर नामावली (Shani Ashtottar Shatanamavali 108 Names) - शनि देव के 108 पावन नाम एवं उनका महत्व
वैदिक ज्योतिष और हिन्दू धर्म में भगवान शनि देव को कर्मफलदाता, न्याय के देवता और अनुशासन के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। 'शनि अष्टोत्तर शतनामावली' (Shani Ashtottar Shatanamavali) भगवान शनि के 108 पावन नामों का एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र है। जो भक्त पूर्ण निष्ठा, नियम और श्रद्धा के साथ शनि देव के इन 108 नामों का स्मरण या पाठ करते हैं, उनके जीवन के समस्त कष्ट, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। भगवान शनि किसी को उसके कर्मों के बिना दंडित नहीं करते, बल्कि वे हर मनुष्य को उसके श्रेष्ठ और निष्काम कर्मों के आधार पर जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम शनि अष्टोत्तर नामावली के सम्पूर्ण पाठ, प्रत्येक नाम के गूढ़ अर्थ, जाप की विधि, स्तोत्र के आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Complete 108 Names Lyrics
ॐ शनेश्वरय नमः।
ॐ शान्ताय नमः।
ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः।
ॐ शरण्याय नमः।
ॐ वरेण्याय नमः।
ॐ सर्वेशाय नमः।
ॐ सौम्याय नमः।
ॐ सुरवन्द्याय नमः।
ॐ सुरलोकैकविहाराय नमः।
ॐ सुखासनसुखासीनय नमः।
ॐ सूर्यपुत्राय नमः।
ॐ भास्करय नमः।
ॐ विशालनेत्राय नमः।
ॐ वृषध्वजाय नमः।
ॐ चर्मण्ये नमः।
ॐ नीलवर्णाया नमः।
ॐ देहाय नमः।
ॐ शिप्रलक्षणाय नमः।
ॐ नीलांगाय नमः।
ॐ महाकायाय नमः।
ॐ कालचक्रप्रवर्तकाय नमः।
ॐ चतुर्भुजाय नमः।
ॐ दण्डधराय नमः।
ॐ चर्मणे नमः।
ॐ त्रिशूलधराय नमः।
ॐ कपालधराय नमः।
ॐ गदाधराय नमः।
ॐ मुसलधराय नमः।
ॐ खड्गधराय नमः।
ॐ शक्तिधराय नमः।
ॐ धनुर्धराय नमः।
ॐ बाणधराय नमः।
ॐ परशुधराय नमः।
ॐ मुद्गरधराय नमः।
ॐ चक्रधराय नमः।
ॐ शंखधराय नमः।
ॐ पद्मधराय नमः।
ॐ मुकुटधारिणे नमः।
ॐ कुण्डलधारिणे नमः।
ॐ हारधारिणे नमः।
ॐ किरीटधारिणे नमः।
ॐ किरीटिने नमः।
ॐ मुकुटिने नमः।
ॐ शिरोधारिणे नमः।
ॐ करधराय नमः।
ॐ पादपादुकाय नमः।
ॐ नूपुरधारिणे नमः।
ॐ कटिसूत्रधारिणे नमः।
ॐ उपवीतधराय नमः।
ॐ यज्ञोपवीतिने नमः।
ॐ ब्रह्मचर्यव्रताय नमः।
ॐ सत्यधर्माय नमः।
ॐ धर्मराजाय नमः।
ॐ न्यायकारकाय नमः।
ॐ समदर्शने नमः।
ॐ निष्पक्षपाताय नमः।
ॐ निर्विकल्पाय नमः।
ॐ निराकाराय नमः।
ॐ निर्गुण्याय नमः।
ॐ निर्लोभाय नमः।
ॐ निष्कामाय नमः।
ॐ निष्पापाय नमः।
ॐ पवित्राय नमः।
ॐ पुण्याय नमः।
ॐ पुराणपुरुषाय नमः।
ॐ योगिध्येयाय नमः।
ॐ योगिन्यै नमः।
ॐ योगेश्वराय नमः।
ॐ योगिनां पतये नमः।
ॐ ज्ञानरूपाय नमः।
ॐ विज्ञानमयाय नमः।
ॐ बुद्धिप्रदाय नमः।
ॐ प्रज्ञाप्रदाय नमः।
ॐ स्मृतिप्रदाय नमः।
ॐ मेधाप्रदाय नमः।
ॐ यशप्रदाय नमः।
ॐ विजयप्रदाय नमः।
ॐ जयप्रदाय नमः।
ॐ सिद्धिप्रदाय नमः।
ॐ ऋद्धिप्रदाय नमः।
ॐ वृद्धिप्रदाय नमः।
ॐ आयुःप्रदाय नमः।
ॐ आरोग्यप्रदाय नमः।
ॐ धनप्रदाय नमः।
ॐ ऐश्वर्यप्रदाय नमः।
ॐ मोक्षप्रदाय नमः।
ॐ मुक्तिप्रदाय नमः।
ॐ गतिप्रदाय नमः।
ॐ मुक्तिदायकाय नमः।
ॐ अभयप्रदाय नमः।
ॐ वरप्रदाय नमः।
ॐ वरण्याय नमः।
ॐ वरदाय नमः।
ॐ वंदनीयाय नमः।
ॐ पूज्यायाय नमः।
ॐ अर्च्यायाय नमः।
ॐ स्मर्तव्याय नमः।
ॐ ध्यातायाय नमः।
ॐ स्तोत्राय नमः।
ॐ स्तुत्याय नमः।
ॐ अमिताय नमः।
ॐ अनन्ताय नमः।
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
ॐ सर्वव्यापिने नमः।
ॐ सर्वशक्तये नमः।
ॐ सर्वेश्ज्वराय नमः।
ॐ शनैश्चराय नमः।
श्रोत्र का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
शनि अष्टोत्तर शतनामावली के प्रत्येक नाम में भगवान शनि के विराट स्वरूप का दर्शन होता है। 'शनेश्वरय' का अर्थ है जो धीरे-धीरे यानी संयम और स्थिरता के साथ गति करते हैं। 'सूर्यपुत्रय' यह बताता है कि वे सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं। 'न्यायकारकाय' और 'समदर्शने' इस बात के प्रतीक हैं कि वे संसार में न्याय के सर्वोच्च अधिष्ठाता हैं और किसी के साथ भी पक्षपात नहीं करते। जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, उसे पुरस्कृत करते हैं और जो अन्याय या अधर्म के मार्ग पर चलता है, उसे कठोर पाठ पढ़ाकर सही रास्ते पर लाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से मन में धैर्य, सहनशीलता और सत्यनिष्ठा का संचार होता है।
शनि अष्टोत्तर नामावली की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Significance
हिन्दू पौराणिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को आयु, दुःख, संघर्ष, सेवा, न्याय और मोक्ष का कारक माना गया है। शनि अष्टोत्तर नामावली का जाप करने से साधक को मानसिक शांति मिलती है। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, उनके लिए यह स्तोत्र एक ढाल का काम करता है। इससे भय दूर होता है और जीवन में अनुशासन की भावना प्रबल होती है। इसके अलावा, शनि देव की आराधना से व्यक्ति को अपने पूर्वजन्मों और वर्तमान जन्म के कर्मों के प्रति सचेत रहने की प्रेरणा मिलती है।
जाप का समय, नियम एवं विधि | Chanting Time, Rules & Vidhi
शनि अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रदोष काल (संध्या के समय) या शनिवार की रात्रि में पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
- दिन: शनिवार, अमावस्या, और शनि जयंती।
- समय: ब्रह्ममुहूर्त अथवा सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल में।
- स्थान: घर के पूजा गृह में शनि यंत्र या मूर्ति के सामने, अथवा किसी पवित्र शनि मंदिर या पीपल वृक्ष के समीप।
- सामग्री: काले तिल, सरसों का तेल, नीला या काला आसन, धूप, दीप और गंध।
- नियम: पाठ करते समय मन में शुद्धता, संयम और सादगी रखनी चाहिए। गरीबों और असहायों की सेवा करना इस पाठ का सबसे बड़ा अंग माना गया है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Important Word Meanings
| शब्दावली (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | आध्यात्मिक संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| शनेश्वर | धीमी गति से चलने वाले | धैर्य और ब्रह्मांडीय गति के प्रतीक |
| न्यायकारक | न्याय करने वाले | कर्मों के अनुसार फल देने वाले |
| समदर्शी | सभी को समान दृष्टि से देखने वाले | निष्पक्षता और न्यायपरायणता |
| नीलाङ्ग | नीले रंग के शरीर वाले | शनि देव का दिव्य वर्ण |
| कालचक्रप्रवर्तक | समय के चक्र को चलाने वाले | काल और कर्म के नियंत्रक |
संबंधित मंत्र एवं पावन श्लोक | Related Mantras & Shloks
शनि अष्टोत्तर नामावली के पाठ के साथ निम्नलिखित बीज मंत्र और पौराणिक श्लोक का जाप करने से साधना पूर्ण होती है:
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
एक नजर में शनि अष्टोत्तर नामावली | Quick Information
| स्तोत्र का नाम | शनि अष्टोत्तर शतनामावली (108 Names of Shani Dev) |
|---|---|
| मुख्य देवता | भगवान शनि देव (कर्मफलदाता एवं न्याय देवता) |
| भाषा | संस्कृत एवं हिंदी भावार्थ |
| उद्देश्य | शनि दोष निवारण, मानसिक शांति, कर्म शुद्धि और न्याय प्राप्ति |
| शुभ अवसर | शनिवार, शनि जयंती, अमावस्या, साढ़ेसाती एवं ढैय्या काल |
| संबंधित पावक लेख | श्री शनि देव आरती, श्री शनि चालीसा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख प्राचीन सनातन ग्रंथों, ज्योतिषीय परंपराओं और लोक मान्यताओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। Bhaktilok.in का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, आध्यात्मिक रूप से समृद्ध और उपयोगी सामग्री प्रदान करना है। किसी भी विशेष अनुष्ठान या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिष आचार्य या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
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