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शनि अष्टोत्तर नामावली (Shani Ashtottar Shatanamavali 108 Names Lyrics in HIndi) - 108 Names of Lord Shani Dev - Bhaktilok

44 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री शनि देव की अष्टोत्तर नामावली

शनि देव की कृपा से जीवन में स्थिरता और सौभाग्य प्राप्त करें।

शनि अष्टोत्तर नामावली (Shani Ashtottar Shatanamavali 108 Names Lyrics in HIndi) -

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शनि अष्टोत्तर नामावली में भगवान शनि के 108 नामों का उल्लेख किया गया है, जो भक्ति और श्रद्धा के साथ उनका स्मरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रत्येक नाम अद्वितीय विशेषताओं को दर्शाता है। जैसे 'चक्री' नाम का अर्थ दर्शाता है कि शनि न्याय के पहिये को चलाते हैं और यह भी दिखाता है कि किसी व्यक्तित्व के कर्मों का फल अवश्य मिलता है। भगवान शनि स्वर्णिम न्याय के प्रतीक हैं, जो न केवल हमें धर्म की राह दिखाते हैं, बल्कि हमारे जीवन को सही दिशा भी देते हैं। इस स्तोत्र का जाप हमारे भीतर समर्पण और सद्भावना को बढ़ाता है। शनि देव का नाम लेना हमें उनके सान्निध्य में लाता है, जिससे हमारे सभी दुख दूर हो सकते हैं।

इस स्तोत्र में शनि देव की स्तुति की गई है और प्रत्येक नाम के माध्यम से उनके विविध स्वरूपों का वर्णन किया गया है। शनि के नामों के जाप से मानसिक शांति और भूतकाल एवं वर्तमान के कर्मों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। भक्ति रस से भरपूर यह भावार्थ हमें अपने कार्यों का पुनर्निधान करने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करता है। शनि देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है। प्रत्येक नाम में गहरे अर्थ छिपे हैं जो जीवन के कठिन समय में आशा का संचार करते हैं।

भगवान शनि ने हमेशा अपने अनुयायियों को सिखाया है कि कर्म का फल अनिवार्य है। इस संदर्भ में शनि अष्टोत्तर नामावली का पाठ उन सभी भक्तों के लिए मार्गदर्शक है जो जीवन में शांति और संतुलन खोज रहे हैं। यह दर्शाता है कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्ध‍ि होती है। शनि महाराज का स्मरण, आदि से अंत तक, हमें यह सिखाता है कि जीवन का लक्ष्य केवल सुख-समृद्धि नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और संतुलन भी होना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शनि देव का नाम लेना और उनकी नामावली का पाठ हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शनि देव का उल्लेख पौराणिक कथाओं में जैसे महाभारत, पुराणों और उपनिषदों में मिलता है, जहां उन्हें नकारात्मक प्रभावों से बचाव के देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भक्तों को यह विश्वास है कि शनि देव की कृपा से कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है। इस नामावली के माध्यम से भक्त अपने पापों की क्षमा और शुभ फल की कीर्ति प्राप्त कर सकते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस स्तोत्र का जाप करने से मानसिक शक्ति, शांति और सकारात्मकता में वृद्धि होती है। भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने, जीवन की कठिनाइयों का समाधान ढूंढने, और जीवन में संतुलन लाने में सहायता मिलती है। यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शनि अष्टोत्तर नामावली का पाठ सुबह के समय सूर्योदय के बाद या शनिवार को विशेष रूप से किया जाना चाहिए। पूजा करते समय लोबान और दीपक जलाना चाहिए। इस साधना में भक्त को मन का एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए और ध्यानपूर्वक नामावली का जाप करना चाहिए। वृत्तिपूर्ण मन से की गई साधना का फल अवश्य मिलता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शनि अष्टोत्तर नामावली का क्या महत्व है?

यह नामावली भगवान शनि की कृपा प्राप्त करने और जीवन में संतुलन और स्थिरता लाने के लिए महत्वपूर्ण होती है।

क्या शनि देव की पूजा केवल शनिवार को की जानी चाहिए?

हालांकि शनिवार को विशेष महत्व है, परंतु किसी भी दिन शनि देव की पूजा की जा सकती है।

इस स्तोत्र का सही पाठ करने का समय क्या है?

सुबह के समय या शनिवार को इस स्तोत्र का पाठ किया जाना विशेष फलदायी माना गया है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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