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माँ सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम नामावली लिरिक्स (Sarasvati Ashtottara Shatnam Namavali Lyrics in Hindi) - Ashtottar Shatnam - Bhaktilok

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

माँ सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम नामावली लिरिक्स (Sarasvati Ashtottara Shatnam Namavali Lyrics in Hindi) - 


ॐ सरस्वत्यै नमः 

ॐ महाभद्रायै नमः 

ॐ महामायायै नमः 

ॐ वरप्रदायै नमः 

ॐ श्रीप्रदायै नमः 

ॐ पद्मनिलयायै नमः 

ॐ पद्माक्ष्यै नमः 

ॐ पद्मवक्त्रायै नमः 

ॐ शिवानुजायै नमः 

ॐ पुस्तकभृते नमः॥ १० ॥


ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः 

ॐ रमायै नमः 

ॐ परायै नमः 

ॐ कामरूपायै नमः 

ॐ महाविद्यायै नमः 

ॐ महापातक नाशिन्यै नमः 

ॐ महाश्रयायै नमः 

ॐ मालिन्यै नमः 

ॐ महाभोगायै नमः 

ॐ महाभुजायै नमः॥ २० ॥


ॐ महाभागायै नमः 

ॐ महोत्साहायै नमः 

ॐ दिव्याङ्गायै नमः 

ॐ सुरवन्दितायै नमः 

ॐ महाकाल्यै नमः 

ॐ महापाशायै नमः 

ॐ महाकारायै नमः 

ॐ महांकुशायै नमः 

ॐ पीतायै नमः 

ॐ विमलायै नमः॥ ३० ॥


ॐ विश्वायै नमः 

ॐ विद्युन्मालायै नमः 

ॐ वैष्णव्यै नमः 

ॐ चन्द्रिकायै नमः 

ॐ चन्द्रवदनायै नमः 

ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः 

ॐ सावित्र्यै नमः 

ॐ सुरसायै नमः 

ॐ देव्यै नमः 

ॐ दिव्यालंकारभूषितायै नमः॥ ४० ॥


ॐ वाग्देव्यै नमः 

ॐ वसुधायै नमः 

ॐ तीव्रायै नमः 

ॐ महाभद्रायै नमः 

ॐ महाबलायै नमः 

ॐ भोगदायै नमः 

ॐ भारत्यै नमः 

ॐ भामायै नमः 

ॐ गोविन्दायै नमः 

ॐ गोमत्यै नमः॥ ५० ॥


ॐ शिवायै नमः 

ॐ जटिलायै नमः 

ॐ विन्ध्यावासायै नमः 

ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः 

ॐ चण्डिकायै नमः 

ॐ वैष्णव्यै नमः 

ॐ ब्राह्मयै नमः 

ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः 

ॐ सौदामिन्यै नमः 

ॐ सुधामूर्त्यै नमः॥ ६० ॥


ॐ सुभद्रायै नमः 

ॐ सुरपूजितायै नमः 

ॐ सुवासिन्यै नमः 

ॐ सुनासायै नमः 

ॐ विनिद्रायै नमः 

ॐ पद्मलोचनायै नमः 

ॐ विद्यारूपायै नमः 

ॐ विशालाक्ष्यै नमः 

ॐ ब्रह्मजायायै नमः 

ॐ महाफलायै नमः॥ ७० ॥


ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः 

ॐ त्रिकालज्ञायै नमः 

ॐ त्रिगुणायै नमः 

ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः 

ॐ शुम्भासुरप्रमथिन्यै नमः 

ॐ शुभदायै नमः 

ॐ स्वरात्मिकायै नमः 

ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः 

ॐ चामुण्डायै नमः 

ॐ अम्बिकायै नमः॥ ८० ॥


ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः 

ॐ धूम्रलोचनमर्दनायै नमः 

ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः 

ॐ सौम्यायै नमः 

ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः 

ॐ कालरात्र्यै नमः 

ॐ कलाधारायै नमः 

ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः 

ॐ वाग्देव्यै नमः 

ॐ वरारोहायै नमः॥ ९० ॥


ॐ वाराह्यै नमः 

ॐ वारिजासनायै नमः 

ॐ चित्राम्बरायै नमः 

ॐ चित्रगन्धायै नमः 

ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः 

ॐ कान्तायै नमः 

ॐ कामप्रदायै नमः 

ॐ वन्द्यायै नमः 

ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः 

ॐ श्वेताननायै नमः॥ १०० ॥


ॐ नीलभुजायै नमः 

ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः 

ॐ चतुरानन साम्राज्यायै नमः 

ॐ रक्तमध्यायै नमः 

ॐ निरंजनायै नमः 

ॐ हंसासनायै नमः 

ॐ नीलजङ्घायै नमः 

ॐ ब्रह्मविष्णुशिवान्मिकायै नमः॥ १०८ ॥


॥ इति श्री सरस्वति अष्टोत्तरशत नामावलिः ॥


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "माँ सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम नामावली लिरिक्स (Sarasvati Ashtottara Shatnam Namavali Lyrics in Hindi) - Ashtottar Shatnam - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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