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गणपति गणेश को मेरा प्रणाम है लिरिक्स (Ganapati Ganesh Ko Mera Pranam Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Upasana Mehta - Bhaktilok

166 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश भक्ति: मेरी भगवान से प्रार्थना

गणेश जी की आराधना में समर्पित यह भजन, भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम है।

गणपति गणेश को मेरा प्रणाम है लिरिक्स (Ganapati Ganesh Ko Mera Pranam Lyrics in Hindi) -  गणपति गणेश को उमा पति महेश कोमेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है जीअनजानी के पूत को राम जी के दूत कोमेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है जीकृष्ण कन्हैया को दाऊ जी के भैया कोमेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है जीमाँ शेरा वाली को खंडे खप्पर वाली कोमेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है जीराम  जिनका नाम हैअयोध्या जिनका धाम हैऐसे धनुर्धारी को हमारा प्रणाम हैहमारा प्रणाम हैकृष्णा जिनका नाम हैमथुरा जिनका धाम हैऐसे मुरली बैजैया को हमारा प्रणाम हैहमारा प्रणाम हैशिव शंकर जिनका नाम हैकैलाश जिनका धाम हैऐसे डमरू  बैजैया कोहमारा प्रणाम हैहमारा प्रणाम हैविष्णु जिनका नाम हैक्षीर सागर जिनका धाम हैऐसे चक्र धारी को हमारा प्रणाम हैहमारा प्रणाम हैकाली जिनका नाम हैकलकत्ता जिनका धाम हैऐसी खप्पर वाली को हमारा प्रणाम हैहमारा प्रणाम है ||*** Singer - Upasana Mehta ***Also Read Shri Ganesh Bhajan:गणपति प्रणाम (Ganpati Pranam Lyrics in Hindi) - Nikunj Prem Ganesh bhajan जय श्री गणेश बोलो मेरे बप्पा आये (Bappa Hain Aaye Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Suren Namdev दया थोड़ी सी करदो ना (Daya Thodi Si Kardo Na Lyrics in Hindi) - Ganesha Bhajan Nisha Dwivedi 

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'गणपति गणेश' को प्रणाम करते हुए भक्‍त अपनी श्रद्धा को अर्पित करते हैं। 'उमा पति महेश' का उल्लेख करते हैं, जो भगवान शिव का रूप हैं। यह भाव स्पष्ट करता है कि गणेश जी, जिन्हें बुद्धि, समृद्धि और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है, न केवल अपने आप में महान हैं बल्कि उनके साथ शिव और शक्ति का भी साक्षात्कार होता है। भजन में कृष्ण कन्हैया और राम जी का भी उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय पौराणिक कथाओं में सभी देवताओं का एक गहरा संबंध है। यह एक संकेत है कि विभिन्न देवी-देवताओं की आराधना में एकता है और भक्‍त उन्हें एक ही रूप में देखता है।

भजन की पंक्तियाँ भक्‍त की भावनाओं को व्यक्त करती हैं, जैसे कि 'माँ शेरा वाली को खंडे खप्पर वाली को मेरा प्रणाम है'। यह पंक्ति देवी दुर्गा के प्रति श्रद्धा दर्शाती है, जो नकारात्मकता को समाप्त करने वाली शक्तिशाली मां हैं। इस भावार्थ के माध्यम से भक्त अपने जीवन की मुश्किलों और बाधाओं को दूर करने के लिए देवी एवं देवताओं की कृपा की याचना करते हैं। यह भजन एक गहन सुख और सुरक्षा का संदेश देता है, जहां भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं कि प्रसन्न होकर देवता उनकी जीवन यात्रा को संजीवनी प्रदान करें।

इस भजन में मुख्य रूप से भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का दर्शन है। भक्तिमार्ग वह रास्ता है जहाँ भक्त अपने इष्ट देवता के प्रति अर्पण और समर्पण के भाव से जुड़ता है। भक्ति स्वयं में केवल आराधना नहीं, बल्कि यह एक जीवन जीने की कला है। भजन की शुरुआत गणेश जी के प्रति प्रणाम से होती है, जो यह दर्शाता है कि हर कार्य की सफलता के लिए पहले उनका आशीर्वाद आवश्यक हैं। सामूहिक आराधना से प्रेम और एकता की भावना को भी मजबूती मिलती है, जिससे समाज में असहिष्‍णुता और नकारात्मकता को दूर करने में मदद मिलती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की आराधना का संदर्भ सभी पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। 'गणेश' का नाम लेने मात्र से सभी पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है, जो सभी बाधाओं का निवारण करते हैं। इस भजन में 'राम' और 'कृष्ण' का नाम भी लिया गया है, जो दर्शाता है कि ये सभी देवता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार पर गणेश वंदना की विशेष महत्व है, जो पूजा-पाठ को बढ़ावा देती है और भक्तों के जीवन में समर्पण और आस्था का संचार करती है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश जी की आराधना से भक्तों को मानसिक स्थिरता, शांति और असीमित ऊर्जा प्राप्त होती है। निरंतर उनके भक्ति गीतों का उच्चारण करने से भ्रम और चिंताओं से मुक्ति मिलती है। यह न केवल आध्यात्मिक उत्थान के लिए सहायक है, बल्कि दैनिक जीवन में सकारात्मकता लाने में भी मदद करता है। ध्यान और साधना में वृद्धि के कारण व्यक्तित्व में निखार आता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश जी की आराधना का सर्वोत्तम समय प्रात:काल और संध्या है। भक्तों को एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर दीपक जलाना चाहिए और मिष्ठान्न का भोग अर्पित करना चाहिए। सच्चे मन से भजन का गायन करते समय ध्यान केंद्रित करें और मन में गणेश जी की छवि को आवाहन करें। एकाग्रता और श्रद्धा के साथ भक्ति करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का प्रेरणास्त्रोत क्या है?

इस भजन का प्रेरणास्त्रोत गणेश जी की आराधना है, जो सभी बाधाओं को दूर करने और बुद्धि एवं समृद्धि के देवता माने जाते हैं।

क्या यह भजन केवल गणेश जी के लिए है?

हालांकि यह भजन गणेश जी के लिए हैं, इसमें अन्य देवताओं जैसे राम और कृष्ण का भी सम्मान किया गया है, यह दिखाता है कि सभी देवी-देवताओं की एकता का संदेश है।

इस भजन को गाने का कौन सा उचित समय है?

गणेश जी की आराधना करने का सर्वोत्तम समय प्रात: और संध्या है। इस समय भक्त अपने मन को शुद्ध रखने और ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयुक्त होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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