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SARASWATI BHAJAN

श्री सरस्वती स्तुती (Shri Saraswati Stuti Lyrics) - Saraswati Mata Stuti - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री सरस्वती स्तुती: ज्ञान-वैभव का भव्य स्तोत्र

सरस्वती देवी की स्तुति से ज्ञान, बुद्धि और शिक्षा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 श्री सरस्वती स्तुती (Shri Saraswati Stuti Lyrics) - या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृताया वीणावरदण्डमन्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।या ब्रह्माच्युत-शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजितासा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥ १॥दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिमयीमक्षमालां दधानाहस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण ।भासा कुन्देन्दु-शंखस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमानासा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥ २॥आशासु राशी भवदंगवल्लिभासैव दासीकृत-दुग्धसिन्धुम् ।मन्दस्मितैर्निन्दित-शारदेन्दुंवन्देऽरविन्दासन-सुन्दरि त्वाम् ॥ ३॥शारदा शारदाम्बोजवदना वदनाम्बुजे ।सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात् ॥ ४॥सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृ-देवताम् ।देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जनाः ॥ ५॥पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्नः सरस्वती ।प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ॥ ६॥शुद्धां ब्रह्मविचारसारपरमा-माद्यां जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।हस्ते स्पाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितांवन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥ ७॥वीणाधरे विपुलमंगलदानशीलेभक्तार्तिनाशिनि विरिंचिहरीशवन्द्ये ।कीर्तिप्रदेऽखिलमनोरथदे महार्हेविद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम् ॥ ८॥श्वेताब्जपूर्ण-विमलासन-संस्थिते हेश्वेताम्बरावृतमनोहरमंजुगात्रे ।उद्यन्मनोज्ञ-सितपंकजमंजुलास्येविद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम् ॥ ९॥मातस्त्वदीय-पदपंकज-भक्तियुक्ताये त्वां भजन्ति निखिलानपरान्विहाय ।ते निर्जरत्वमिह यान्ति कलेवरेणभूवह्नि-वायु-गगनाम्बु-विनिर्मितेन ॥ १०॥मोहान्धकार-भरिते हृदये मदीयेमातः सदैव कुरु वासमुदारभावे ।स्वीयाखिलावयव-निर्मलसुप्रभाभिःशीघ्रं विनाशय मनोगतमन्धकारम् ॥ ११॥ब्रह्मा जगत् सृजति पालयतीन्दिरेशःशम्भुर्विनाशयति देवि तव प्रभावैः ।न स्यात्कृपा यदि तव प्रकटप्रभावेन स्युः कथंचिदपि ते निजकार्यदक्षाः ॥ १२॥लक्ष्मिर्मेधा धरा पुष्टिर्गौरी तृष्टिः प्रभा धृतिः ।एताभिः पाहि तनुभिरष्टभिर्मां सरस्वती ॥ १३॥सरसवत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमःवेद-वेदान्त-वेदांग- विद्यास्थानेभ्य एव च ॥ १४॥सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने ।विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तु ते ॥ १५॥यदक्षर-पदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ॥ १६॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री सरस्वती स्तुती एक अत्यंत दिव्य और प्रेरणादायक स्तोत्र है जो देवी सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान, विज्ञान, कला, और प्राप्ति की देवी मानी जाती हैं। इस स्तुति में देवी का वर्णन किया गया है जैसे कि "या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला" यानी कि वे आभा में कांतिमान और सफेद वस्त्रधारण करती हैं। उनका स्वरूप दैवीय है, और उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव जैसे प्रमुख देवताओं द्वारा हमेशा पूजा जाता है। यह स्तोत्र यह प्रार्थना करता है कि देवी सरस्वती सभी जड़ता और अज्ञानता का नाश करें। दृष्टान्त के स्वरूप में "संपूर्ण ज्ञान का मार्ग प्रदर्शित करने वाली" देवी की उपमा दी जाती है। यदि हमें ज्ञान और बुद्धि की आवश्यकता है, तो इस स्तुति का पाठ हमारे हृदय में श्रद्धा और भक्ति को बढ़ाता है।

इस स्तुति में भक्त की भावनाएँ स्पष्ट हैं, विशेष रूप से जब वह देवी सरस्वती से उनके प्रेम और कृपा की प्रार्थना करता है। "आशासु राशी भवदंगवल्लिभासैव" में भक्त उनके दिव्य स्वरूप की प्रशंसा करता है। यह संदेश देता है कि ज्ञान की प्राप्ति और कला में साधक का हृदय सच्चे प्रेम और समर्पण से भरा होना चाहिए। भक्त कहता है, "शारदा शारदाम्बोजवदना वदनाम्बुजे" यहाँ पर दर्शित है कि देवी सरस्वती का चेहरा जैसे कमल के फूल की भाँति मनमोहक है, और उनकी कृपा के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं। यह स्तुति न केवल ज्ञान के लिए, बल्कि मानसिक शांति हेतु भी होती है, जिससे भक्त का हृदय भक्ति में लीन हो जाता है।

यह स्तोत्र भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसमें देवी सरस्वती की महिमा का वर्णन किया गया है और यह भक्तों को यह सिखाता है कि ज्ञान का मार्ग केवल सच्चे प्रेम और श्रद्धा से ही प्राप्त किया जा सकता है। "सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृ-देवताम्" में यह दर्शाया गया है कि वाणी की देवी सर्वदा हमारी बुध्दि को सृजित और संपूर्ण करती हैं। यहाँ पर यह भी दर्शाया गया है कि ज्ञान वर्धन के लिए उनकी कृपा महत्वपूर्ण है। इस स्तुति में योग और समर्पण का एक विशिष्ट तत्व है जो दर्शाता है कि सच्चा ज्ञान केवल ईश्वर की भक्ति में पाया जा सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री सरस्वती स्तुती का भारतीय पौराणिक कथा में विशेष स्थान है, खासकर उपनिषद और पुराणों में ज्ञान की देवी के रूप में उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। देवी सरस्वती को विद्या, बुद्धि, संगीत और कलाओं की देवी माना जाता है। महाभारत में भी उनका उल्लेख है, जहाँ उन्हें विद्या और संस्कारों की देवी के रूप में पूजा जाता है। भगवती सरस्वती की कृपा से शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि होती है, इसलिए उन्हें सभी विद्याओं का अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इस स्तुति में वर्णित

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। श्री सरस्वती स्तुती का पाठ करने से मानसिक स्पष्टता, ज्ञान में वृद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है। यह स्तोत्र उच्च विचार, शांति और समर्पण की भावना को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों की ओर ध्यान केंद्रित कर सकता है। नियमित रूप से इसे सुनने या गाने से सुख और शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ सुबह के समय, सूर्योदय के पश्चात करना सर्वोत्तम होता है। पूजा के समय एक दीया जलाना, आमतौर पर सफेद पुष्प अर्पित करना और उचित ध्यान करना चाहिए। भक्त को ध्यान में देवी सरस्वती की छवि और उनके गुणों का ध्यान करना चाहिए और पूर्ण मनोयोग से स्तुति का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री सरस्वती स्तुती का महत्व क्या है?

यह स्तुति देवी सरस्वती की महिमा का गान करती है, जो ज्ञान, कला और विद्या की देवी हैं। इसे पढ़ने से विद्यार्थियों को ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।

इस स्तुति को कौन-कौन से समय पर पढ़ना चाहिए?

इस स्तुति का पाठ सुबह सूर्योदय के समय, या शनिवार और मंगलवार की सुबह विशेष लाभ प्रदान करता है। इसे नियमित रूप से करना लाभकारी होता है।

क्या स्तुति का पाठ केवल अध्ययन करने वाले लोग ही करें?

नहीं, यह स्तुति सभी के लिए है, जो ज्ञान, परिश्रम और कृपा की कामना करते हैं। यह सभी जीवन के क्षेत्रों में सफलता प्रदान कर सकती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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