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श्याम चंदा है श्यामा चकोरी बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी भजन लिरिक्स (Shyam Chanda Hai Shyama Chakori Lyrics in Hindi) - New Shyam Bhajan

श्याम चंदा है श्यामा चकोरी भजन लिरिक्स पढ़ें। श्री राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और समर्पण पर आधारित इस सुंदर भजन के बोल हिंदी में देखें।

"श्याम चंदा है श्यामा चकोरी" यह भजन श्री राधा-कृष्ण के उस अलौकिक प्रेम का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के सौंदर्य और उनके परस्पर प्रेम में स्वयं को विलीन कर लेता है। भारतीय भक्ति परंपरा में 'चंदा' और 'चकोरी' का रूपक अत्यंत प्राचीन है, जहाँ चंद्रमा (कृष्ण) के बिना चकोरी (राधा/श्यामा) का अस्तित्व अधूरा माना गया है। यह भजन न केवल एक मधुर धुन है, बल्कि यह प्रेम, समर्पण और एकाग्रता का एक आध्यात्मिक मार्ग भी है। जब भक्त इस भजन का गायन करते हैं, तो वे ब्रज की उस दिव्य लीला का अनुभव करते हैं जहाँ 'श्याम' और 'श्यामा' की जोड़ी समस्त संसार के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और सावन के झूलनोत्सव जैसे अवसरों पर भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करने के लिए गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्याम चंदा है श्यामा चकोरी,
बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी।
श्याम चंदा है श्यामा चकोरी,
बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी॥

एक दूजे के मन को ये भाते,
प्रेम की गंगा ये बरसाते।
इनकी लीला है सबसे निराली,
इनकी महिमा है सबसे बड़ी॥
बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी॥

श्याम की बंसी जब-जब बजती,
श्यामा की पायल तब-तब छनकी।
रास रचाते हैं कुंज गलिन में,
प्रेम की मस्ती में दुनिया है खोई॥
बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी॥

भक्तों के मन को ये हर लेते,
जीवन में खुशहाली भर देते।
इनके चरणों में शीश झुकाओ,
इनकी कृपा से बिगड़ी बनेगी बिगड़ी॥
बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। 'श्याम चंदा' का अर्थ है श्री कृष्ण, जो अपनी शीतल और सुखद आभा से भक्तों के हृदय रूपी आकाश को प्रकाशित करते हैं। 'श्यामा चकोरी' का अर्थ है श्री राधा रानी, जो निरंतर अपने प्रियतम कृष्ण की ओर निहारती रहती हैं। जिस प्रकार चकोरी पक्षी चंद्रमा को एकटक देखता है, उसी प्रकार राधा का प्रेम कृष्ण के प्रति अनन्य है। 'बड़ी सुन्दर है दोनों की जोड़ी' पंक्ति यह दर्शाती है कि यह युगल स्वरूप ही सृष्टि का आधार है। जब हम इस भजन को गाते हैं, तो हम यह प्रार्थना करते हैं कि जिस प्रकार राधा-कृष्ण का प्रेम अटूट है, उसी प्रकार हमारा प्रेम और भक्ति भी हमारे आराध्य के प्रति अटूट बनी रहे। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में यदि प्रेम का आधार ईश्वर है, तो वह बंधन नहीं, बल्कि मुक्ति का मार्ग है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन 'युगल उपासना' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें कृष्ण के माधुर्य और राधा के प्रेम भाव का सुंदर समन्वय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • युगल प्रेम का प्रतीक: यह भजन राधा-कृष्ण की एकता को समर्पित है।
  • सरल और सुगम भाषा: इसकी शब्दावली अत्यंत सरल है, जिससे कोई भी भक्त इसे आसानी से गा सकता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण से मन में व्याप्त अशांति दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • भक्ति का मार्ग: यह भजन साधक को 'सख्य' और 'माधुर्य' भाव की भक्ति की ओर ले जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु विशेष रूप से:

  • संध्या आरती: शाम के समय जब दीपक जलाया जाता है, तब इसका गायन अत्यंत सुखद होता है।
  • सत्संग: कीर्तन मंडलियों में इसे सामूहिक रूप से गाना अधिक आनंददायक होता है।
  • एकांत साधना: ध्यान के समय इसे धीमी आवाज में सुनने से मन एकाग्र होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
श्याम श्री कृष्ण सांवले रंग के ईश्वर
श्यामा श्री राधा रानी कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति
चकोरी एक पक्षी जो चंद्रमा को एकटक निहारता है
कुंज वन या उपवन जहाँ कृष्ण लीला करते हैं

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्याम चंदा है श्यामा चकोरी
आराध्य श्री राधा-कृष्ण
विषय युगल प्रेम और भक्ति
भाषा हिंदी/ब्रज मिश्रित
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, राधाष्टमी, नित्य पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

जी हाँ, इस भजन को घर पर पूजा के समय या कीर्तन के रूप में कभी भी गाया जा सकता है।

'श्याम चंदा है श्यामा चकोरी' का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

यह कृष्ण और राधा के बीच के अटूट प्रेम और उनके एक-दूसरे के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

क्या इस भजन के लिए किसी विशेष वाद्य यंत्र की आवश्यकता है?

नहीं, इसे आप बिना किसी वाद्य यंत्र के या केवल हारमोनियम और ढोलक के साथ भी गा सकते हैं।

राधा-कृष्ण की भक्ति क्यों करनी चाहिए?

राधा-कृष्ण की भक्ति प्रेम, करुणा और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।

क्या यह भजन बच्चों को सिखाया जा सकता है?

हाँ, इसकी सरल भाषा के कारण यह बच्चों को भक्ति मार्ग से जोड़ने के लिए उत्तम है।

क्या इस भजन का कोई विशेष लाभ है?

इस भजन को गाने से मन को शांति मिलती है और भक्ति भाव में वृद्धि होती है।

क्या इसे जन्माष्टमी पर गा सकते हैं?

निश्चित रूप से, यह जन्माष्टमी के उत्सव के लिए एक बहुत ही लोकप्रिय भजन है।

अन्य संबंधित भजन कौन से हैं?

आप राधे राधे जप ले और अच्युतम केशवम जैसे भजनों का भी आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, ब्रज के लोक भजनों और वैष्णव परंपराओं के आधार पर संकलित की गई है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 18 Oct 2026

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