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बंधन श्याम से लिरिक्स भजन ( Bandhan Shyam Se Lyrics in Hindi ) - Shyam Bhajan Nisha Dwivedi - Bhaktilok

53 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम के बंधन: भक्ति का अद्भुत संगम

यह भजन आपके ह्रदय में श्री श्याम की भक्ति को जागृत कर, जीवन में सुख और शांति लाने के लिए प्रेरित करता है।

बंधन श्याम से लिरिक्स भजन ( Bandhan Shyam Se Lyrics in Hindi ) -वो आया था वो आएगा कान्हा से पुराना बंधन है दुःख हर्ता है सुख कर्ता है हाथों से सजाता जीवन है खामोशी को लाचारी को एक पल में ये समझता है महसूस इसको हो जाता जब भक्त का आंसू टपकता है इनको जितना समझो काम है हाथों से सजता जीवन है दुःख हर्ता है सुख कर्ता है हाथों से सजाता जीवन है नरसी जी का मीरा जी का कर्मा का मान बढ़ाया है खुद बिक के इसने भक्तों काहर दम क़र्ज़ चुकाया है ये ही मेरा जीवन धन है हाथों से सजाता जीवन है दुःख हर्ता है सुख कर्ता है हाथों से सजाता जीवन है दीवानो का दीवाना है माया का इसको ना चाव है प्रेमी है ये उस प्रेमी का रखता जो प्रेम का भाव है कहता मोहित इनसे हम हैं हाथों से सजाता जीवन है दुःख हर्ता है सुख कर्ता है हाथों से सजाता जीवन है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में श्याम या भगवान श्री कृष्ण के अद्भुत बंधन की महत्ता को व्यक्त किया गया है। पहले पद में कहा गया है कि 'वो आया था वो आएगा', जो यह दर्शाता है कि भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य हमेशा भक्तों के साथ रहता है। 'दुःख हर्ता है सुख कर्ता है' इस पंक्ति का अर्थ है कि श्री कृष्ण हमारे दुखों को दूर कर सुख प्रदान करते हैं। भजन में यह भी बताया गया है कि भक्त का आंसू जब गिरता है तो श्री कृष्ण उसे महसूस करते हैं, और यह उनकी दिव्य संवेदनशीलता का प्रमाण है। यहाँ भक्त की भावना और भगवान की करुणा का एक गहरा संयोग है।

इसके अलावा, 'नरसी जी का मीरा जी का कर्मा का मान बढ़ाया है' इस पंक्ति में भक्तों का प्रेम और बलिदान भी रेखांकित किया गया है। मीरा बाई जैसे भक्तों ने जिनकी भक्ति अद्वितीय थी, ने श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को सर्वोच्च मानते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया। 'खुद बिक के इसने भक्तों काह नरम चुकाया है' यहाँ 'खुद बिकना' का अर्थ है कि श्री कृष्ण स्वयं को भक्तों के लिए समर्पित कर देते हैं। यह संकल्प भगवान के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

भजन की अंतिम पंक्तियों में 'माया का इसको ना चाव है' बताता है कि भगवान श्री कृष्णmaterialism को नहीं मानते, बल्कि प्रेम और भक्ति की महत्ता को सर्वोपरि मानते हैं। ऐसे भक्त जो सच्चे हैं, वे 'प्रेम का भाव' रखते हैं। भक्ति मार्ग में यही प्रेम और समर्पण मुख्य स्रोत हैं, जो भक्त को भगवान के निकट ले जाते हैं। इस भजन के माध्यम से हम सबको यह प्रेरणा मिलती है कि हमें भगवान के प्रति अपनी भक्ति को और अधिक गहरा करना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन श्री कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम का एक अद्भुत उदाहरण है। पुराणों में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है, जिसमें उन्होंने कभी भक्तों के कष्ट दूर करते हुए, तो कभी उन्हें प्रेम सिखाते हुए अपने प्रति अपार करुणा प्रकट की। देवी भागवत, श्रीमद्भागवत गीता, और महाभारत में श्री कृष्ण का व्यक्तित्व भक्तों के प्रति उनकी अनंत प्रेम भक्ति को दर्शाता है। यह भजन इस परंपरा को सम्मानित करता है, और भक्तों को कष्टों से मुक्ति की दिशा में अग्रसर करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मन, शरीर और आत्मा को शांति और सुकून प्रदान करता है। मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने के लिए यह भजन एक उच्च माध्यम है। इसे प्रतिदिन गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आंतरिक बल और संतुलन में वृद्धि होती है। यह भक्ति का मार्ग अपनाकर व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि लाने का माध्यम बनता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के वक्त करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जब मन एकदम ताजा हो। पूजा करते समय एक दीया जलाना और भगवान की तस्वीर के सामने बैठकर गंगाजल या जल का छिड़काव करें। मन को एकाग्र करने के लिए सीधा बैठकर ध्यान लगाएँ और भगवान श्याम से प्रार्थना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कब गाया जाना चाहिए?

यह भजन सुबह के समय गाया जाना चाहिए, जब मन शांति में हो, ताकि भक्ति और ध्यान की गहराई में पहुँचा जा सके।

भजन के प्रमुख तत्व क्या हैं?

इस भजन में भगवान श्री कृष्ण की करुणा, भक्तों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और भक्ति का अनमोल संदेश उजागर किया गया है।

इस भजन से हमें क्या सीख मिलती है?

इस भजन से हमें सिखाने वाला महत्व यह है कि सच्चे प्रेम और समर्पण से ही हम भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं और अपने दुखों से उबर सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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