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Matarani Bhajan

आया बुलावा माँ शेरावाली (Aaya Bulava Maa Sherawali Lyrics in Hindi) - Kumar Sanu Mata Bhajan - Bhaktilok

124 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ शेरावाली का भक्तिपूर्ण invocation

इस भक्ति गीत के माध्यम से माँ शेरावाली की कृपा का आह्वान करें।

आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ। मैंने माँ को पुकारा, माँ ने आकर कहा। करूँगी मैं तेरा भला, मुझे जो भी भाएगा। आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ। बंदगी करूँगा मैं, तेरे थामे हाथ। जग सारा मुझको दे, में लूँ तेरा नाम। आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ। माँ का जब आता हूँ, तो मैं पाता हूँ सुकून। हर लहर में तेरा नाम, हर सांस में तेरा गुण। आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ। काज सजाई माँ तेरे, सुखों से भरे घर। संसार से दूर रखा, माँ करे हर विपत्ति से। आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ। हर मन में जो बसे, वह कृष्ण है सबका। माँ के चरणों में जाकें, मैं दौड़ा चला जाऊं। आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं। माँ शेरावाली, मैं तेरा भक्त हूँ।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल主题 माँ शेरावाली के प्रति श्रद्धा और आस्था का अद्भुत प्रदर्शन है। 'आया बुलावा माँ शेरावाली, तेरा दरस पाई मैं' इससे भक्त की आकांक्षा सामने आती है—भक्त को अपनी देवी के दर्शन की सदा कामना रहती है। माँ शेरावाली, जिन्हें दुर्गा या काली के रूप में भी पूजा जाता है, शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। भजन में प्रतिवर्ती भाव से भक्त कहता है कि मैं तेरा भक्त हूँ, जो यह संकेत देता है कि भक्त का अपने इष्ट के प्रति समर्पण भाव बहुत गहरा है। यहाँ यह भी दर्शाया गया है कि माँ तो सदैव अपने भक्तों का भला करती हैं, और इस संबंध को दृढ़िता से दर्शाने के लिए भक्ति की अनिवार्यता को प्रस्तुत किया गया है।

इस भजन में वर्णित भावार्थ की गहराई को समझते हुए हम देख सकते हैं कि यह न केवल भक्ति का, बल्कि तल्लीनता का भी प्रतीक है। 'माँ का जब आता हूँ, तो मैं पाता हूँ सुकून' इस पंक्ति में भक्त की आंतरिक शांति की तलाश दिखाई देती है। यह संकेत करता है कि माँ के पास जाना एक मानसिक शांति और प्रेरणा का स्रोत है। भक्त का हर लम्हा माँ के नाम से गुजरा हुआ लगता है, जो कि उनके समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। माँ के प्रति इतनी निष्ठा भक्त की जीवन में अनेक कठिनाइयों को पार करने का साहस भी प्रदान करती है। माँ का सानिध्य पाने के लिए इस भजन में करने का उद्देश्य उनकी कृपा को प्राप्त करना है।

इस भजन के माध्यम से भक्तिभाव का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। भक्त का यह संवाद 'बंदगी करूँगा मैं, तेरे थामे हाथ' यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग अत्यधिक सहज है। यहाँ भक्त ने अपने इष्ट को आदिम ऊर्जा की स्थिति में रखा है। यह मार्ग भक्ति का है, जो साधक को बचाव करता है और जीवन में सही दिशा प्रदान करता है। शास्त्रों में वर्णित है कि सच्चे भक्त को किसी भी संकट का सामना करने की ताकत मिलती है, क्योंकि माँ की कृपा कभी भी उनके से दूर नहीं होती। इस तरह भक्ति अभिव्यक्ति प्रकृति को दर्शाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ शेरावाली, जिसे दुर्गा या काली के रूप में जानते हैं, भारतीय पौराणिक कथाओं में एक प्रमुख स्थान रखती हैं। देवी दुर्गा का शक्तिशाली रूप राक्षसों के संहार का प्रतीक है, और ये भक्तों की रक्षा करने वाली भी हैं। पुराणों में वर्णित कई कथाओं में माँ दुर्गा ने दैत्यों से धरती को बचाया। इस भजन का महत्व इस बात में है कि यह भक्तों को उनके कठिन समय में माँ के प्रति निष्ठा बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। महाभारत और रामायण में भी देवी की पूजा और आराधना का उल्लेख है, जो इस भजन को एक प्राचीन आधार पर स्थापित करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, एकाग्रता, और आंतरिक ताकत में वृद्धि होती है। भक्तों को माँ की कृपा से शारीरिक और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। यह भजन आपसी संबंधों में सुधार, तनाव को दूर करने और जीवन में सकारात्मकता लाने में सहायता करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या बेला में करना सबसे उत्तम होता है। पूजा स्थान पर शुद्धता बनाए रखने के लिए एक दीया जलाना और माँ को फूलों और मीठे भोग का अर्पण करना चाहिए। भक्त को ध्यान केंद्रित करते हुए सही मुद्रा में बैठकर इस भजन का उच्चारण करना चाहिए। एकाग्रता के साथ भक्ति भाव से प्रार्थना करते हुए इसे गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ माँ शेरावाली से जुड़ने और उनके प्रताप का आह्वान करना है। इसमें भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति को प्रगट करते हैं।

कौन हैं माँ शेरावाली?

माँ शेरावलि देवी दुर्गा का एक रूप हैं, जिन्हें शक्ति, साहस और समर्पण की देवी माना जाता है। भक्तों की रक्षक और संकटमोचन के रूप में उनकी पूजा की जाती है।

भजन का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और ईश्वर के प्रति निष्ठा में वृद्धि होती है। यह भक्त को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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