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भक्ति रस काव्य व भजन

श्याम प्रभु का घर है ये श्याम ही इसके मालिक है भजन इन हिंदी लिरिक्स

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्याम प्रभु का घर है ये श्याम ही इसके मालिक है, हम तो निर्भय रहते हैं श्याम हमारा रक्षक है। श्याम चरण में ही बैठा है अपना ये परिवार, कृपा बरसाए रहे, खाटू से चलकर आज मेरे घर आये लखदातार। कृपा बरसाए रहे, आज सराहूं किस्मत को श्याम धणी घर आये हैं, मेरे घर के आँगन में ये दरबार लगाए हैं। कितना प्यारा रूप हैं इनका सुन्दर है श्रृंगार, कृपा बरसाए रहे, खाटू से चलकर। प्रेमी जन का जमघट है भाव भरा सबके दिल में, श्याम प्रभु के दीवाने झूम रहे सब मस्ती में। जगमग जगमग ज्योत जल रही हो रही जय जयकार, कृपा बरसाए रहे, खाटू से चलकर। जो भी ज़रूरत होती है श्याम ही पूरी करते हैं, नई नई सौगातों से सबकी झोली भरते हैं। बिन्नू सारे जग में इनकी महिमा अपरम्पार, कृपा बरसाए रहे, खाटू से चलकर।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन श्याम प्रभु की सर्वव्यापकता और उनके घर में रक्षक के रूप में उपस्थिति को दर्शाता है। 'श्याम प्रभु का घर है ये, श्याम ही इसके मालिक है' - यह पंक्ति परमात्मा की सर्वोच्च सत्ता को प्रकट करती है, जहाँ वह केवल धन का मालिक नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं। 'हम तो निर्भय रहते हैं श्याम हमारा रक्षक है' - यह कथन भक्त की मानसिक सुरक्षा और आश्वस्ति को व्यक्त करता है। भजन में खाटू धाम का उल्लेख श्याम की पवित्र भूमि के रूप में किया गया है, जहाँ से उन्होंने भक्त के घर आकर अपना दरबार लगाया है। इस भजन का मूल संदेश यह है कि जब श्याम प्रभु किसी के घर में आते हैं, तब उस घर में सभी भय, चिंता और दुःख दूर हो जाते हैं। परिवार श्याम के चरणों में समर्पित होकर सर्वोच्च कल्याण प्राप्त करता है।

इस भजन का भावार्थ प्रेम, समर्पण और भक्ति के गहन संदेश को समेटे हुए है। 'मेरे घर के आँगन में ये दरबार लगाए हैं' - यह पंक्ति भक्त के हृदय में परमात्मा की उपस्थिति को दर्शाती है, जहाँ साधारण जीवन एक दिव्य राज्य में परिवर्तित हो जाता है। 'कितना प्यारा रूप हैं इनका सुन्दर है श्रृंगार' - यहाँ भक्त की श्याम के सौन्दर्य से मुग्धता का वर्णन है, जो भक्ति के गीत में काव्यात्मक सौंदर्य लाता है। 'प्रेमी जन का जमघट है' - यह कहता है कि जहाँ श्याम होते हैं, वहाँ केवल प्रेमी भक्त ही नहीं, बल्कि सभी आत्माएँ परस्पर प्रेम के सूत्र में बँधी होती हैं। 'जगमग जगमग ज्योत जल रही' - यह ज्योतिस्वरूप परमात्मा की दिव्य ज्योति का प्रतीक है, जो अंधकार को दूर करके सत्य का प्रकाश फैलाती है। यह सब कुछ कृपा की वर्षा के बिना संभव नहीं है।

इस भजन का दार्शनिक सार अद्वैत और भक्ति के समन्वय में निहित है। श्याम को 'मालिक', 'रक्षक' और 'प्रदाता' के रूप में स्वीकार करना यह दर्शाता है कि परमात्मा ही जगत का एकमात्र नियन्ता है। 'जो भी ज़रूरत होती है श्याम ही पूरी करते हैं' - यह वेदांत की शिक्षा को प्रतिबिंबित करता है कि परमात्मा ही सभी की इच्छापूर्ण करने वाला है। भक्ति मार्ग में यह विश्वास ही मुक्ति का द्वार है। 'नई नई सौगातों से सबकी झोली भरते हैं' - यह दर्शाता है कि परमात्मा की कृपा निरंतर बहती रहती है और वह प्रत्येक भक्त को उसकी आवश्यकता और योग्यता के अनुसार देता है। 'इनकी महिमा अपरम्पार' - यह घोषणा करता है कि श्याम की महिमा सीमाहीन है। यह भजन भक्ति-निरत जीवन को परमात्मा के साथ एकीकृत होने का मार्ग दिखाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन श्याम (कृष्ण) के गोकुल और खाटू धाम से संबंधित है, जहाँ भक्ति परंपरा अत्यंत समृद्ध है। खाटू धाम राजस्थान में स्थित है और वहाँ बाबा श्याम (भीष्म पितामह का अवतार माने जाते हैं) की पूजा की जाती है। पुराणों में श्याम को ब्रह्मांड का परमात्मा कहा गया है, जो सभी जीवों की रक्षा करते हैं। भागवत पुराण में कृष्ण की महिमा का विस्तृत वर्णन है, जहाँ वह गोपियों और भक्तों को अनंत कृपा प्रदान करते हैं। रामायण और महाभारत में भी भक्ति की महत्ता को दर्शाया गया है। उपनिषदों में परमात्मा को 'सत्यं ज्ञानं अनंतं ब्रह्म' कहा गया है, जो इस भजन के श्याम की परिभाषा से मेल खाता है। यह भजन भक्ति परंपरा का सजीव उदाहरण है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गान मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। भक्ति के भावों से युक्त इस गान से हृदय में दिव्य प्रेम जाग्रत होता है और भय, चिंता व नकारात्मकता समाप्त होती है। श्याम की कृपा का ध्यान करते समय मस्तिष्क शांत होता है, तनाव कम होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। पारिवारिक सुख और सामंजस्य में वृद्धि होती है। मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गान प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सर्वोत्तम है, जब मन शांत हो। स्नान के बाद पवित्र स्थान पर बैठकर दीप प्रज्ज्वलित करें और फूलों की पंखुड़ियाँ चढ़ाएँ। आसन सुखासन या पद्मासन में हो। हृदय को श्याम की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करते हुए, भाव समर्पण के साथ गान करें। सायंकाल भी इसे गाया जा सकता है। आरती के समय विशेष फलप्रद है। प्रतिदिन कम से कम तीन बार गान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्याम प्रभु का घर है ये भजन किस देवता को समर्पित है और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई?

यह भजन श्याम (कृष्ण) को समर्पित है, जो खाटू धाम से संबंधित हैं। खाटू राजस्थान में स्थित है, जहाँ बाबा श्याम की भक्ति परंपरा प्राचीन है। इस भजन की रचना भक्ति भावना से भरे संतों द्वारा की गई है। यह भजन श्याम की सर्वव्यापकता और कृपा को दर्शाता है।

इस भजन में 'खाटू से चलकर आये लखदातार' का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति दर्शाती है कि श्याम खाटू धाम से प्रकट होकर भक्त के घर आते हैं। 'लखदातार' का अर्थ है कि श्याम लाखों प्रकार की सौगातें और कृपा लेकर आते हैं। यह भक्त की कामना को पूरा करने के लिए दिव्य यात्रा है।

इस भजन को गाते समय किस भाव को मुख्य रूप से ध्यान में रखना चाहिए?

इस भजन को गाते समय समर्पण, प्रेम और विश्वास का भाव रखना चाहिए। श्याम को घर का मालिक और रक्षक मानते हुए, सर्वोच्च शक्ति में निरंतर विश्वास रखना चाहिए। कृपा की याचना करते हुए हृदय को खाली और ग्राह्य बनाना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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