🙏 सुनो चेलों करलो तैयारी रे – वा बाछल याद करे
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(Suno Chelon Karlo Taiyari Re Va Bachal Yaad Kare Lyrics In Hindi) – Mukesh Sharma Ji Devotional Song 2026 | Chala Bagar Desh
📝 गीत विवरण
📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
सुनो चेलों करलो तैयारी रे,
एक दुखिया आस म म्हारी रे,
चाला बागड़ देश,
वा बाछल याद करे॥
॥ अंतरा १ ॥
अरे ठाल्यो चिमटा हाथा में,
कुछ धरया नही स बाता में,
धरो कांदे कम्बल खेस,
वा बाछल याद करे॥
॥ अंतरा २ ॥
जो हरी न लिखदी रेख मे,
वा मिलना चहाव भेष मे,
कर धुणे आदेश,
वा बाछल याद करे॥
॥ अंतरा ३ ॥
मेरे तन न भेदन लागी,
मिलने की इच्छा जागी,
मे खोदयु सारे क्लेश,
वा बाछल याद करे॥
॥ अंतरा ४ ॥
शुशीला रात जगादे गी,
नारायण न बुलाले गी,
गुण गाव खास मुकेश,
वा बाछल याद करे॥
सुनो चेलों करलो तैयारी रे,
एक दुखिया आस म म्हारी रे,
चाला बागड़ देश,
वा बाछल याद करे॥
✍️ गीतकार :- मुकेश शर्मा जी (Mukesh Sharma Ji)
🙏 गीत का अर्थ और संदेश
यह लोक भक्ति गीत "सुनो चेलों करलो तैयारी रे वा बाछल याद करे" मुकेश शर्मा जी द्वारा रचित है। यह गीत बागड़ देश (राजस्थान-गुजरात सीमा क्षेत्र) से जुड़ी एक लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ "बाछल" (बाबा रामदेव जी या किसी संत-महात्मा) अपने चेलों (शिष्यों) को याद कर रहे हैं और उन्हें बुला रहे हैं।
"सुनो चेलों करलो तैयारी रे, एक दुखिया आस म म्हारी रे" – गीतकार कहते हैं कि हे चेलों, सुनो और तैयारी कर लो। एक दुखिया (भक्त) की यही आस है। चलो बागड़ देश चलें, क्योंकि वा बाछल (वह बाछल - संत/महात्मा) याद कर रहे हैं।
"अरे ठाल्यो चिमटा हाथा में, कुछ धरया नही स बाता में" – अरे, हाथ में चिमटा रख दिया (संन्यास/त्याग का प्रतीक), लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा। कंधे पर कम्बल और खेस (रजाई/चादर) रख लो, और चलो बागड़ देश, क्योंकि वा बाछल याद कर रहे हैं।
"जो हरी न लिखदी रेख मे, वा मिलना चहाव भेष मे" – अगर प्रभु (हरि) ने मेरी किस्मत में नहीं लिखा था, तो भी वे किसी भेष (रूप) में मिलना चाहते हैं। धुणे (यज्ञ/तपस्या) का आदेश करते हुए, वा बाछल याद कर रहे हैं।
"मेरे तन न भेदन लागी, मिलने की इच्छा जागी" – मेरे शरीर में भेद (पीड़ा) लग गई, मिलने की इच्छा जाग गई। मैंने सारे क्लेश (दुख) खोद दिए (समाप्त कर दिए), क्योंकि वा बाछल याद कर रहे हैं।
"शुशीला रात जगादे गी, नारायण न बुलाले गी" – सुशीला (शायद कोई स्त्री या भक्त) रात भर जगती रही, लेकिन नारायण ने नहीं बुलाया। गुण गाओ, खास मुकेश (गीतकार) के अनुसार, वा बाछल याद कर रहे हैं।
🔍 इस गीत का विशेष महत्त्व
"बाछल" कौन हैं?: "बाछल" शब्द राजस्थानी और गुजराती लोक परंपरा में प्रचलित है। यह प्रायः बाबा रामदेव जी या किसी महान संत के लिए प्रयुक्त होता है। रामदेव जी के अनुयायी उन्हें "बाछल" कहकर पुकारते हैं। यह गीत संभवतः रामदेव जी के भक्तों के लिए है।
बागड़ देश: बागड़ देश राजस्थान और गुजरात की सीमा पर स्थित एक क्षेत्र है। यह क्षेत्र बाबा रामदेव जी की कर्मभूमि माना जाता है। रामदेव जी के मुख्य मंदिर रामदेवरा (राजस्थान) और अन्य स्थान इसी क्षेत्र में आते हैं।
चिमटा, कम्बल, खेस का प्रतीक: ये साधु-संन्यासियों के प्रतीक हैं। चिमटा भक्ति संगीत में, कम्बल और खेस संन्यासी के जीवन के प्रतीक हैं। यहाँ चेलों को इन्हें धारण करने का आदेश दिया जा रहा है।
"हरी न लिखदी रेख": यह पंक्ति भक्त की नियति (भाग्य) की बात करती है। अगर प्रभु ने भी किस्मत में मिलन नहीं लिखा था, तो भी वे किसी न किसी रूप में मिलना चाहते हैं। यह भक्त के विश्वास को दर्शाता है।
"मुकेश" – गीतकार का नाम: गीतकार मुकेश शर्मा जी ने "खास मुकेश" कहकर अपने नाम का उल्लेख किया है और कहा है कि वा बाछल याद कर रहे हैं। यह गीत को व्यक्तिगत स्पर्श देता है।
💖 बाछल के बुलावे की पुकार
🎯 संदेश
इस गीत का मूल संदेश यह है कि जब सच्चा संत या महात्मा (बाछल) अपने चेलों को याद करता है, तो उन्हें तुरंत उनके पास जाने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। बागड़ देश वह पवित्र स्थान है जहाँ वह बाछल निवास करते हैं। चेलों को चिमटा, कम्बल, खेस धारण करके उनके पास जाना है। यह गीत हर उस भक्त के दिल की आवाज़ है जो अपने गुरु या आराध्य के बुलावे पर दौड़ा चला जाता है।
✨ लोक परंपरा की झलक
सुनो चेलों करलो तैयारी रे वा बाछल याद करे केवल एक गीत नहीं, बल्कि राजस्थान-गुजरात की लोक परंपरा की एक जीवंत झलक है। यह गीत हमें बताता है कि कैसे लोक भक्ति में गुरु-शिष्य का रिश्ता, बुलावे की पुकार, और यात्रा की तैयारी का वर्णन होता है। यह गीत हर उस भक्त के लिए प्रेरणा है जो अपने आराध्य के दर्शनों को तरसता है।
🙏 ॐ श्री रामदेव जी की जय || वा बाछल याद करे || चाला बागड़ देश 🙏
गीतकार: मुकेश शर्मा जी | Lyricist: Mukesh Sharma Ji
॥ गुण गाव खास मुकेश, वा बाछल याद करे ॥
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