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राधारमणं हरे हरे – कृष्ण भक्ति भजन (Radha Ramanam Hare Hare) | Radha Krishna Bhajan

244 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🕉️ राधारमणं हरे हरे – कृष्ण भक्ति भजन

(Radha Ramanam Hare Hare) – Radha Krishna Bhajan

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम् ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन, भक्ति गीत
📍 स्थान: ब्रज, वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ प्रार्थना ॥

वाणी गुणानुकथने श्रवणौ कथायां
हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्नः
स्मृत्यां शिरस्तवनिवास जगत्प्रणामे
दृष्टिः सतां दर्शनेऽस्तु भवत्तनूनाम्

अर्थ: हमारी वाणी तुम्हारे गुणों का वर्णन करे, कान तुम्हारी कथाएँ सुनें, हाथ तुम्हारे कार्यों में लगे रहें, मन तुम्हारे चरणों में लीन रहे, सिर तुम्हें प्रणाम करता रहे और दृष्टि सज्जनों के दर्शन करती रहे।

॥ स्थायी ॥

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा १ ॥

केसर तिलकं कृष्ण वरणम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा २ ॥

राजत वन मालं रूप रसालम्
राधारमणं हरे हरे
राजत वन मालं रूप रसालम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा ३ ॥

वेणु कृत नादम् आनंद अपारम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा ४ ॥

सुन्दर मुदु हासम् हरत विषादम्
राधारमणं हरे हरे
सुन्दर मुदु हासम् हरत विषादम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

गोरज मुख लसितम् भक्त चित वसितम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा ५ ॥

राधाउर हारम् रास रसालम्
राधारमणं हरे हरे
राधाउर हारम् रास रसालम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

भक्ताधीनम् दीनदयालम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

॥ अंतरा ६ ॥

भक्तवत्सलम् रसिकनरेशम्
राधारमणं हरे हरे
भक्तवत्सलम् रसिकनरेशम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

गो पसु वेशम् दास इन्द्रेशम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्
राधारमणं हरे हरे
राधारमणं हरे हरे

जय जय राधारमण प्यारो राधारमण
जय जय राधारमण प्यारो राधारमण
जय जय राधारमण प्यारो राधारमण
जय जय राधारमण प्यारो राधारमण…

🎵 राधा-कृष्ण भक्ति भजन | राधारमणं हरे हरे

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन राधा के प्रियतम, ब्रज के बालमुकुन्द (कृष्ण) की स्तुति में गाया गया है। "राधारमणं हरे हरे" – राधा के मन को रमाने वाले, प्रियतम कृष्ण को हर-हर पुकार है।

प्रारंभिक श्लोक की भावना है कि हमारी वाणी तुम्हारे गुणों का वर्णन करे, कान तुम्हारी कथाएँ सुनें, हाथ तुम्हारे कार्यों में लगे रहें, मन तुम्हारे चरणों में लीन रहे, सिर तुम्हें प्रणाम करता रहे और दृष्टि सज्जनों के दर्शन करती रहे। यह भक्त का पूर्ण समर्पण है।

"बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम्" – ब्रजवासियों के प्रियतम, बाल रूप में मुकुन्द (कृष्ण) की वंदना।

"केसर तिलकं कृष्ण वरणम्" – केसर का तिलक लगाए, कृष्ण वर्ण (श्याम रंग) वाले।

"राजत वन मालं रूप रसालम्" – सुशोभित वनमाला पहने, रूप में रस भरे हुए।

"वेणु कृत नादम् आनंद अपारम्" – बाँसुरी की ध्वनि से अपार आनंद देने वाले।

"सुन्दर मुदु हासम् हरत विषादम्" – सुन्दर मृदु मुस्कान वाले, सबका विषाद हरने वाले।

"गोरज मुख लसितम् भक्त चित वसितम्" – गोरज (गायों की धूल) से मुख सुशोभित, भक्तों के चित्त में बसे हुए।

"राधाउर हारम् रास रसालम्" – राधा के उर (हृदय) के हार, रास रचाने में रस भरे हुए।

"भक्ताधीनम् दीनदयालम्" – भक्तों के अधीन, दीनों पर दया करने वाले।

"भक्तवत्सलम् रसिकनरेशम्" – भक्तों पर स्नेह रखने वाले, रसिकों के राजा।

"गो पसु वेशम् दास इन्द्रेशम्" – गोपों का वेश धारण करने वाले, दासों के इन्द्र (स्वामी)।

अंत में "जय जय राधारमण प्यारो राधारमण" के जयकारे के साथ भजन समाप्त होता है।

यह भजन कृष्ण के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन करता है – उनका बाल स्वरूप, उनका श्रृंगार, उनकी बाँसुरी, उनकी मुस्कान, और सबसे बढ़कर उनका राधा के प्रति प्रेम और भक्तवात्सल्य।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • राधारमणम्: राधा के रमण (प्रियतम), राधा के पति
  • हरे हरे: भगवान को पुकारने का शब्द, "हे राम" या "हे हरि"
  • बृज जन प्रियतम: ब्रजवासियों के प्रियतम
  • बालमुकुन्दम्: बाल रूप में मुकुन्द (कृष्ण)
  • केसर तिलकम्: केसर का तिलक लगाने वाले
  • कृष्ण वरणम्: श्याम वर्ण वाले
  • राजत वन मालम्: सुशोभित वनमाला धारण करने वाले
  • रूप रसालम्: रूप में रस भरे हुए, अति सुन्दर
  • वेणु कृत नादम्: बाँसुरी से नाद करने वाले
  • मुदु हासम्: मृदु मुस्कान वाले
  • हरत विषादम्: विषाद (दुःख) को हरने वाले
  • गोरज मुख लसितम्: गायों की धूल से मुख सुशोभित
  • भक्त चित वसितम्: भक्तों के चित्त में बसे हुए
  • राधाउर हारम्: राधा के हृदय के हार
  • रास रसालम्: रासलीला में रस भरे हुए
  • भक्ताधीनम्: भक्तों के अधीन
  • दीनदयालम्: दीनों पर दया करने वाले
  • भक्तवत्सलम्: भक्तों पर स्नेह रखने वाले
  • रसिकनरेशम्: रसिकों के राजा
  • गो पसु वेशम्: गोपों का वेश धारण करने वाले
  • दास इन्द्रेशम्: दासों के इन्द्र (स्वामी)

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🕉️ राधा-कृष्ण का अभिन्न संबंध

"राधारमण" का अर्थ है राधा के प्रियतम। यह नाम कृष्ण और राधा के अभिन्न संबंध को दर्शाता है। राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं और कृष्ण के बिना राधा।

🎵 भक्त का समर्पण

प्रारंभिक श्लोक में भक्त की प्रार्थना है कि उसके सभी अंग – वाणी, कान, हाथ, मन, सिर, दृष्टि – सब केवल कृष्ण की भक्ति में लगे रहें। यह पूर्ण समर्पण का भाव है।

🎯 संदेश : राधारमण – वह दिव्य स्वरूप जो राधा के हृदय में बसता है और जिसके रूप, गुण, बाँसुरी, मुस्कान और लीलाएँ सबको अपार आनंद देती हैं। भक्त उनके चरणों में सब कुछ समर्पित कर देता है और बस "जय जय राधारमण" का जाप करता है।

॥ राधारमणं हरे हरे ॥
॥ बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम् ॥

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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