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नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र: जानें माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों की महिमा और पूजन विधि (Navdurga Prayer Stotra: Learn the Glory & Worship Method of the 9 Forms of Maa Durga)

297 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की स्तुति

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री

🌟 नवरात्रि की साधना और नवदुर्गा का महत्व

नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र एक अद्वितीय स्तोत्र है जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री – की वंदना की गई है। नवरात्रि के नौ दिनों में इन्हीं नौ देवियों की पूजा-आराधना की जाती है।

प्रत्येक स्वरूप एक विशेष शक्ति और गुण का प्रतीक है। इनकी साधना से भक्त को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। प्रस्तुत है संपूर्ण नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र, जिसका पाठ नवरात्रि में अथवा किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है।

📿 नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र (पाठ)

ॐ देवी नवदुर्गायै नमः॥

॥ ॐ एहि दुर्गे ! नमस्तुभ्यं, जगदम्बे ! नमो नमः॥

१. शैलपुत्री

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

अर्थ: मैं माँ शैलपुत्री की वंदना करता हूँ, जो सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली हैं। जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्र सुशोभित है, जो वृषभ पर सवार हैं, हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए हैं और जो यशस्विनी हैं।

२. ब्रह्मचारिणी

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

अर्थ: जो अपने हाथों में जपमाला और कमण्डलु धारण करती हैं, वह अनुत्तम देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।

३. चंद्रघंटा

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

अर्थ: जो सिंह पर सवार हैं, जिनका स्वरूप अत्यंत भयंकर है और जो घंटे के आकार के चंद्र को धारण करती हैं, वह माँ चंद्रघंटा मुझ पर कृपा करें।

४. कूष्मांडा

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

अर्थ: जो अपने दोनों हाथों में कलश और रुधिर से परिपूर्ण वस्तु धारण करती हैं, वह माँ कूष्मांडा मुझे कल्याण प्रदान करें।

५. स्कंदमाता

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

अर्थ: जो सिंहासन पर विराजमान हैं, जिनके दोनों हाथ कमल के समान हैं, वह यशस्विनी माँ स्कंदमाता सदा मेरा कल्याण करें।

६. कात्यायनी

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

अर्थ: जिनके हाथ में चन्द्रहास नामक तलवार चमक रही है, जो वरदान स्वरूप सिंह पर सवार हैं, वह दानवघातिनी देवी कात्यायनी मुझे कल्याण प्रदान करें।

७. कालरात्रि

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

अर्थ: माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयंकर है। वे एक चोटी वाली, नग्न (दिगम्बर) और गर्दन पर माला धारण करने वाली हैं। यद्यपि उनका स्वरूप विकराल है, फिर भी वे भक्तों के सभी भय दूर करने वाली हैं।

८. महागौरी

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

अर्थ: जो श्वेत वृषभ पर सवार हैं, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, पवित्र हैं और महादेव को प्रसन्न करने वाली हैं, वह माँ महागौरी मुझे कल्याण प्रदान करें।

९. सिद्धिदात्री

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

अर्थ: जिनकी सिद्ध, गन्धर्व, यक्ष, दानव और देवता सभी सेवा करते हैं, वह सभी सिद्धियाँ देने वाली माँ सिद्धिदात्री सदा हम पर कृपा बनाए रखें।

॥ फलश्रुति ॥

नवदुर्गाः स्तोत्रमिदं पठेद्यः श्रद्धया नरः।
सर्वान् कामानवाप्नोति विद्यां भोगांश्च विन्दति॥

अर्थ: जो भी मनुष्य श्रद्धा के साथ इस नवदुर्गा स्तोत्र का पाठ करता है, वह सभी मनोकामनाओं, विद्या और भोगों को प्राप्त करता है।

📖 नवदुर्गा के नौ स्वरूप: नाम, वाहन और महत्व

क्रम नाम (Name) वाहन (Vehicle) प्रमुख गुण (Key Virtue)
1शैलपुत्री (Shailputri)वृषभ (Bull)मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री, स्थिरता प्रदान करने वाली
2ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini)कमण्डलु, जपमालातपस्या और त्याग की प्रतिमूर्ति
3चंद्रघंटा (Chandraghanta)सिंह (Lion)शौर्य और शांति की देवी, घंटा ध्वनि से दुष्टों का नाश
4कूष्मांडा (Kushmanda)सिंह (Lion)ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली, सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री
5स्कंदमाता (Skandamata)सिंह (Lion)भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता, मातृत्व की देवी
6कात्यायनी (Katyayani)सिंह (Lion)विवाह और वैवाहिक सुख की देवी, महिषासुर का वध करने वाली
7कालरात्रि (Kalaratri)गर्दभ (Donkey)भय का नाश करने वाली, अशुभ ग्रहों के प्रभाव को दूर करने वाली
8महागौरी (Mahagauri)वृषभ (Bull)श्वेत वर्ण, पवित्रता और शांति की देवी
9सिद्धिदात्री (Siddhidatri)कमल (Lotus)अष्ट सिद्धियों की दात्री, सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली

🙌 नवदुर्गा पूजन विधि और स्तोत्र पाठ का समय

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह और शाम को करना चाहिए। पूजन विधि इस प्रकार है:

  • स्नान एवं वस्त्र: प्रतिदिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • संकल्प: पूजा के लिए संकल्प लें कि आप नवदुर्गा की साधना पूर्ण श्रद्धा से कर रहे हैं।
  • घटस्थापना: नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना करें।
  • आवाहन: उस दिन की देवी का आवाहन करें। जैसे प्रथम दिन शैलपुत्री माँ का आवाहन।
  • षोडशोपचार पूजा: आसन, स्वागत, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि से पूजन करें।
  • स्तोत्र पाठ: उस दिन की देवी का ध्यान करते हुए नवदुर्गा स्तोत्र का पाठ करें।
  • आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में दुर्गा आरती करें और पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

✨ नवदुर्गा स्तोत्र के नियमित पाठ के लाभ

  • 🔹 मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि
  • 🔹 रोगों से मुक्ति और आरोग्य की प्राप्ति
  • 🔹 भय, शत्रु और बाधाओं का नाश
  • 🔹 ग्रहों के अशुभ प्रभाव से रक्षा
  • 🔹 धन, यश और कीर्ति की प्राप्ति
  • 🔹 आध्यात्मिक उन्नति और साधना में सफलता
  • 🔹 विवाह में आ रही बाधाओं का समाधान
  • 🔹 सभी मनोकामनाओं की पूर्ति
📌 विशेष: नवरात्रि के अलावा, किसी भी शुभ दिन, संकट के समय या प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करने से माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या नवदुर्गा स्तोत्र का पाठ केवल नवरात्रि में ही करना चाहिए?

उत्तर: नहीं, इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय, विशेषकर मंगलवार, शुक्रवार या अष्टमी, नवमी के दिन किया जा सकता है। नवरात्रि में इसका विशेष महत्व है।

प्रश्न 2: क्या इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता है?

उत्तर: नहीं, यह स्तोत्र सभी के लिए खुला है। इसे शुद्ध मन और श्रद्धा से किसी भी व्यक्ति द्वारा पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 3: क्या मैं इस स्तोत्र का पाठ हिंदी अनुवाद के साथ कर सकता हूँ?

उत्तर: हाँ, आप अनुवाद सहित पाठ कर सकते हैं। इससे अर्थ समझ में आता है और भक्ति भाव अधिक प्रबल होता है।

प्रश्न 4: नवदुर्गा के किस स्वरूप की पूजा किस दिन करनी चाहिए?

उत्तर: प्रथम दिन शैलपुत्री, द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिन चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन कूष्मांडा, पंचम दिन स्कंदमाता, षष्ठी दिन कात्यायनी, सप्तमी दिन कालरात्रि, अष्टमी दिन महागौरी और नवमी दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

📝 नवदुर्गा साधना का सार

नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों के साथ साक्षात्कार का एक माध्यम है। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि कैसे जीवन के विभिन्न संकटों से निपटने के लिए माँ के विभिन्न रूपों की शक्ति का आह्वान किया जाए।

नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा को संचित करने का सर्वोत्तम अवसर है। इस दौरान इस स्तोत्र का नियमित पाठ करके भक्त माँ दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त कर सकता है।

🙏 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

🙏 नवदुर्गा प्रार्थना स्तोत्र
माँ के नौ रूपों की अर्चना
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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