🙏 नारायण मिल जाएगा – प्रेम प्रभु का बरस रहा है
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(Narayan Mil Jayega – Prema Prabhu Ka Baras Raha Hai) – Krishna Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
प्रेम प्रभु का, बरस रहा है, पी ले, अमृत प्यासे,
सातों तीर्थ, तेरे अंदर, बाहर, किसे तलाशे ॥
कण, कण में हरि, क्षण, क्षण में हरि,
मुस्कानों में, अंसुवन में हरि ।
मन की आंखें, तूने खोली, तो ही, दर्शन पाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥
॥ अंतरा १ ॥
नियति भेद, नहीं करती जो, लेती है, वो देती है,
जो बोएगा, वो काटेगा ये, जग कर्मों की, खेती है ।
यदि, कर्म तेरे, पावन हैं सभी,
डूबेगी नहीं, तेरी नाव कभी ।
तेरी बाँह, पकड़ने को वो, भेस बदलकर आएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥
॥ अंतरा २ ॥
नेकी व्यर्थ, नहीं जाती हरि, लेखा जोखा रखते हैं,
औरों को, फूल दिए जिसने, उसके भी, हाथ महकते हैं ॥
कोई, दीप मिले, तो बाती बन,
तूँ भी तो, किसी का, साथी बन ।
मन को मान, सरोवर करले, तो ही मोती पाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥
॥ अंतरा ३ ॥
कान लगाके, बातें सुन ले, सूखे हुए, दरख्तों की,
लेता है, भगवान परीक्षा, सबसे, प्यारे भक्तों की ।
एक प्रश्न है, गहरा जिसकी, हरि को, थाह लगानी है,
तेरी श्रद्धा, सोना है या, बस सोने का, पानी है ।
जो फूल धरे, हर डाली पर,
विश्वास तो रख, उस माली पर ।
तेरे भाग में, पत्थर है तो, पत्थर भी, खिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा,
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥
प्रेम प्रभु का, बरस रहा है, पी ले, अमृत प्यासे,
सातों तीर्थ, तेरे अंदर, बाहर, किसे तलाशे ॥
कण, कण में हरि, क्षण, क्षण में हरि...
पता नहीं, किस रूप में आ कर,
नारायण, मिल जाएगा ॥
॥ कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि ॥
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन आध्यात्मिक जागृति और ईश्वर की व्यापकता का सुंदर चित्रण है। "प्रेम प्रभु का, बरस रहा है, पी ले, अमृत प्यासे" – भगवान का प्रेम अमृत की तरह बरस रहा है, बस पीने की जरूरत है। सातों तीर्थ बाहर नहीं, तुम्हारे भीतर ही हैं।
"कण-कण में हरि, क्षण-क्षण में हरि" – ईश्वर हर कण में, हर पल में, मुस्कान में, आंसुओं में व्याप्त है। जब मन की आंखें खुलती हैं, तभी सच्चे दर्शन होते हैं। नारायण किसी भी रूप में आ सकते हैं – यह अज्ञात रूप में ईश्वर के मिलने का विश्वास है।
दूसरे अंतरे में कर्म सिद्धांत समझाया गया है: जगत कर्मों की खेती है, जो बोओगे वही काटोगे। पवित्र कर्मों वाली नाव कभी नहीं डूबती। नारायण स्वयं भेस बदलकर तुम्हारी बांह पकड़ने आएंगे।
तीसरे अंतरे में परोपकार का संदेश है: दूसरों को फूल देने वाले के हाथ महकते हैं। किसी के दीपक की बाती बनो, किसी के साथी बनो। मन को सरोवर बनाओ तो मोती मिलेंगे।
चौथे अंतरे में श्रद्धा की परीक्षा का वर्णन है। भगवान अपने प्यारे भक्तों की परीक्षा लेते हैं। तुम्हारी श्रद्धा सच्चा सोना है या नकली? विश्वास रखो उस माली पर, जो हर डाली पर फूल धरता है। तुम्हारे भाग्य में पत्थर भी है तो वह भी खिल जाएगा।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
अंतर्यामी का भाव: यह भजन सिखाता है कि ईश्वर बाहर नहीं, हमारे भीतर ही बसे हैं। सातों तीर्थ हमारे भीतर हैं। मन की आंखें खोलने से ही सच्चे दर्शन होते हैं।
कर्म सिद्धांत का संदेश: "जो बोएगा वो काटेगा" – यह सनातन सत्य है। पवित्र कर्मों वाले की नाव कभी नहीं डूबती। नारायण स्वयं उसे बचाने आते हैं।
नेकी का फल: "औरों को फूल दिए जिसने, उसके भी हाथ महकते हैं" – परोपकार का यह सुंदर रूपक बताता है कि दूसरों की भलाई करने से स्वयं को भी पुण्य मिलता है।
श्रद्धा की परीक्षा: भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं। असली श्रद्धा पत्थर को भी खिला सकती है। विश्वास रखो, नारायण अवश्य मिलेंगे।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
ईश्वर का प्रेम सदा बरस रहा है। बस पीने की प्यास चाहिए। कण-कण में व्याप्त नारायण किसी भी रूप में आ सकते हैं। सच्चे मन से खोजो, अवश्य मिलेंगे।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान हर जगह हैं – कण-कण में, क्षण-क्षण में। जरूरत है तो बस मन की आंखें खोलने की। श्रद्धा और विश्वास से सब कुछ संभव है।
🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। कण-कण में व्यापक नारायण ।।
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