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भक्ति रस काव्य व भजन

मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे (Mohan Murli Waleya Dupatta Mera Rang De) – Krishna Bhajan 2026

148 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 मोहन मुरली वाल्या दुपट्टा मेरा रंग दे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Mohan Murli Waleya Dupatta Mera Rang De) – Krishna Bhajan 2026

श्याम रंग रंग दे ❤️

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारंपरिक / भक्ति लोक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / श्याम भजन
📍 भाव: प्रेम, समर्पण, रंग में रंग जाने की प्रार्थना

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ धुन ॥

धुन- आजा पौणाहारिया करने दर्शन तेरे

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ।
ओ सोहने कुण्डलं वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा १ ॥

जिस रंग में तेरा, मुकुट रंगा है ।
मुकट रंगा है तेरे, माथे पे सजा है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा २ ॥

जिस रंग में, तेरी माला रंगी है ।
माला रंगी है तेरे, गल में सजी है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा ३ ॥

जिस रंग में तेरा, पीताम्बर सजा है ।
पीताम्बर सजा है तेरे, अंग मै सजा है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा ४ ॥

जिस रंग में तेरी, कंबली रंगी है ।
कंबली रंगी है तेरे, मोंढे ते सजी है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा ५ ॥

जिस रंग में तेरी, राधा रंगी है ।
राधा रंगी है तेरे, संग में सजी है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

॥ अंतरा ६ ॥

जिस रंग में तेरे, भक्त रंगे है ।
भक्त, रंगे है तेरे, दिल में बसे है ॥

ओ दुपट्टा, मेरा रंग दे... श्याम रंग रंग दे ।
ओ श्याम, रंग रंग दे... इहिओ तैथों मंगदे ॥

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा...

मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ।
ओ सोहने कुण्डलं वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ॥

✍️ रचना : पारंपरिक (लोक भजन)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक गोपी या भक्त की मार्मिक प्रार्थना है जो कृष्ण से अपने दुपट्टे को उनके श्याम रंग में रंग देने की याचना करती है। "मोहन मुरली वाल्या" – मोहक मुरली बजाने वाले कृष्ण से विनती है कि मेरा दुपट्टा उसी रंग में रंग दो जिस रंग में तुम्हारा मुकुट, माला, पीताम्बर, कम्बली और यहाँ तक कि राधा भी रंगी हुई हैं।

हर अंतरे में भक्त उस दिव्य रंग (श्याम रंग) को पाने की लालसा व्यक्त करता है। यह रंग सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। "इहिओ तैथों मंगदे" – यही वरदान हम तुमसे माँगते हैं।

अंतिम अंतरे में भक्त कहता है कि जिस रंग में तुम्हारे भक्त रंगे हैं, उसी रंग में मुझे भी रंग दो। यह सिद्ध करता है कि सच्चा भक्त वही है जो प्रभु के रंग में पूरी तरह रंग जाता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

श्याम रंग का महत्व: कृष्ण का श्याम रंग प्रेम, करुणा और दिव्यता का प्रतीक है। भक्त उसी रंग में रंगना चाहता है – यानी कृष्णमय हो जाना चाहता है।

प्रत्येक अंतरे में नए अंगों का वर्णन: मुकुट, माला, पीताम्बर, कम्बली – कृष्ण के हर आभूषण और वस्त्र के माध्यम से भक्त उनके स्वरूप का ध्यान करता है और उसी दिव्यता को आत्मसात करना चाहता है।

राधा का उल्लेख: "जिस रंग में तेरी राधा रंगी है" – यह पंक्ति बताती है कि राधा भी उसी श्याम रंग में रंगी हुई हैं। यानी प्रेम की पराकाष्ठा – राधा और कृष्ण एक ही रंग में रंगे हैं।

भक्तों का स्थान: भक्त उसी रंग में रंगे हैं और कृष्ण के दिल में बसे हैं। यह भक्ति का सर्वोच्च स्थान है – प्रभु के हृदय में वास।

💖 प्रेम का श्याम रंग

🎯 संदेश

सच्ची भक्ति का अर्थ है प्रभु के रंग में रंग जाना। जब हम कृष्ण के प्रेम में रंग जाते हैं, तो हमारा अहंकार, हमारी पृथकता समाप्त हो जाती है और हम उनके स्वरूप में विलीन हो जाते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन सिखाता है कि प्रभु से याचना करनी चाहिए – उनके गुणों, उनके रंग, उनके प्रेम को पाने की। दुपट्टा रंगने की प्रार्थना वस्त्र रंगने नहीं, बल्कि हृदय रंगने की प्रार्थना है।

🙏 श्याम रंग रंग दे ।। इहिओ तैथों मंगदे ।।

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ मोहन मुरली वाल्या, दुपट्टा मेरा रंग दे ।।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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