Mahakal Sawari Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

महाकाल (Mahakal (har Har Mahadev)

बी प्राक द्वारा गाया गया महाकाल Har Har Mahadev शिव भजन सुनें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित गीत के बोल, अर्थ और महत्व जानें Bhaktilok पर।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🕉️ महाकाल – B Praak, Jaani

(Mahakal) – Har Har Mahadev | Shiv Bhajan

महाकाल महाकाल है प्यारे, तेरी मेरी ढाल है प्यारे ॥

🎬 गीत विवरण

🎤 गायक: बी प्राक (B Praak)
✍️ गीतकार/संगीतकार: जानी (Jaani)
🎶 संगीत निर्माण: बनी, मीर देसाई
🏷️ श्रेणी: शिव भजन, भक्ति गीत
🕉️ देवता: भगवान शिव (महाकाल)
🎵 गीत: महाकाल (Har Har Mahadev)

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

शम्भू...
शम्भू...

भगवन सब कमाल हैं प्यारे
तेरी मेरी ढाल है प्यारे
भगवन सब कमाल हैं प्यारे
तेरी मेरी ढाल है प्यारे
ये बात पर याद रखियो
महाकाल महाकाल है प्यारे
तेरी मेरी ढाल है प्यारे

शम्भू...

भगवन सब कमाल हैं प्यारे
तेरी मेरी ढाल है प्यारे
भगवन सब कमाल हैं प्यारे
तेरी मेरी ढाल है प्यारे
ये बात पर याद रखियो
महाकाल महाकाल है प्यारे

॥ अंतरा १ ॥

शंकरा करुणाकरा
शंकरा करुणाकरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा

शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शम्भू...

॥ अंतरा २ ॥

शिव ही अग्नि शिव ही पानी सखिये री
बिना शिव के ये न धरती बचती है
जब नहीं था कोई तब शिव ही थे
शिव ही मृत्यु, शिव ही आदिशक्ति है

धरती की लय ताल है प्यारे
पैरों में कंकाल है प्यारे
धरती की लय ताल है प्यारे
पैरों में कंकाल है प्यारे
ये बात पर याद रखियो
महाकाल महाकाल है प्यारे

शंकरा करुणाकरा
शंकरा करुणाकरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा

शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव

॥ अंतरा ३ ॥

शिव की पूजा करियो रे
मृत्यु से ना डरियो रे
शिव का जो वरदान मिले
ब्रह्मा विष्णु श्याम मिले

कितना संसार बनाया है
ये धरती शिव की माया है
जिसने शिव को पाया है
पवन पुत्र हनुमान मिले

अंबर और पाताल है प्यारे
भस्म लगायी खाल है प्यारे
ये बात पर याद रखियो
महाकाल महाकाल है प्यारे

शंकरा करुणाकरा
शंकरा करुणाकरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा
जगदीश्वरा परमेश्वरा
शम्भू...

शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव शिव
शम्भू...

🎵 गायक: बी प्राक | गीत/संगीत: जानी | संगीत निर्माण: बनी, मीर देसाई

🕉️ गीत का अर्थ और संदेश

यह गीत भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की स्तुति में गाया गया है। "महाकाल महाकाल है प्यारे, तेरी मेरी ढाल है प्यारे" – हे प्यारे, महाकाल (शिव) ही तुम्हारी और मेरी रक्षा करने वाली ढाल हैं।

"शंकरा करुणाकरा, जगदीश्वरा परमेश्वरा" – शंकर, जो करुणा के सागर हैं, जगत के स्वामी और परमेश्वर हैं।

"शिव ही अग्नि, शिव ही पानी सखिये री" – हे सखी, शिव ही अग्नि हैं, शिव ही जल हैं। शिव के बिना यह धरती नहीं बचती। जब कोई नहीं था, तब शिव ही थे। शिव ही मृत्यु हैं और शिव ही आदिशक्ति हैं।

"धरती की लय ताल है प्यारे, पैरों में कंकाल है प्यारे" – पृथ्वी की लय और ताल शिव हैं, और उनके पैरों में कंकाल (रुद्राक्ष, भस्म) है।

"शिव की पूजा करियो रे, मृत्यु से ना डरियो रे" – शिव की पूजा करो, मृत्यु से मत डरो। शिव का वरदान मिले तो ब्रह्मा, विष्णु और श्याम (कृष्ण) भी मिल जाते हैं।

"जिसने शिव को पाया है, पवन पुत्र हनुमान मिले" – जिसने शिव को पा लिया, उसे हनुमान जी (पवन पुत्र) भी मिल जाते हैं।

गीत का सार यह है कि महाकाल शिव ही समस्त सृष्टि के आधार हैं। वे अग्नि-जल, मृत्यु-शक्ति, सब कुछ हैं। उनकी शरण में जाने से मृत्यु का भय नहीं रहता और सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

📖 महाकाल: शिव का काल-स्वरूप

महाकाल शिव का वह स्वरूप है जो समय (काल) के भी स्वामी हैं। वे मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले हैं, इसलिए उन्हें मृत्युंजय भी कहा जाता है।

गीत में उल्लिखित "पैरों में कंकाल" और "भस्म लगायी खाल" शिव के रौद्र एवं वैराग्य स्वरूप के प्रतीक हैं। वे संसार की अस्थिरता का बोध कराते हैं।

जानी के लिखे इस गीत में शिव की सर्वव्यापकता और उनके भक्तों को मिलने वाले वरदानों का अद्भुत चित्रण है। बी प्राक की आवाज़ और बनी-मीर देसाई के संगीत ने इस गीत को भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया है।

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

🛡️ महाकाल – सबकी ढाल

गीत में शिव को "तेरी मेरी ढाल" कहा गया है। इसका अर्थ है कि वे हर किसी की रक्षा करने वाले कवच हैं। भय और संकट के समय महाकाल की शरण सबसे बड़ा सहारा है।

🕉️ शिव ही सब कुछ

"शिव ही अग्नि, शिव ही पानी" – शिव सभी पंचतत्वों में व्याप्त हैं। यह अद्वैत भावना को दर्शाता है कि समस्त सृष्टि शिवमय है।

🎯 संदेश : महाकाल शिव ही सृष्टि के मूल कारण हैं। उनकी भक्ति करने से मृत्यु का भय नहीं रहता, और उनका वरदान पाकर ब्रह्मा-विष्णु-श्याम और हनुमान सभी की कृपा मिलती है। वे हमारी ढाल हैं, हमारे रक्षक हैं। इसलिए हमें निडर होकर उनकी शरण में जाना चाहिए।

॥ महाकाल महाकाल है प्यारे ॥
॥ तेरी मेरी ढाल है प्यारे ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "महाकाल – B Praak, Jaani | Mahakal Lyrics in Hindi (Har Har Mahadev)" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Mahakal Sawari Bhajan

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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