आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Rang Panchami

मध्य प्रदेश में रंग पंचमी: इंदौर और उज्जैन की रंगीन गैर और जुलूस परंपरा (Rang Panchami in Madhya Pradesh: The Colorful Ger and Procession Tradition of Indore and Ujjain)

439 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🎨 मध्य प्रदेश में रंग पंचमी

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

इंदौर की गैर और उज्जैन की महाकाल शोभायात्रा

रंगों का राजसी उत्सव : 75 वर्षों की परंपरा

🏵️ मध्य प्रदेश : रंग पंचमी की धार्मिक नगरी

मध्य प्रदेश में रंग पंचमी का पर्व विशेष धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है । प्रदेश के विभिन्न शहरों, विशेष रूप से राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन की सड़कों पर भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जहां लोग एक-दूसरे पर गुलाल डालते हैं और नृत्य करते हैं ।

यह उत्सव होली के पाँच दिन बाद मनाया जाता है और बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेते हैं । इंदौर में इसे "रंग पंचमी गेर" के नाम से जाना जाता है, जबकि उज्जैन में महाकाल मंदिर से विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है । आइए विस्तार से जानते हैं इन दोनों शहरों की अनूठी परंपराओं के बारे में।

🎭 इंदौर की गैर (Ger) : 75 वर्षों की परंपरा

इंदौर में रंग पंचमी के अवसर पर निकलने वाली "गैर" शोभायात्रा 75 वर्षों से भी अधिक पुरानी परंपरा है । यह शहर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बन चुकी है।

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पुराने समय में लोग राजवाड़ा क्षेत्र में बैलगाड़ियों पर सवार होकर निकलते थे और पूरे शहर में घूमते हुए रंग बिखेरते थे । यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता था। समय के साथ यह परंपरा विकसित हुई और अब पानी के टैंकरों और मोटर पंपों के माध्यम से रंग बरसाए जाते हैं ।

📍 मुख्य आयोजन स्थल

इस भव्य जुलूस का केंद्र राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्र होते हैं । यहां भारी संख्या में लोग एकत्र होते हैं और एक-दूसरे पर रंग-गुलाल बरसाते हैं ।

🏛️

राजवाड़ा, इंदौर
गैर का केंद्र बिंदु

🛡️ गैर मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था

इंदौर में रंग पंचमी गैर के लिए विशेष रूप से 3 किलोमीटर लंबा मार्ग निर्धारित किया जाता है । इस मार्ग को 7 सेक्टरों में विभाजित किया जाता है, जहां पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता है ।

🚨 सुरक्षा के विशेष इंतजाम

  • पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं
  • निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाता है
  • वॉच टावर और आपातकालीन निकास मार्ग बनाए जाते हैं
  • सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी भी तैनात रहते हैं

👮 प्रशासन की भागीदारी

इंदौर के पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पारंपरिक आयोजन में भाग लेने वाले सभी लोग सुरक्षित रूप से उत्सव का आनंद ले सकें ।

🎖️ मुख्यमंत्री मोहन यादव की भागीदारी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव रंग पंचमी के अवसर पर इंदौर की गैर परंपरा में नियमित रूप से भाग लेते हैं । उन्होंने प्रदेशवासियों को रंग पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रेम, सद्भाव और उत्साह का प्रतीक है ।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "मैं कामना करता हूं कि रंग पंचमी का यह पावन पर्व आपके जीवन में खुशियों के नए रंग भर दे और सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लाए" .

🕉️ उज्जैन : महाकाल की नगरी में रंग पंचमी

उज्जैन में रंग पंचमी का पर्व महाकाल मंदिर से प्रारंभ होता है । यहां की परंपरा अत्यंत भव्य और दिव्य होती है।

🌅 भस्म आरती में विशेष अर्पण

रंग पंचमी के दिन प्रातःकाल होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया रंग और टेसू के फूलों (पलाश) से बना रंग अर्पित किया जाता है । मंदिर के पुजारी यश शर्मा के अनुसार, बाबा महाकाल के दरबार में रंग पंचमी का पर्व मनाया गया और भस्म आरती के दौरान केसरिया रंग अर्पित किया गया ।

पुजारी ने कहा, "भक्तों के लिए प्रार्थना की गई कि जैसे बाबा महाकाल को रंग चढ़ाया गया, वैसे ही उनके जीवन में भी रंगीन खुशियां भर जाएं और बाबा का आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहे" .

🕉️

महाकाल मंदिर
उज्जैन

🚩 महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर तक शोभायात्रा

उज्जैन में रंग पंचमी के अवसर पर महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है । इस शोभायात्रा में हजारों लोग भाग लेते हैं ।

👥 गणमान्य नागरिकों की भागीदारी

इस आयोजन में उज्जैन नगर निगम के महापौर मुकेश टटवाल, पार्षद और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल होते हैं ।

🎵 उत्सव का माहौल

लोग रंगों में सराबोर होकर संगीत पर नृत्य करते हैं और एक-दूसरे पर गुलाल डालकर खुशी और एकता का संदेश फैलाते हैं ।

🚩 बाबा महाकाल की ध्वज यात्रा और नगर गैर

उज्जैन नगर निगम द्वारा बाबा महाकाल की ध्वज यात्रा और "नगर गैर" का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं ।

🏙️ राजधानी भोपाल में रंग पंचमी

राजधानी भोपाल में भी रंग पंचमी धूमधाम से मनाई जाती है। यहां शोभायात्रा के दौरान टैंकरों की मदद से रंग बरसाए जाते हैं । यह जुलूस शहर के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिसमें इटवारा, गोदा नक्कास और मंगलवाड़ा इलाके शामिल हैं ।

प्रशासन और पुलिस भी उत्सव की भावना को अपनाते हुए कार्यक्रमों के सुचारू संचालन और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं ।

📊 एक नजर : इंदौर और उज्जैन की परंपराएं

विशेषता इंदौर उज्जैन
परंपरा का नाम रंग पंचमी गैर महाकाल शोभायात्रा / नगर गैर
आयु 75 वर्ष से अधिक दशकों पुरानी
मुख्य स्थल राजवाड़ा और आसपास महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर तक
मुख्य आकर्षण टैंकरों से रंग बरसाना, 3 किमी लंबा मार्ग भस्म आरती में केसरिया रंग अर्पण
विशेष उपस्थिति मुख्यमंत्री मोहन यादव महापौर, पार्षद, हजारों श्रद्धालु

❓ मध्य प्रदेश में रंग पंचमी से जुड़े सवाल

प्रश्न : इंदौर की गैर परंपरा कितनी पुरानी है?

उत्तर : इंदौर की रंग पंचमी गैर परंपरा 75 वर्षों से भी अधिक पुरानी है .

प्रश्न : इंदौर में गैर का मार्ग कितना लंबा होता है?

उत्तर : इंदौर में रंग पंचमी गैर के लिए लगभग 3 किलोमीटर लंबा मार्ग निर्धारित किया जाता है, जिसे 7 सेक्टरों में विभाजित किया जाता है .

प्रश्न : उज्जैन में रंग पंचमी कैसे मनाई जाती है?

उत्तर : उज्जैन में रंग पंचमी महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान केसरिया रंग अर्पण के साथ शुरू होती है, फिर महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है .

प्रश्न : क्या मुख्यमंत्री रंग पंचमी समारोह में भाग लेते हैं?

उत्तर : हाँ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव नियमित रूप से इंदौर की गैर परंपरा में भाग लेते हैं और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हैं .

प्रश्न : पुराने समय में इंदौर में गैर कैसे निकाली जाती थी?

उत्तर : पुराने समय में लोग राजवाड़ा क्षेत्र में बैलगाड़ियों पर सवार होकर निकलते थे और पूरे शहर में घूमते हुए रंग बिखेरते थे .

प्रश्न : भोपाल में रंग पंचमी किन इलाकों में मनाई जाती है?

उत्तर : भोपाल में रंग पंचमी के जुलूस इटवारा, गोदा नक्कास और मंगलवाड़ा इलाकों से होकर गुजरते हैं .

🌈 रंगों का राज्य : मध्य प्रदेश की अनूठी परंपरा

मध्य प्रदेश में रंग पंचमी का उत्सव केवल रंग खेलने का पर्व नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। इंदौर की 75 वर्ष पुरानी गैर परंपरा और उज्जैन की महाकाल की नगरी में भस्म आरती के साथ शुरू होने वाला यह उत्सव मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है।

चाहे वह राजवाड़ा में टैंकरों से बरसता रंग हो या महाकाल मंदिर में केसरिया रंग अर्पण की दिव्यता - यह पर्व हमें एकता, प्रेम और उल्लास का संदेश देता है। पुलिस और प्रशासन का सक्रिय सहयोग यह सुनिश्चित करता है कि यह विशाल उत्सव पूरे आनंद और सुरक्षा के साथ संपन्न हो।

🙏 रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।। हर हर महादेव ।।

🎨 मध्य प्रदेश में रंग पंचमी
इंदौर की गैर और उज्जैन की महाकाल शोभायात्रा
श्रेणियां: Rang Panchami

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });