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Jai Brahma Dev Jai Brahma Dev Lyrics (Brahma Aarti) – जय ब्रह्मा देव जय ब्रह्मा देव

205 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 जय ब्रह्मा देव जय ब्रह्मा देव – ब्रह्मा जी की आरती

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Jai Brahma Dev Jai Brahma Dev) – Brahma Aarti 2026

॥ पारंपरिक आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारंपरिक
🏷️ श्रेणी: ब्रह्मा आरती / देव आरती
📍 भाव: सृष्टि, ज्ञान, आराधना

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

जय ब्रह्मा देव, जय ब्रह्मा देव,
चार मुख वाले, सृष्टि के सेव ॥

॥ अंतरा १ ॥

कमंडल धारी, वेदों के ज्ञाता,
सृष्टि रचयिता, जग के विधाता ॥
जय ब्रह्मा देव...॥

॥ अंतरा २ ॥

हंस वाहन पर विराजे प्रभु,
कर में माला, मुख में शुभ ॥
ज्ञान के सागर, दाता महान,
भक्तों के तुम रखवाले भगवान ॥
जय ब्रह्मा देव...॥

॥ अंतरा ३ ॥

कमलासन बैठे ब्रह्मा दाता,
जगत के तुम हो पालनहारा ॥
चारों वेदों का तुम आधार,
तुमसे ही है सारा संसार ॥
जय ब्रह्मा देव...॥

॥ अंतरा ४ ॥

जो कोई तुमको ध्यान लगावे,
सुख-समृद्धि वह जीवन पावे ॥
भवसागर से पार लगाओ,
भक्तों का तुम मान बढ़ाओ ॥
जय ब्रह्मा देव...॥

जय ब्रह्मा देव, जय ब्रह्मा देव,
चार मुख वाले, सृष्टि के सेव ॥

✍️ रचनाकार :- पारंपरिक

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह आरती सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की महिमा का गुणगान करती है। 'जय ब्रह्मा देव' के उद्घोष के साथ भक्त उनकी स्तुति करते हैं। ब्रह्मा जी चार मुख वाले हैं, जो चारों वेदों के ज्ञाता हैं – यह उनके सर्वज्ञ होने का प्रतीक है। कमंडल धारी, हंस वाहन, कमलासन पर विराजमान – ये सभी उनके दिव्य स्वरूप के प्रतीक हैं।

आरती में भक्त प्रार्थना करते हैं कि ब्रह्मा जी उन्हें सुख-समृद्धि दें और भवसागर (सांसारिक दुखों) से पार लगाएँ। 'भक्तों के तुम रखवाले भगवान' – यह भाव दर्शाता है कि ब्रह्मा जी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह आरती ब्रह्मा जी के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का भाव व्यक्त करती है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

सृष्टि के आदि स्रोत: भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है। उनकी आरती का गायन सृष्टि के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

ज्ञान और वेदों का प्रतीक: ब्रह्मा जी चार वेदों के ज्ञाता हैं, इसलिए यह आरती ज्ञान की प्राप्ति और बुद्धि के विकास के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

हंस वाहन और कमलासन: हंस विवेक का प्रतीक है, और कमल आसक्ति से परे होने का। यह आरती हमें विवेक और वैराग्य का मार्ग दिखाती है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

यह आरती हमें सिखाती है कि सृष्टि के रचयिता के प्रति कृतज्ञता और समर्पण से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। ब्रह्मा जी की उपासना से ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो सृष्टि के रहस्यों को जानना चाहते हैं और जीवन में उच्च ज्ञान की प्राप्ति की कामना रखते हैं। ब्रह्मा जी की कृपा से सब संभव है।

🙏 ॐ ब्रह्मणे नमः ।। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा देव की जय ।।

॥ इति ब्रह्मा आरती ॥
॥ ब्रह्मा देव की आरती सब सुख देने वाली ।।
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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