आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Rang Panchami

होली और रंग पंचमी में क्या अंतर है? दोनों त्योहारों की तुलना (Difference Between Holi and Rang Panchami: A Comparison of Both Festivals)

158 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🎭 होली vs रंग पंचमी

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

दोनों त्योहारों की विस्तृत तुलना

एक ही रंग, अलग-अलग रंग-रूप

🤔 क्या होली और रंग पंचमी एक ही हैं?

अक्सर लोग होली और रंग पंचमी को एक ही त्योहार समझ लेते हैं, या फिर उनके बीच के अंतर को लेकर भ्रमित रहते हैं। दोनों त्योहार रंगों से जुड़े हैं, दोनों फाल्गुन मास में आते हैं, और दोनों में अबीर-गुलाल उड़ाया जाता है - फिर आखिर अंतर क्या है?

होली और रंग पंचमी दोनों ही भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्व हैं, लेकिन इनके मनाने का समय, इनकी पौराणिक कथाएं, और इनसे जुड़ी परंपराएं अलग-अलग हैं। आइए इन दोनों त्योहारों की विस्तृत तुलना करें और जानें कि आखिर ये एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं।

📊 एक नजर में अंतर (Comparison Table)

विशेषता होली (Holika Dahan & Dhulendi) रंग पंचमी (Rang Panchami)
तिथि फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) और अगले दिन धुलेंडी फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी (होली के 5 दिन बाद)
समय अंतर पूर्णिमा के आसपास होली के ठीक 5 दिन बाद
मुख्य परंपरा होलिका दहन (बुराई पर अच्छाई की विजय) देवताओं के साथ रंग खेलना (देव होली)
पौराणिक संदर्भ होलिका-प्रह्लाद कथा, भक्त प्रह्लाद की रक्षा राधा-कृष्ण रंगलीला, कामदेव पुनर्जीवन, देवताओं का आगमन
रंग खेलने का तरीका गीले रंग, पिचकारी, गुब्बारे - जोरदार धमाल सूखा गुलाल (अबीर) अधिक प्रचलित, हवा में गुलाल उड़ाने की परंपरा
देवताओं से संबंध होलिका दहन में अग्नि देव की पूजा राधा-कृष्ण, विष्णु, शिव सहित सभी देवताओं का आगमन
प्रमुख क्षेत्र पूरे भारत में मनाई जाती है महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ब्रज क्षेत्र में विशेष
आध्यात्मिक महत्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का दिन, सतोगुण की वृद्धि

📅 तिथि और समय का अंतर

🔥 होली

तिथि : फाल्गुन मास की पूर्णिमा। यह हिंदू कैलेंडर का आखिरी दिन होता है।

होलिका दहन : पूर्णिमा की रात को होलिका दहन होता है।

धुलेंडी : अगले दिन (प्रतिपदा) को धुलेंडी या रंगवाली होली खेली जाती है।

समय : यह दो दिवसीय त्योहार है।

🎨 रंग पंचमी

तिथि : फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी। यह होलिका दहन के ठीक 5 दिन बाद आती है।

समय : होली की धुलेंडी के 4 दिन बाद, यानी होली से 5 दिन का अंतर।

अवधि : एक दिवसीय त्योहार, लेकिन कई क्षेत्रों में यह पांच दिवसीय उत्सव के समापन का दिन होता है।

विशेषता : यह हमेशा पंचमी तिथि को ही मनाया जाता है, जो पांच तत्वों का प्रतीक है।

📌 महत्वपूर्ण अंतर : होली पूर्णिमा पर मनाई जाती है, जब चंद्रमा पूर्ण होता है, जबकि रंग पंचमी कृष्ण पक्ष की पंचमी को, जब चंद्रमा की कला क्षीण हो रही होती है। यह अंतर दोनों त्योहारों की ऊर्जा में भिन्नता लाता है।

📜 पौराणिक कथाओं का अंतर

🔥 होली की कथा

होलिका-प्रह्लाद कथा : होली मुख्य रूप से भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका की कथा से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए होलिका को गोद में लेकर आग में बैठने को कहा। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति के कारण होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

राक्षसी ढुंढा : एक अन्य कथा के अनुसार, राक्षसी ढुंढा को भगवान श्रीकृष्ण ने मारा था और बच्चों ने उसे छेड़ा था।

🎨 रंग पंचमी की कथाएं

राधा-कृष्ण रंगलीला : राधा ने कृष्ण से एकांत में रंग खेलने की इच्छा जताई, तो कृष्ण ने होली के 5 दिन बाद रंग पंचमी पर रंग खेलने का वादा किया।

कामदेव पुनर्जीवन : भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था, और फाल्गुन कृष्ण पंचमी के दिन देवी रति की तपस्या से प्रसन्न होकर कामदेव को पुनर्जीवित किया।

देवताओं का आगमन : रंग पंचमी के दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं और रंग खेलते हैं।

🎨 रंग खेलने के तरीके में अंतर

💧 होली में रंग

  • गीले रंग : होली में गीले रंगों का अधिक प्रयोग होता है। पानी में रंग मिलाकर पिचकारियों और बाल्टियों से डाला जाता है।
  • गुब्बारे : रंगों से भरे गुब्बारे (लोलां) फेंके जाते हैं।
  • पिचकारी : रंगीन पानी डालने के लिए पिचकारी का विशेष प्रयोग होता है।
  • जोरदार धमाल : होली में रंग खेलने का तरीका अधिक उत्साहपूर्ण और जोरदार होता है।
  • कीचड़ : कुछ क्षेत्रों में कीचड़ भी डाला जाता है (जैसे बरसाना की लट्ठमार होली के बाद)।

🌬️ रंग पंचमी में रंग

  • सूखा गुलाल (अबीर) : रंग पंचमी में सूखे गुलाल का अधिक महत्व है, खासकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में।
  • हवा में गुलाल : देवताओं को आकर्षित करने के लिए हवा में गुलाल उड़ाने की परंपरा है।
  • चंदन गुलाल : सुगंधित चंदन और केसर से बना गुलाल प्रयोग किया जाता है।
  • शालीनता : रंग पंचमी पर रंग खेलने का तरीका होली की तुलना में अधिक शालीन और धार्मिक होता है।
  • पानी कम : गीले रंग कम प्रयोग होते हैं, पानी की बचत पर जोर दिया जाता है।

मुख्य अंतर : होली में गीले रंगों और पानी की भरमार होती है, जबकि रंग पंचमी सूखे गुलाल और आध्यात्मिक रंगोत्सव का पर्व है।

🙏 देवताओं से संबंध में अंतर

🔥 होली में देवता

  • अग्नि देव : होलिका दहन में अग्नि देव की मुख्य पूजा होती है।
  • भगवान विष्णु : प्रह्लाद भक्ति के कारण भगवान विष्णु (नृसिंह अवतार) की कथा जुड़ी है।
  • भगवान श्रीकृष्ण : ब्रज की होली कृष्ण से जुड़ी है, लेकिन यह राधा-कृष्ण की रंगलीला से अलग संदर्भ में है।

🎨 रंग पंचमी में देवता

  • सभी देवी-देवता : रंग पंचमी के दिन सभी देवता पृथ्वी पर आते हैं और रंग खेलते हैं।
  • राधा-कृष्ण : राधा-कृष्ण की विशेष रंगलीला का दिन।
  • भगवान शिव : कामदेव पुनर्जीवन के कारण शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • विष्णु-लक्ष्मी : इनकी भी विशेष पूजा होती है।

देव होली की मान्यता : रंग पंचमी को "देव होली" या "देवताओं की होली" कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन देवता स्वयं धरती पर आकर रंग खेलते हैं। होली में ऐसी मान्यता नहीं है।

✨ आध्यात्मिक महत्व में अंतर

🔥 होली का महत्व

  • बुराई पर अच्छाई की विजय : होलिका दहन इसी का प्रतीक है।
  • अहंकार का नाश : हिरण्यकश्यप के अहंकार का नाश।
  • भक्ति की शक्ति : प्रह्लाद की भक्ति ने उनकी रक्षा की।
  • सामाजिक समरसता : होली सभी भेदभाव मिटाकर एकता का संदेश देती है।

🎨 रंग पंचमी का महत्व

  • देवताओं का आशीर्वाद : इस दिन देवता भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
  • पंच तत्वों का संतुलन : पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश - पांचों तत्व सक्रिय होते हैं।
  • सतोगुण की वृद्धि : रज और तम गुणों का नाश, सतोगुण में वृद्धि।
  • कर्मों की शुद्धि : पिछले जन्मों के कर्मों से मुक्ति।

🗺️ क्षेत्रीय अंतर

🔥 होली सर्वत्र

होली पूरे भारत में मनाई जाती है - उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम। हर राज्य में होली की अपनी अलग परंपराएं हैं, लेकिन त्योहार सर्वव्यापी है।

  • उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी मनाई जाती है।

🎨 रंग पंचमी का क्षेत्र

रंग पंचमी मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाई जाती है:

  • महाराष्ट्र : शिमगा उत्सव का समापन, पूरणपोली और सूखा गुलाल।
  • मध्य प्रदेश : इंदौर की गैर, उज्जैन में महाकाल की शोभायात्रा।
  • राजस्थान : मेनार की बारूद होली, ओबरी का फूतरा उत्सव।
  • ब्रज क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) : राधा-कृष्ण की रंगलीला की याद में।
  • छत्तीसगढ़ : पंतोरा की डंगाही होली, पीथमपुर का बाबा कलेश्वरनाथ मेला।

🍬 खान-पान में अंतर

🔥 होली के पकवान

  • गुझिया : उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध पकवान।
  • मठरी / नमकपारा : नमकीन स्नैक्स।
  • दही भल्ले : ठंडे दही के साथ।
  • ठंडाई : भांग मिलाई जा सकती है।
  • मालपुआ : पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में।
  • पापड़-चिप्स : विभिन्न प्रकार के।

🎨 रंग पंचमी के पकवान

  • पूरणपोली : महाराष्ट्र में विशेष, चने की दाल और गुड़ से भरी मीठी रोटी।
  • श्रीखंड : महाराष्ट्रीयन मिठाई।
  • पूरन पोली : मध्य प्रदेश और गुजरात में भी बनती है।
  • मालपुआ : कुछ क्षेत्रों में।
  • ठंडाई : बिना भांग के भी बनाई जाती है।

मुख्य अंतर : होली में गुझिया विशेष है, जबकि रंग पंचमी में महाराष्ट्र की पूरणपोली सबसे प्रमुख है।

🪔 रीति-रिवाजों में अंतर

रीति-रिवाज होली रंग पंचमी
मुख्य रीति होलिका दहन, अग्नि परिक्रमा, गुझिया बांटना देवताओं को गुलाल अर्पण, हवा में गुलाल उड़ाना
व्रत-उपवास कोई व्रत नहीं, बल्कि उत्सव का दिन कुछ लोग व्रत रखते हैं, विशेषकर महिलाएं
स्नान का नियम रंग खेलने के बाद स्नान पूजा से पहले स्नान अनिवार्य, फिर रंग खेलें
देव पूजन होलिका की पूजा, अग्नि की परिक्रमा राधा-कृष्ण, विष्णु-लक्ष्मी, शिव जी की विशेष पूजा
सामाजिक आयाम दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ धमाल पारिवारिक उत्सव, सामुदायिक शोभायात्राएं

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंतर

🔥 होली का विज्ञान

  • होलिका दहन : सर्दी के मौसम में जमे रोगाणुओं को अग्नि की गर्मी से नष्ट करना।
  • फसल चक्र : रबी की फसल कट चुकी होती है, उत्सव का समय।
  • रंग : परंपरागत रूप से प्राकृतिक रंग (टेसू, हल्दी) त्वचा के लिए लाभदायक।

🎨 रंग पंचमी का विज्ञान

  • पंच तत्व सक्रियता : पांच दिनों में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश का संतुलन।
  • चुंबकीय प्रभाव : पंचमी तिथि पर पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र विशेष प्रभाव में होता है।
  • सूखा गुलाल : वायु में उड़ता गुलाल वातावरण को शुद्ध करता है (चंदन, हल्दी के कारण)।

📝 सारांश: मुख्य अंतर एक नजर में

  • 1. तिथि : होली पूर्णिमा पर, रंग पंचमी पंचमी पर (होली के 5 दिन बाद)।
  • 2. अवधि : होली दो दिन (होलिका दहन + धुलेंडी), रंग पंचमी एक दिन।
  • 3. मुख्य कथा : होली - होलिका-प्रह्लाद, रंग पंचमी - राधा-कृष्ण रंगलीला, कामदेव पुनर्जीवन।
  • 4. रंग : होली - गीले रंग, पिचकारी, गुब्बारे; रंग पंचमी - सूखा गुलाल, अबीर।
  • 5. देवता : होली - अग्नि देव, विष्णु; रंग पंचमी - सभी देवता (राधा-कृष्ण विशेष)।
  • 6. विशेष परंपरा : होली - होलिका दहन; रंग पंचमी - हवा में गुलाल उड़ाना, देवताओं का आह्वान।
  • 7. क्षेत्र : होली - पूरे भारत में; रंग पंचमी - मुख्यतः महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ब्रज में।
  • 8. पकवान : होली - गुझिया; रंग पंचमी - पूरणपोली।

❓ होली और रंग पंचमी के बीच अंतर पर सवाल

प्रश्न : क्या होली और रंग पंचमी एक ही हैं?

उत्तर : नहीं, दोनों अलग-अलग त्योहार हैं। होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि रंग पंचमी उसके 5 दिन बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है।

प्रश्न : रंग पंचमी को "देव होली" क्यों कहा जाता है?

उत्तर : क्योंकि मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आकर रंग-गुलाल खेलते हैं। होली में ऐसी मान्यता नहीं है।

प्रश्न : क्या होली और रंग पंचमी दोनों में एक जैसे रंग खेले जाते हैं?

उत्तर : होली में गीले रंग, पिचकारी और गुब्बारों का अधिक प्रयोग होता है, जबकि रंग पंचमी में सूखे गुलाल (अबीर) का विशेष महत्व है।

प्रश्न : क्या रंग पंचमी पूरे भारत में मनाई जाती है?

उत्तर : रंग पंचमी मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से मनाई जाती है, जबकि होली पूरे भारत में मनाई जाती है।

प्रश्न : होली और रंग पंचमी की पौराणिक कथाओं में क्या अंतर है?

उत्तर : होली होलिका-प्रह्लाद की कथा से जुड़ी है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। रंग पंचमी राधा-कृष्ण की रंगलीला, कामदेव के पुनर्जीवन और देवताओं के आगमन की कथाओं से जुड़ी है।

प्रश्न : किस त्योहार में कौन-सा पकवान प्रमुख है?

उत्तर : होली में गुझिया प्रमुख है, जबकि महाराष्ट्र में रंग पंचमी पर पूरणपोली विशेष रूप से बनाई जाती है।

🌈 दोनों त्योहार, दोनों अनमोल

होली और रंग पंचमी - दोनों ही भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, दोनों के अपने-अपने महत्व और परंपराएं हैं। होली उत्साह, धमाल और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, तो रंग पंचमी आध्यात्मिकता, देवताओं का आशीर्वाद और पंच तत्वों के संतुलन का पर्व है।

होली हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है, जबकि रंग पंचमी हमें देवताओं से जुड़ने और उनकी कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। होली में गीले रंगों की भरमार है, तो रंग पंचमी में सूखे गुलाल की महक।

दोनों त्योहार एक-दूसरे के पूरक हैं - होली से शुरू हुआ रंगों का उत्सव रंग पंचमी पर अपने चरम और आध्यात्मिक पूर्णता तक पहुंचता है। इसलिए दोनों को उनकी पूरी रीतियों और परंपराओं के साथ मनाना चाहिए।

🙏 होली और रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।। रंगों के दोनों त्योहार आपके जीवन में खुशियां भर दें ।।

🔥 होली vs 🎨 रंग पंचमी
दोनों त्योहारों की विस्तृत तुलना
श्रेणियां: Rang Panchami

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });