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सखी ठुमक ठुमक कर नाचे मेरो मौर बिहारी - Sakhi Thumak Thumak Kar Nache Mero Maur Bihari Lyrics (Bhajan)

129 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Sakhi Thumak Thumak Kar Nache, Mero Maur Bihari Re) – भजन

तरज़: मेरे उठने बिरह की पीर सखी

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारंपरिक / लोक भजन
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / मौर बिहारी / रास बिहारी
📍 भाव: उत्सव, नृत्य, प्रेम, माधुर्य भक्ति

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे...

॥ अंतरा १ ॥

नन्द गांव को कृष्ण कन्हैया, नटखट नन्द का छोरा
नीलमणि रीतू राज बसंती, रस लपंट रस भोरा
नित नव नव लीला करे, मेरो मौर बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे...

॥ अंतरा २ ॥

निद्धिवन नाचत कुंज बिहारी, मधुबन नाच नचईयाँ
यमुना तट को रास रचईया, मोहन मुरली बजईया
राधे को चितचोर सावरिया, गिरवर धारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे...

॥ अंतरा ३ ॥

सर पर कलगी पंख रंगीले, नैन रसीले रे
छन छन करते पाँव में घुंगरू, होंठ रसीले रे
नन्द गांव से मौरकुटी में आओ, मार उडारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे...

॥ अंतरा ४ ॥

मधुप हरी मधुर रस बरसे, श्याम घटा घनघोर
छम छम नाचे मौर मुखी, जन होई अंत विभोर
प्यारो ठाकुर मौर बिहारी जू की, मैं बलिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे
मौर बिहारी रे मेरो, रास बिहारी रे
सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे...

✍️ रचनाकार :- पारंपरिक भजन, सभी भक्तों को समर्पित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन श्री कृष्ण के "मौर बिहारी" (मोरमुकुट धारी) रूप का अद्भुत वर्णन करता है। "सखी ठुमक ठुमक कर नाचे, मेरो मौर बिहारी रे" – सखी से कहती है कि देखो, मेरे मोरमुकुटधारी कान्हा ठुमक-ठुमक कर नाच रहे हैं। यह भजन नंद गाँव के नटखट कृष्ण की लीलाओं, उनके रास-विलास, और उनके अलौकिक सौंदर्य का गुणगान है।

प्रथम अंतरे में कृष्ण को "नन्द गांव को कृष्ण कन्हैया, नटखट नन्द का छोरा" कहा गया है। वे नीलमणि के समान श्याम, बसंत ऋतु के राजा, और रस में डूबे हुए हैं। नित नई लीला करने वाले ये मौर बिहारी हैं।

दूसरे अंतरे में उनकी लीलाओं का वर्णन – निधिवन में नाचना, कुंज बिहारी, मधुबन में नाच रचाना, यमुना तट पर रास, और मुरली बजाना। राधा के चितचोर सावरिया, गिरवर धारी कहलाते हैं।

तीसरा अंतरा उनके स्वरूप का वर्णन – सिर पर रंग-बिरंगे पंखों की कलगी, रसीले नैन, पाँव में घुँघरू, रसीले होंठ। वे नंदगाँव से मौरकुटी में आते हैं। चौथा अंतरा बताता है कि जब वे नाचते हैं, तो मधुप (भँवरे) मधुर रस बरसाते हैं, घटा घनघोर होती है, और सब विभोर हो जाते हैं। भक्त कहता है – "प्यारो ठाकुर मौर बिहारी जू की, मैं बलिहारी रे।"

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

मौर बिहारी स्वरूप: कृष्ण के मोरमुकुटधारी रूप को "मौर बिहारी" कहा गया है। यह रूप अत्यंत मनोहर और उत्सव-प्रिय है। "ठुमक ठुमक कर नाचना" उनकी लीलाओं की सहजता और आनंद को दर्शाता है।

रास बिहारी: रासलीला के आनंद में डूबे कृष्ण को "रास बिहारी" कहा गया। यह उनके गोपियों संग रास रचाने के लीला-वैभव को इंगित करता है।

तरज़ "मेरे उठने बिरह की पीर सखी": यह भजन उसी पारंपरिक धुन पर गाया जाता है, जो विरह और मिलन के भाव को एक साथ जगाती है। यहाँ विरह नहीं, बल्कि साक्षात दर्शन का उत्सव है – कान्हा नाच रहे हैं, और भक्त उनकी छवि में लीन है।

बलिहारी जाने का भाव: "मैं बलिहारी रे" – भक्त कहता है कि मैं उन पर न्योछावर हूँ। यह समर्पण का परम भाव है।

💖 उत्सव और माधुर्य भक्ति का संगम

🎯 संदेश

भगवान का नृत्य और लीला केवल आनंद ही नहीं, बल्कि भक्त को अपनी ओर आकर्षित करने का माध्यम है। जो भी इस रूप में रम जाता है, वह सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान की मनमोहक छवि का ध्यान और उनके गुणों का गान ही सच्ची भक्ति है। "बलिहारी" का भाव ही परम समर्पण है।

🙏 ॐ श्री मौर बिहाराय नमः ।। जय श्री कृष्ण ।।

॥ इति पारंपरिक भजनम् ॥
॥ मौर बिहारी की ठुमक हर मन को नचाए रे ।।
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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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