भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया लिरिक्स (saanvalee soorat pe mohan, dil deevaana ho gaya lyrics in hindi)

सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया का भजन श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रेम को व्यक्त करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

मोहन की सांवली सूरत: भक्ति का अद्भुत आह्वान

भूल भुलैया में खोकर, मोहन की सांवली सूरत की भक्ति में रम जाएं।

सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा काजल लगा ।तीसरा नज़रें मिलाना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी ।तीसरा तेरा मुस्कुराना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे हाथ कोमल, दूसरा मेहँदी लगी ।तीसरा मुरली बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे पाँव नाज़ुक, दूसरा पायल बंधी ।तीसरा घुंगरू बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे भोग छप्पन, दूसरा माखन धरा ।तीसरा खिचडे का खाना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी ।तीसरा मीरा का आना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....एक तो तुम देवता हो, दूसरा प्रियतम मेरे ।तीसरा सपनों में आना, दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान श्रीकृष्ण की सुंदरता और उनकी विशेषताओं का वर्णन किया गया है। पहले पद में सांवली सूरत का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कैसे उनकी सूरत को देखकर दिल दीवाना हो गया है। यहां, सांवली रंग की सुंदरता पर प्रकाश डाला गया है, जो भक्ति में आत्मविस्मृत होने की एक प्रेरणा प्रस्तावित करता है। आगे के पदों में श्रीकृष्ण के नयन, होंठ, हाथ और पांवों के गुणों का वर्णन किया गया है, जिससे भक्तों के मन में भावनाओं का प्रकट होना दर्शाया गया है। प्रत्येक विशेषता के साथ उनकी अद्भुत लीलाओं और व्यक्तित्व की झलक मिलती है, जो भक्तों को मोहन की ओर आकर्षित करती है। इस भजन के माध्यम से प्रकट होने वाली गहराई में प्रेम और भक्ति का संवेदनशील स्वरूप देखने को मिलता है।

भावार्थ की दृष्टि से यह भजन मनुष्य की आंतरिक भावनाओं और भक्ति के अनुभवों को उजागर करता है। जब भक्त मोहन की सूरत का गुणगान करते हैं, तो वे अपने दिल की गहराइयों में न केवल मोहन के प्रति प्रेम महसूस करते हैं बल्कि अपने भीतर का एक नवीनता भी पाते हैं। इस प्रेम में एक अद्भुत आकर्षण है जो उसे मोहन से संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। राधा, मीरा और अन्य भक्तों का उल्लेख करके भजन और भी जीवन्त हो जाता है, क्योंकि ये सभी भक्त अपने-अपने तरीके से मोहन के प्रति अपनी अनुपम भक्ति और समर्पण दर्शाते हैं। इस प्रकार, यह भजन मोहन के प्रेम में डूबने का आह्वान करता है, जो भक्तों के दिलों को ऊर्जा प्रदान करता है।

इस भजन का महत्व आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी छिपा है। भक्तिपंथ का संदेश स्पष्ट है, जहाँ भक्ति प्रेम और समर्पण के माध्यम से मोक्ष की ओर ले जाती है। इसमें यह दर्शाया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ही सच्चे प्रेम के प्रतीक हैं, जो अपने भक्तों के दिलों में बसते हैं। उनकी अनुपम लीलाएँ और सांवली सूरत हमारी आत्मा को स्थायी आनंद और संतोष प्रदान करती हैं। इस भजन के माध्यम से भक्ति की गहराइयों में जाकर, अद्वितीय संबंध की स्थापना की जा सकती है, जो सदैव के लिए हम सभी को जोड़े रखती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे भक्तिपंथ की विविधता में एक रंगत के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ राधा, मीरा और अन्य भक्तों की कहानियां शामिल होती हैं। पुराणों में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है, जहाँ उनकी सांवली सूरत का प्रतीकात्मक अर्थ है। यह रंग और रूप जीव की व्यथा को दर्शाते हैं। भक्तों के लिए यह भजन न केवल भक्ति का साधन है, बल्कि यह कृष्ण के प्रति असीम प्रेम और समर्पण की भावना को भी जागृत करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। यह भजन आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन को स्थापित करने में सहायक है। इसके नियमित जाप से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आध्यात्मिक स्तर पर यह भक्ति की गहराई को और मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे भक्त अपने जीवन में आनंद और संतोष का अनुभव करते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप करना सुबह या संध्या समय उत्तम होता है। ध्यानपूर्वक बैठकर, एक दीप जलाएँ और भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर के सामने भोग अर्पित करें। इस समय मन को शांत रखें और अपने भीतर भगवान के प्रति प्रेम की भावना उत्पन्न करें। सही मुद्रा में बैठकर इस भजन का स्मरण करना सर्वोत्तम अनुभव प्रदान करता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम भक्ति है, जो भक्तों को उनके प्रति प्रगाढ़ प्रेम और भक्ति में लिपटने की प्रेरणा देता है।

क्या यह भजन विशेष मौकों पर गाया जाता है?

यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, राधाष्टमी और अन्य भक्ति आयोजनों पर गाया जाता है, जब भक्त श्रीकृष्ण के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं।

किस प्रकार से इस भजन का जाप करना चाहिए?

इस भजन का जाप करते समय भक्त को शांत मन और साफ नीयत के साथ बैठना चाहिए, जिससे वे श्रीकृष्ण के प्रेम में डूब सकें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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