प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए भजन इन हिंदी लिरिक्स
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए
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जब गिरते हुए मैंने तेरे नाम लिया है
तो गिरने ना दिया तूने, मुझे थाम लिया है
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तुम अपने भक्तो पे कृपा करती हो, श्री राधे,
उनको अपने चरणों में जगह देती हो श्री राधे,
तुम्हारे चरणों में मेरा मुकाम हो जाए
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मांगने वाले खाली ना लौटे, कितनी मिली खैरात ना पूछो
उनकी कृपा तो उनकी कृपा है, उनकी कृपा की बात ना पूछो
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ब्रज की रज में लोट कर, यमुना जल कर पान
श्री राधा राधा रटते, या तन सों निकले प्राण
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गर तुम ना करोगी तो कृपा कौन करेगा
गर तुम ना सुनोगी तो मेरी कौन सुनेगा
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डोलत फिरत मुख बोलत मैं राधे राधे, और जग जालन के ख्यालन से हट रे
जागत, सोवत, पग जोवत में राधे राधे, रट राधे राधे त्याग उरते कपट रे
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लाल बलबीर धर धीर रट राधे राधे, हरे कोटि बाधे रट राधे झटपट रे
ऐ रे मन मेरे तू छोड़ के झमेले सब, रट राधे रट राधे राधे रट रे
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श्री राधे इतनी कृपा तुम्हारी हम पे हो जाए
किसी का नाम लूँ जुबा पे तुम्हारा नाम आये
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वो दिन भी आये तेरे वृन्दावन आयें हम, तुम्हारे चरणों में अपने सर को झुकाएं हम
ब्रज गलिओं में झूमे नाचे गायें हम, मेरी सारी उम्र वृन्दावन में तमाम हो जाए
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वृन्दावन के वृक्ष को, मर्म ना जाने कोई
डार डार और पात पात में, श्री श्री राधे राधे होए
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अरमान मेरे दिल का मिटा क्यूँ नहीं देती, सरकार वृन्दावन में बुला क्यूँ नहीं लेत�
दीदार भी होता रहे हर वक्त बार बार, चरणों में अपने हमको बिठा क्यूँ नहीं लेत�
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श्री वृन्दावन वास मिले, अब यही हमारी आशा है
यमुना तट छाव कुंजन की जहाँ रसिकों का वासा है
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सेवा कुञ्ज मनोहर निधि वन, जहाँ इक रस बारो मासा है
ललिता किशोर अब यह दिल बस, उस युगल रूप का प्यासा है
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मैं तो आई वृन्दावन धाम किशोरी तेरे चरनन में
किशोरी तेरे चरनन में, श्री राधे तेरे चरनन में
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ब्रिज वृन्दावन की महारानी, मुक्ति भी यहाँ भारती पानी।
तेरे चन पड़े चारो धाम, किशोरी तेरे चरनन में ॥
करो कृपा की कोर श्री राधे, दीन जजन की ओर श्री राधे।
मेरी विनती है आठो याम, किशोरी तेरे चरनन में ॥
बांके ठाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिन की रजधानी।
तेरे चरण दबवात श्याम, किशोरी तेरे चरनन में ॥
मुझे बनो लो अपनी दासी, चाहत नित ही महल खवास�
मुझे और ना जग से काम, किशोरी तेरे चरण में
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किशोरी इस से बड कर आरजू -ए-दिल नहीं कोई
तुम्हारा नाम है बस दूसरा साहिल नहीं कोई
तुम्हारी याद में मेरी सुबहो श्याम हो जाए
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यह तो बता दो बरसाने वाली मैं कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूंगा
तेरी दया पर यह जीवन है मेरा, मैं कैसे तुम्हारी शरण छोड़ दूंगा
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ना पूछो किये मैंने अपराध क्या क्या, कही यह जमीन आसमा हिल ना जाये
जब तक श्री राधा रानी शमा ना करोगी, मैं कैसे तुम्हारे चरण छोड़ दूंगा
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बहुत ठोकरे खा चूका ज़िन्दगी में, तमन्ना तुम्हारे दीदार की है
जब तक श्री राधा रानी दर्शा ना दोगी, मैं कैसे तुम्हारा भजन छोड़ दूंगा
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तारो ना तारो मर्जी तुम्हारी, लेकिन मेरी आखरी बात सुन लो
मुझ को श्री राधा रानी जो दर से हटाया, तुम्हारे ही दर पे मैं दम तोड़ दूंगा
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मरना हो तो मैं मरू, श्री राधे के द्वार
कभी तो लाडली पूछेगी, यह कौन पदीओ दरबार
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आते बोलो, राधे राधे, जाते बोलो, राधे राधे
उठते बोलो, राधे राधे, सोते बोलो, राधे राधे
हस्ते बोलो, राधे राधे, रोते बोलो, राधे राधे
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सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन " किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए भजन इन हिंदी लिरिक्स" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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