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प्रामाणिक मंदिर विवरण

संत कबीर दास जन्म स्थान – भदोही के निकट: संत कबीर की जन्मभूमि और उनके अमर दोहों का साक्षात् धाम | Sant Kabir Das Janam Sthan Near Bhadohi: The Sacred Birthplace of Sant Kabir & His Eternal Teachings

184 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
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दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Sant Kabir Das आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Sant Kabir Das
स्थान / पता Sant Kabir Das Janam Sthan, Near Bhadohi, Lahartara, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 संत कबीर दास जन्म स्थान – भदोही के निकट

जहाँ जन्मे थे संत शिरोमणि, जिनकी वाणी आज भी जन-जन की जुबान पर है (Sant Kabir Das Janam Sthan, Near Bhadohi)

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निकट स्थित वह पवित्र स्थली जहाँ संत कबीर ने जन्म लिया

🌟 परिचय: संत कबीर दास की जन्मभूमि का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के निकट स्थित यह पावन स्थल संत कबीर दास जी की जन्मस्थली है। यहाँ संत कबीर ने अपना बाल्यकाल बिताया और आगे चलकर समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम, सद्भावना और ईश्वर-भक्ति का संदेश दिया।

यह स्थान न केवल कबीर-भक्तों के लिए, बल्कि सभी आध्यात्मिक साधकों के लिए एक प्रमुख तीर्थ है। यहाँ का वातावरण संत कबीर के सरल, सहज और मानवतावादी दर्शन से ओत-प्रोत है। उनके दोहे आज भी लाखों लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का काम करते हैं।

"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।"
– संत कबीर

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

संत कबीर दास जन्म स्थान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के अंतर्गत आता है। यह स्थल भदोही शहर से लगभग 10–12 किमी की दूरी पर स्थित है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (10 किमी), वाराणसी (50 किमी), प्रयागराज (120 किमी)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (Bhadohi – BDOI) है, जो दिल्ली-हावड़ा मुख्य लाइन से जुड़ा है। वाराणसी जंक्शन (50 किमी) भी प्रमुख विकल्प है।
  • सड़क मार्ग: भदोही सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ और अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी (लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा) है, जो लगभग 55 किमी दूर है।
🗺️

भदोही के निकट, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~10 किमी
वाराणसी से दूरी: ~50 किमी

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक मान्यताएँ

मान्यता है कि संत कबीर दास का जन्म सन् 1398 (कुछ विद्वान 1440) के आसपास यहीं हुआ था। वह एक निर्गुण संत थे, जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता और निराकार ईश्वर की उपासना पर जोर दिया। उनके दोहे (साखियाँ) और पद आज भी अत्यधिक लोकप्रिय हैं।

इस स्थान पर एक प्राचीन स्मारक और मंदिर बना हुआ है, जहाँ संत कबीर की एक पादुका (चरणचिह्न) स्थापित है। श्रद्धालु यहाँ आकर उनकी वाणी का स्मरण करते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं।

"कबीरा खड़ा बाजार में, माँगे सबकी खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।।"

"दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय। जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय।।"

🏛️ स्मारक की वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 पादुका और मूर्तियाँ

मुख्य गर्भगृह में संत कबीर की प्रतीकात्मक पादुका स्थापित है। आसपास की दीवारों पर उनके दोहे और जीवन की घटनाओं को दर्शाने वाले चित्र बने हैं।

📚 कबीर वाटिका

परिसर में एक सुंदर बगीचा है, जहाँ विभिन्न पत्थरों पर कबीर के दोहे उत्कीर्ण हैं। यहाँ बैठकर सत्संग और विचार-विमर्श किया जाता है।

🎨 भित्ति चित्र और दीवार लेखन

मुख्य भवन की दीवारों पर संत कबीर के जीवन के प्रसंगों को रंगीन चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। कई स्थानों पर उनके दोहे और शब्द भी लिखे हैं।

🧘 भजन, सत्संग और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

यह स्थल केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है। यहाँ नियमित रूप से:

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कबीर भजन

प्रतिदिन सुबह-शाम कबीर के पदों का गायन होता है, जो मन को शुद्ध और शांत करता है।

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सत्संग एवं प्रवचन

प्रत्येक रविवार और विशेष अवसरों पर कबीर वाणी पर आधारित सत्संग आयोजित किए जाते हैं।

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ध्यान एवं योग

प्रातःकाल योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो संत कबीर के सहज योग मार्ग पर आधारित हैं।

🎉 प्रमुख उत्सव और आयोजन

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कबीर जयंती

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा (कबीर पूर्णिमा) को यहाँ विशाल मेला लगता है। हजारों भक्त दूर-दूर से आते हैं।

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कबीर साहित्य संगोष्ठी

वर्ष में एक बार कबीर के दोहों और उनके दर्शन पर संगोष्ठी आयोजित की जाती है।

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भजन संध्या

प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर विशेष भजन संध्या का आयोजन होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 50 किमी।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, हनुमान मंदिर, आनंद भवन – लगभग 120 किमी।
  • संत रविदास जन्म स्थान (मंदुर, वाराणसी): लगभग 45 किमी।
  • भदोही के काली मंदिर: शहर में ही प्रसिद्ध काली मंदिर स्थित है।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी की यात्रा के साथ संत कबीर दास जन्म स्थान और संत रविदास जन्म स्थान एक साथ देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च के महीने यात्रा के लिए सर्वोत्तम हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा (कबीर जयंती) पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, लेकिन उस समय गर्मी अधिक रहती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • स्मारक सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • प्रातःकाल की सभा में शामिल होना विशेष लाभकारी होता है।
  • परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था है।
  • यहाँ प्रकाशित कबीर साहित्य अवश्य खरीदें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: संत कबीर दास जन्म स्थान कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के निकट स्थित है। भदोही शहर से लगभग 10–12 किमी की दूरी पर है।

प्रश्न 2: यहाँ की मुख्य विशेषता क्या है?

उत्तर: यह संत कबीर की जन्मभूमि है। यहाँ उनकी पादुका स्थापित है और नियमित रूप से भजन, सत्संग, एवं प्रवचन होते हैं।

प्रश्न 3: क्या कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, यहाँ प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ आने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है। कबीर जयंती (ज्येष्ठ पूर्णिमा) पर विशेष उत्सव देखने लायक होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ ठहरने की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही और वाराणसी में सरकारी धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। स्थानीय स्तर पर साधारण आवास की सुविधा भी है।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BDOI) दिल्ली-हावड़ा रूट पर स्थित है। सड़क मार्ग से वाराणसी और प्रयागराज से बसें उपलब्ध हैं।

📝 संत कबीर दास जन्म स्थान – एक आध्यात्मिक यात्रा

संत कबीर दास जन्म स्थान केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि उस चेतना का प्रतीक है जो हर धर्म, हर जाति और हर वर्ग के लोगों को एक सूत्र में बाँधती है। यहाँ आकर संत कबीर के दोहों का स्मरण, उनके भजनों का गायन और उनके दर्शन पर मनन करने से जीवन में सच्चाई, सादगी और आत्म-ज्ञान का मार्ग प्रशस्त होता है।

🙏 कबीर तेरी जगत में, सबसे ऊँची बानी। जो जन तेरे भजन में लीन, वही सच्चा सूरदासी।।

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मंदिर दर्शन एवं संदर्भ मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ एवं विवरण अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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