आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
सनातन दिव्य लिरिक्स

जय आदि शक्ति माता आरती (Jai Adi Shakti Aarti) – Lyrics in Hindi

जय आदि शक्ति माता आरती – आदिशक्ति की प्रसिद्ध आरती। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व सहित।

देव: श्री आदि शक्ति कुल पाठ: 190 बार

घंटी बजाकर आशीर्वाद लें

आरती दिव्य तरंग (Ambient Temple Chants)

मंदिर घंटियों और ॐ जप के पावन स्वर के साथ आरती का अनुभव करें।

जय श्री आदि शक्ति आरति लिरिक्स

🙏 जय आदि शक्ति माता

(Jai Adi Shakti Mata) – आदिशक्ति की आरती

आदि शक्ति आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन / शाक्त
🏷️ श्रेणी: आदि शक्ति / दुर्गा आरती
📍 भाव: शक्ति, सृजन, पालन, संहार

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता॥

सृष्टि के आदि में तुम, निर्गुण से सगुण हुई।
प्रकृति प्रधान बनी, जगत जननी कहलाई॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, तीनों रूप तुम्हारे।
शिवा, राधा, सीता, सब अवतार प्यारे॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही काली कंकाली, तुम भैरवी भवानी।
तुम ही जगदम्बा, जग की कल्याणी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम बिना सब सूनी, तुमसे सब भरा है।
जीव तुम्हारी माया, तुमसे जग ठहरा है॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही सृष्टि करती, तुम ही पालनहारी।
प्रलय काल में तुम ही, सबको अपन धारी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

भक्त जनों के संकट, तुरंत हरने वाली।
सुख-सम्पत्ति देकर, मनवांछित फल देनी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

✍️ परंपरागत आरती (शाक्त परंपरा)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

"जय आदि शक्ति माता" – यह आरती आदिशक्ति, जो सृष्टि की मूल ऊर्जा हैं, की स्तुति करती है। आदि शक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। वे दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में त्रिदेवियों में प्रकट होती हैं और सभी अवतारों की आधारभूता हैं।

यह आरती बताती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड आदि शक्ति की माया से संचालित है। वे भक्तों के संकट हरने वाली, सुख-सम्पत्ति देने वाली और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली हैं।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

आदि शक्ति – सृष्टि की मूल ऊर्जा: आदि शक्ति को सभी देवी स्वरूपों की जननी माना गया है। यह आरती उनके सगुण-निर्गुण दोनों रूपों का वर्णन करती है।

त्रिदेवियों का एकीकृत रूप: दुर्गा (शक्ति), लक्ष्मी (संपत्ति), सरस्वती (ज्ञान) – ये तीनों ही आदि शक्ति के ही विभिन्न स्वरूप हैं। यह आरती इस एकता को दर्शाती है।

सृजन, स्थिति और संहार: आदि शक्ति ही सृष्टि की रचयिता, पालनहारी और संहारकर्त्री हैं। यह आरती उनके इस त्रिकाल व्यापी स्वरूप की आराधना है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

आदि शक्ति की उपासना से भक्त को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों क्षेत्रों में सफलता मिलती है। यह आरती साधक को शक्ति, साहस और समृद्धि प्रदान करती है।

✨ आस्था का प्रतीक

जो भक्त नियमपूर्वक इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी विघ्न-बाधाएँ दूर हो जाती हैं और माँ आदि शक्ति की असीम कृपा की वर्षा होती है।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय आदि शक्ति माता ।।

॥ इति श्रीआदिशक्तिआरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय आदि शक्ति माता ।।

आरती का शास्त्रीय व आध्यात्मिक महत्व

सनातन हिंदू धर्म में देव पूजा की पूर्णता आरती से होती है। आरती शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'आर्त्रिका' से हुई है, जिसका अर्थ होता है विपत्ति का हरण करना या संकट दूर करना। पूजा-पाठ के दौरान होने वाली त्रुटियों और कमियों को दूर करने के लिए पूजा के अंत में आरती करने का विधान शास्त्रों में निर्दिष्ट किया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती की थाली में सजाया गया दीया ईश्वर की दिव्य ज्योति का प्रतीक होता है। थाली में जलने वाली कपूर या घी की बत्तियां हमारे भीतर छुपे अंधकार (अज्ञान) को मिटाकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर जाने का प्रतीक हैं। आरती के समय घंटियों और घड़ियाल की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

आरती का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक शोध के अनुसार, आरती के दौरान जलने वाले कपूर (Camphor) और घी की सुगंध से वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होते हैं। आरती के समय बजने वाले शंख और तांबे की घंटियों की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क को शांत करने और मानसिक तनाव दूर करने में सहायक सिद्ध होती हैं।

आरती करने की सही शास्त्रीय विधि (Aarati Vidhi)

हरिभक्ति विलास ग्रंथ के अनुसार, आरती घुमाने का एक निश्चित चक्र होता है, जिसका पालन अत्यंत आवश्यक है:

प्रथम चरण: चरणों की चार बार आरती आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों की ओर सबसे पहले चार बार घुमाना चाहिए। यह समर्पण और नमन का सूचक है।
द्वितीय चरण: नाभि की दो बार आरती इसके बाद भगवान की नाभि की ओर दो बार थाली घुमाई जाती है, जो कि सृष्टि के केंद्र की वंदना मानी गई है।
तृतीय चरण: मुखमंडल की एक बार आरती भगवान के मुखारविंद के सामने एक बार आरती घुमाएं, जिससे उनके सौंदर्य और करुणामय स्वरूप का दर्शन होता है।
चतुर्थ चरण: सम्पूर्ण स्वरूप की सात बार आरती अंत में, भगवान के मस्तक से लेकर चरणों तक, सम्पूर्ण शरीर के चारों ओर चक्राकार रूप में सात बार आरती घुमाई जाती है।

भक्त टिप्पणियां (0)

इस आरती पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। प्रथम टिप्पणी दर्ज करें!

अपनी टिप्पणी साझा करें

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

लेखन एवं संकलन

भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)

सनातन संप्रदायों के शास्त्रों, भजनों और आरतियों का शोध कर प्रामाणिक पाठ उपलब्ध कराने वाली संस्था।

धार्मिक तथ्य-समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)

वैदिक संस्कृति व देव साहित्य के विद्वान। पीएचडी (वैदिक संस्कृत साहित्य)।

संदर्भ-आधारित समीक्षा
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पढ़ें