🙏 जय आदि शक्ति माता

(Jai Adi Shakti Mata) – आदिशक्ति की आरती

आदि शक्ति आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन / शाक्त
🏷️ श्रेणी: आदि शक्ति / दुर्गा आरती
📍 भाव: शक्ति, सृजन, पालन, संहार

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता॥

सृष्टि के आदि में तुम, निर्गुण से सगुण हुई।
प्रकृति प्रधान बनी, जगत जननी कहलाई॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, तीनों रूप तुम्हारे।
शिवा, राधा, सीता, सब अवतार प्यारे॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही काली कंकाली, तुम भैरवी भवानी।
तुम ही जगदम्बा, जग की कल्याणी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम बिना सब सूनी, तुमसे सब भरा है।
जीव तुम्हारी माया, तुमसे जग ठहरा है॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही सृष्टि करती, तुम ही पालनहारी।
प्रलय काल में तुम ही, सबको अपन धारी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

भक्त जनों के संकट, तुरंत हरने वाली।
सुख-सम्पत्ति देकर, मनवांछित फल देनी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

✍️ परंपरागत आरती (शाक्त परंपरा)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

"जय आदि शक्ति माता" – यह आरती आदिशक्ति, जो सृष्टि की मूल ऊर्जा हैं, की स्तुति करती है। आदि शक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। वे दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में त्रिदेवियों में प्रकट होती हैं और सभी अवतारों की आधारभूता हैं।

यह आरती बताती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड आदि शक्ति की माया से संचालित है। वे भक्तों के संकट हरने वाली, सुख-सम्पत्ति देने वाली और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली हैं।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

आदि शक्ति – सृष्टि की मूल ऊर्जा: आदि शक्ति को सभी देवी स्वरूपों की जननी माना गया है। यह आरती उनके सगुण-निर्गुण दोनों रूपों का वर्णन करती है।

त्रिदेवियों का एकीकृत रूप: दुर्गा (शक्ति), लक्ष्मी (संपत्ति), सरस्वती (ज्ञान) – ये तीनों ही आदि शक्ति के ही विभिन्न स्वरूप हैं। यह आरती इस एकता को दर्शाती है।

सृजन, स्थिति और संहार: आदि शक्ति ही सृष्टि की रचयिता, पालनहारी और संहारकर्त्री हैं। यह आरती उनके इस त्रिकाल व्यापी स्वरूप की आराधना है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

आदि शक्ति की उपासना से भक्त को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों क्षेत्रों में सफलता मिलती है। यह आरती साधक को शक्ति, साहस और समृद्धि प्रदान करती है।

✨ आस्था का प्रतीक

जो भक्त नियमपूर्वक इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी विघ्न-बाधाएँ दूर हो जाती हैं और माँ आदि शक्ति की असीम कृपा की वर्षा होती है।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय आदि शक्ति माता ।।

॥ इति श्रीआदिशक्तिआरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय आदि शक्ति माता ।।