दुर्गा अशांत शिशु शांति प्रदायक मंत्र | Durga Ashant Shishu Shanti Pradhayak Mantra (अशांत शिशुओं को शांत करने के लिए)
भावार्थ: जो बाल ग्रहों (बच्चों को प्रभावित करने वाली नकारात्मक शक्तियों) से ग्रसित बच्चों के लिए शांति प्रदान करने वाला है, तथा म…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: जो बाल ग्रहों (बच्चों को प्रभावित करने वाली नकारात्मक शक्तियों) से ग्रसित बच्चों के लिए शांति प्रदान करने वाला है, तथा म…
भावार्थ: ॐ। मेरी कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से संपन्न और पुत्र-संतान से युक्त हो जाता है – इसमें कोई…
भावार्थ: शत्रु (रिपु) नष्ट हो जाते हैं, कल्याण की प्राप्ति होती है, कुल (परिवार/वंश) आनंदित होता है – उस पुरुष (साधक) के, जो मेरे…
भावार्थ: Om. Salutations to Lord Shiva, who has the form of matted hair adorned with the crescent moon, who is endowed with three…
भावार्थ: O Mother, who is the most auspicious of all auspicious things, O consort of Shiva, O Giver of all accomplishments, O Thr…
भावार्थ: The Goddess who abides in all beings as beauty/grace, as power, as mother, as intelligence – salutations to Her, again a…
भावार्थ: Hail, hail, O beloved of Madhusudana (Lord Vishnu), O Dhana Lakshmi, always protect me.
भावार्थ: ॐ, तीनों लोकों की महालक्ष्मी को नमन। हमारी दरिद्रता का नाश करें और हमें प्रचुर धन प्रदान करें, प्रदान करें।
भावार्थ: जो मेरी कृपा प्राप्त कर लेता है, वह मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से परिपूर्ण होता है, और संतान सुख प्…
भावार्थ: यह मंत्र देवी लक्ष्मी के ज्येष्ठ (वरिष्ठ) स्वरूप को समर्पित है, जो स्थिति, प्रतिष्ठा, वरिष्ठता और सामाजिक मान-सम्मान प्र…
भावार्थ: यह मंत्र देवी लक्ष्मी के कमला (कमल पर निवास करने वाली) स्वरूप का आह्वान करता है। हे कमल पर विराजमान माता, हम पर प्रसन्न …
भावार्थ: हे देवी लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर, मैं आपकी प्रार्थना करता हूँ। मुझे अपार धन-समृद्धि और वैभव प्रदान क…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।