वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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पावन मंत्र संग्रह (Mantra Directory)

शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।

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Durga (बाल शांति प्रदायिनी) 274

दुर्गा अशांत शिशु शांति प्रदायक मंत्र | Durga Ashant Shishu Shanti Pradhayak Mantra (अशांत शिशुओं को शांत करने के लिए)

बालग्रहभिभूतानां बालानां शांतिकारकम्। संघातभेदे च नृणां मातृक्रिमुतम्।।

भावार्थ: जो बाल ग्रहों (बच्चों को प्रभावित करने वाली नकारात्मक शक्तियों) से ग्रसित बच्चों के लिए शांति प्रदान करने वाला है, तथा म…

Durga (विघ्नहर्ता) 465

दुर्गा सर्व बाधा मुक्ति मंत्र | Durga Sarva Badha Mukti Mantra (बाधाओं को दूर करने के लिए)

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।।

भावार्थ: ॐ। मेरी कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से संपन्न और पुत्र-संतान से युक्त हो जाता है – इसमें कोई…

Durga (शत्रु नाशिनी) 215

दुर्गा शत्रु शांति मंत्र | Durga Shatru Shanti Mantra (शत्रुओं से सुरक्षा के लिए)

रिपव: संख्यायम् यान्ति कल्याणम् च उपपद्यते। नन्दते च कुलम् पुंसाम् महात्म्यम् मम श्रृणुयान्।।

भावार्थ: शत्रु (रिपु) नष्ट हो जाते हैं, कल्याण की प्राप्ति होती है, कुल (परिवार/वंश) आनंदित होता है – उस पुरुष (साधक) के, जो मेरे…

Shiva (Mahadev) 270

ॐ जटा जूट समआकारमर्धनेंदु कृत लक्षणम् मंत्र | Om Jata Joota Samaakar Mantra

ॐ जटा जूट समआकारमर्धनेंदु कृत लक्षणम्। लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेंदुद्यशानम्।।

भावार्थ: Om. Salutations to Lord Shiva, who has the form of matted hair adorned with the crescent moon, who is endowed with three…

Devi (Gauri Narayani) 306

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये मंत्र | Sarvamangala Mangalye Mantra

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। त्र्यम्बक शरण्ये गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

भावार्थ: O Mother, who is the most auspicious of all auspicious things, O consort of Shiva, O Giver of all accomplishments, O Thr…

Devi (Durga) 373

या देवी सर्वभूतेषु मंत्र | Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra

या देवी सर्वभूतेषु कांत्तिरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। या देवी सर्वभूतेषु …

भावार्थ: The Goddess who abides in all beings as beauty/grace, as power, as mother, as intelligence – salutations to Her, again a…

Mahalakshmi 296

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै – The 18-Syllable Mahalakshmi Mantra: Meaning, Benefits & Chanting

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।

भावार्थ: ॐ, तीनों लोकों की महालक्ष्मी को नमन। हमारी दरिद्रता का नाश करें और हमें प्रचुर धन प्रदान करें, प्रदान करें।

Mahalakshmi 240

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो – Mahalakshmi Mantra for Universal Protection: Meaning, Benefits & Chanting

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ।

भावार्थ: जो मेरी कृपा प्राप्त कर लेता है, वह मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से परिपूर्ण होता है, और संतान सुख प्…

JyeshthaLakshmi 181

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः – Jyeshtha Lakshmi Mantra: Meaning, Benefits & Chanting

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।

भावार्थ: यह मंत्र देवी लक्ष्मी के ज्येष्ठ (वरिष्ठ) स्वरूप को समर्पित है, जो स्थिति, प्रतिष्ठा, वरिष्ठता और सामाजिक मान-सम्मान प्र…

Kamala 543

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद – Kamala Lakshmi Mantra: Meaning, Benefits & Chanting

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः।

भावार्थ: यह मंत्र देवी लक्ष्मी के कमला (कमल पर निवास करने वाली) स्वरूप का आह्वान करता है। हे कमल पर विराजमान माता, हम पर प्रसन्न …

KuberaLakshmi 159

ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं ऊँ कुबेराय लक्ष्मी कामले देवनये धनं कुरु स्वाहा – Kubera Lakshmi Mantra: Meaning, Benefits & Chanting

ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं ऊँ कुबेराय लक्ष्मी कामले देवनये धनं कुरु स्वाहा॥

भावार्थ: हे देवी लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर, मैं आपकी प्रार्थना करता हूँ। मुझे अपार धन-समृद्धि और वैभव प्रदान क…

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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