Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय जय जय बजरंगबली लिरिक्स (Jai Jai Bajrangbali Lyrics In Hindi) - Hanuman Bhajan हनुमान भजन

जय जय जय बजरंगबली लिरिक्स पढ़ें। संकटमोचन हनुमान जी का यह ऊर्जावान भजन और भावार्थ संदर्भ सहित Bhaktilok पर उपलब्ध है।

श्री हनुमान जी महाराज कलयुग के जाग्रत देव हैं, जिनकी आराधना मात्र से ही जीवन के समस्त संकट, भय और व्याधियां स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। "जय जय जय बजरंगबली" भजन एक अत्यंत पावन और ऊर्जावान संकीर्तन है, जो साधक के अंतःकरण में अदम्य साहस, निश्छल भक्ति और अटूट श्रद्धा का संचार करता है। यह भजन मुख्य रूप से वीर रस और दास्य भाव (समर्पण) का एक अद्भुत समन्वय है, जिसमें पवनपुत्र हनुमान जी के अतुलित बल, बुद्धि और श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का यशोगान किया गया है। इस भजन का नियमित श्रवण और गायन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कर उसे हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखता है। सुबह के समय अथवा संध्या काल में जब इस भजन का सस्वर पाठ किया जाता है, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो उठता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ जय जय जय बजरंगबली ॥

कोरस (मुखड़ा):
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली।
संकट मोचन कृपा निधान, जय जय जय बजरंगबली॥
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली।
अंजनी पुत्र महा बलवीरा, जय जय जय बजरंगबली॥

अंतरा १:
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।
तुमरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥
हाथ वज्र और ध्वजा बिराजै, कांधे मूंज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली...

अंतरा २:
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज संवारे।
लाए संजीवन लखन जियाए, श्री रघुवीर हरषि उर लाए॥
यम कुबेर दिगपाल जहां ते, कवि कोविद कहि सके कहां ते।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली...

अंतरा ३:
संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो शत बार पाठ कर जोई, छूटहि बंदि महा सुख होई।
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली...

अंतरा ४ (समर्पण):
शरण पड़े की लाज बचाओ, हे अंजनी सुत दौड़े आओ।
हृदय बसहु राम सिया जोड़ी, तुम बिन आस न दूजी मोरी॥
जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली।
संकट मोचन कृपा निधान, जय जय जय बजरंगबली॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मूल भावार्थ हनुमान जी की शरणागति और उनकी असीम शक्ति के प्रति पूर्ण विश्वास प्रकट करना है। भजन के प्रारंभ में ही बजरंगबली की बारंबार जयकार की गई है, जो साधक के अहंकार को मिटाकर उसमें दीनता और समर्पण का भाव जागृत करती है। हनुमान जी को 'संकट मोचन' और 'कृपा निधान' कहकर पुकारा गया है, जिसका अर्थ है कि वे सभी प्रकार के कष्टों को हरने वाले और दया के असीम सागर हैं।

भजन के अंतराओं में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस और हनुमान चालीसा के प्रसंगों का सुंदर समावेश है। जब हम गाते हैं कि हनुमान जी ने 'भीम रूप' धरकर असुरों का संहार किया और प्रभु श्री रामचंद्र जी के सभी अटके हुए कार्यों को सिद्ध किया, तो यह हमारे भीतर यह विश्वास जगाता है कि हमारे जीवन के भी सभी विघ्न-बाधाएं हनुमान जी की कृपा से दूर हो जाएंगे। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम द्वारा उन्हें हृदय से लगाना, भक्त और भगवान के बीच के परम संबंध को दर्शाता है। इस भजन का मुख्य संदेश यही है कि जो कोई भी निष्काम भाव से हनुमान जी की शरण में जाता है, उसके जीवन के सभी संकट क्षण भर में समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भय और व्याधियों से मुक्ति: इस भजन के नियमित उच्चारण से मानसिक तनाव, अवसाद और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: 'बजरंगबली' शब्द का नाद शरीर के चक्रों को जाग्रत करता है और साधक के भीतर अदम्य साहस का संचार करता है।
  • राम भक्ति की प्राप्ति: हनुमान जी की स्तुति के बिना भगवान राम की कृपा प्राप्त करना असंभव माना गया है। यह भजन राम भक्ति का द्वार खोलता है।
  • सरल और सुगम भाषा: अवधी और सरल हिंदी के मिश्रण से तैयार यह भजन जन-साधारण के लिए अत्यंत सुगम और हृदयग्राही है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी की पूजा और भजन के लिए कुछ विशेष नियम और समय अत्यधिक फलदायी माने गए हैं:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्ममुहूर्त (सुबह ४ से ६ बजे) और संध्याकाल (सूर्यास्त के समय) इस भजन के गायन और श्रवण के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • विशेष दिन: मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का दिन माना जाता है। इन दिनों में लाल आसन पर बैठकर, सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाकर इस भजन का पाठ करना चाहिए।
  • साधना विधि: भजन शुरू करने से पहले सर्वप्रथम भगवान श्री राम और माता सीता का ध्यान करें। इसके पश्चात हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष धूप-दीप अर्पित कर पूर्ण एकाग्रता के साथ भजन का गायन करें।
  • भोग: हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू अथवा गुड़-चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव के ११वें रुद्रावतार, पवनपुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को कलयुग का जीवंत देवता माना जाता है, जो अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं। इस भजन की वैचारिक पृष्ठभूमि गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर रचनाओं से प्रेरित है। तुलसीदास जी ने रामभक्ति की जो अविरल धारा बहाई, उसी का एक रूप हनुमान जी के भजनों में दिखाई देता है। हनुमान जी के साथ-साथ इस भजन में प्रभु श्री रामचंद्र, माता सीता और लक्ष्मण जी की महिमा का भी स्मरण किया गया है, क्योंकि हनुमान जी की भक्ति श्री राम के बिना अधूरी है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना पारंपरिक लोक-भक्ति और रामचरितमानस के सुंदरकांड व हनुमान चालीसा के छंदों के प्रभाव से हुई है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सदियों से कीर्तन की परंपरा रही है, जहां भक्त मंडली एक साथ बैठकर ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की थाप पर "जय जय जय बजरंगबली" का संकीर्तन करती है। यह भजन उसी समृद्ध संकीर्तन परंपरा का हिस्सा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक और लिखित रूप में आगे बढ़ती रही है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोकप्रचलित अवधी व हिंदी है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'संकट मोचन', 'कृपा निधान', 'केसरी नंदन' और 'बलधामा' संस्कृत के तत्सम शब्दों से प्रेरित हैं, जो भजन को एक शास्त्रीय गरिमा प्रदान करते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'पद' और 'संकीर्तन' शैली की रचना है, जिसमें लयबद्धता और गेयता का विशेष ध्यान रखा गया है। इसके अंतराओं में चौपाई छंद का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे इसे गाना और याद रखना अत्यंत सरल हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख भी देता है:

  1. निष्काम सेवा भाव: हनुमान जी ने कभी भी अपने लिए किसी सुख की कामना नहीं की। वे सदैव श्री राम की सेवा में लीन रहे। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी फल की लालसा के करना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: असीम बल और बुद्धि के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी अत्यंत विनम्र थे। वे स्वयं को सदैव 'राम दूत' ही कहते थे। यह हमें सिखाता है कि ज्ञान और शक्ति पाकर भी मनुष्य को विनम्र रहना चाहिए।
  3. संकट में धैर्य: जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए, तब हनुमान जी विचलित नहीं हुए बल्कि उन्होंने पूरी रात पुरुषार्थ कर संजीवनी बूटी लाकर संकट का समाधान किया। यह हमें विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बजरंगबली वज्र के समान अंगों वाले बलवान हनुमान जी का वह स्वरूप जो वज्र के समान कठोर और शक्तिशाली है।
संकट मोचन कष्टों और दुखों को दूर करने वाले जो जीवन के सभी शारीरिक, मानसिक और दैविक कष्टों का निवारण करते हैं।
कृपा निधान दया और कृपा के भंडार जिनकी शरण में जाने पर असीम करुणा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अतुलित बलधामा असीम शक्ति के निवास स्थान जिनके बल की कोई तुलना नहीं की जा सकती।
शंकर सुवन भगवान शिव के अवतार / पुत्र हनुमान जी को भगवान शिव का ही ग्यारहवां रुद्र अवतार माना गया है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "जय जय जय बजरंगबली, जय जय जय बजरंगबली। संकट मोचन कृपा निधान, जय जय जय बजरंगबली॥"
हे वज्र के समान शक्तिशाली बजरंगबली! आपकी सदा ही जय हो, जय हो, जय हो। आप सभी संकटों को दूर करने वाले और कृपा के असीम सागर हैं, आपकी बारंबार जयकार हो।

२. "राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।"
आप मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के परम दूत हैं और असीम शक्ति के पुंज हैं। माता अंजनी के गर्भ से जन्मे आपको पवनपुत्र के नाम से भी जाना जाता है।

३. "भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज संवारे।"
आपने विशाल और भयंकर रूप धारण करके दुष्ट असुरों का विनाश किया और प्रभु श्री रामचंद्र जी के सभी कठिन कार्यों को अत्यंत सुगमता से पूर्ण किया।

४. "संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।"
जो कोई भी सच्चे मन से महावीर हनुमान जी का स्मरण और ध्यान करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट, रोग और मानसिक पीड़ाएं समूल नष्ट हो जाती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ यदि निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का भी जाप किया जाए, तो साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:

"ॐ हनुमते नमः"

यह हनुमान जी का अत्यंत सरल और प्रभावशाली मूल मंत्र है, जो सभी प्रकार के भयों का नाश करता है।

"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"

अर्थ: मन के समान तीव्र गति वाले, पवन के समान वेगवान, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र और वानर सेना के नायक, श्री रामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम जय जय जय बजरंगबली लिरिक्स (Jai Jai Bajrangbali Lyrics)
आराध्य देव श्री हनुमान जी महाराज (बजरंगबली)
भक्ति भाव दास्य भाव, वीर रस, पूर्ण समर्पण
मुख्य भाषा सरल हिंदी एवं अवधी
गायन का उत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्या आरती के समय
विशेष फल भयमुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि, संकटों का निवारण
संबंधित पाठ श्री हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का नियमित पाठ करने से मन से नकारात्मक विचार दूर होते हैं, आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। यह साधक को मानसिक शांति और सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

'बजरंगबली' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - 'बज्र' (वज्र के समान कठोर) और 'अंग' (शरीर के हिस्से), तथा 'बली' (बलवान)। अर्थात जिनका शरीर वज्र के समान अत्यंत शक्तिशाली और अभेद्य है, उन्हें बजरंगबली कहा जाता है।

हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस भजन का पाठ और श्रवण कर सकती हैं। हनुमान जी की भक्ति में लिंग का कोई भेद नहीं है, केवल मन की शुद्धता और समर्पण आवश्यक है।

हनुमान जी की आराधना के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इन दिनों में इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करना अत्यंत मंगलकारी होता है।

यह अनिवार्य नहीं है, परंतु यदि आप इस भजन के बाद श्री हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह सोने पर सुहागा जैसा है। इससे हनुमान जी की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

पूजा या भजन करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना सर्वोत्तम माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रूप से होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और भावार्थ को सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, रामचरितमानस और पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर अत्यंत सावधानीपूर्वक संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन भजन के बोल पहुंचाना है ताकि वे बिना किसी संशय के हनुमान जी की आराधना कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस (सुंदरकांड एवं लंकाकांड)।
  • पारंपरिक हिंदू संकीर्तन एवं भजन संग्रह ग्रंथ।
  • सनातन धर्म के विभिन्न प्रामाणिक पंचांग और पूजा पद्धतियां।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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