Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

कूदे लंका में बजरंग बलि मच गई खलीबली लिरिक्स (Kude lanka Me Bajarang Bali Lyrics in Hindi) - SHAHNAAZ AKHTAR Hanuman Bhajan

शहनाज़ अख्तर द्वारा गाए प्रसिद्ध हनुमान भजन 'कूदे लंका में बजरंग बलि' के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। हनुमान जी की भक्ति के लिए आज ही देखें।

भजन परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि | Lead Overview

"कूदे लंका में बजरंग बलि मच गई खलीबली" शहनाज़ अख्तर द्वारा गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय, ओजस्वी और ऊर्जावान हनुमान भजन है। यह भजन हनुमान जी के उस अलौकिक पराक्रम और शौर्य को समर्पित है, जब उन्होंने माता सीता की खोज में विशाल समुद्र को लांघकर स्वर्णमयी लंका में प्रवेश किया था। इस भजन में हनुमान जी के बाल ब्रह्मचारी स्वरूप, उनकी असीम शक्ति, लंका दहन की ऐतिहासिक घटना और रावण के अहंकार के मर्दन का अत्यंत सजीव और वीर रस से परिपूर्ण वर्णन किया गया है। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देव हैं, और उनकी इस पावन लीला का गान करने से साधक के भीतर का भय, संकोच और नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही समाप्त हो जाती है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, आध्यात्मिक संदेश, और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण करेंगे ताकि भक्तगण इसके अंतर्निहित संदेश को आत्मसात कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

कूदे लंका में बजरंग बलि मच गई खलीबली

कूदे लंका में बजरंग बलि
मच गई खलीबली खलीबली..||

हे अंजना के लाला बाल ब्रम्हचारी
अग्नि लगा के है लंका उजाड़ी
पल में सोने की लंका जली
मच गई खलीबली खलीबली..||

राम दूत बन के है लंका में आये
रावण अभिमानी का मान घटाए
हो घूमे लंका की हर इक गली
मच गई खलीबली खलीबली..||

दशानंद सभा में इक बात ये कही है
जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं है
हां उनके चरणों में होगी भली
मच गई खलीबली खलीबली..||

कूदे लंका में बजरंग बलि
मच गई खलीबली खलीबली..||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव हनुमान जी के अदम्य साहस और प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को प्रदर्शित करना है। जब हनुमान जी ने महेंद्र पर्वत से छलांग लगाकर लंका में प्रवेश किया, तो वह केवल एक भौतिक छलांग नहीं थी, बल्कि वह धर्म की अधर्म पर विजय की पहली हुंकार थी। "खलीबली" शब्द यहाँ लंका के राक्षसों के भीतर व्याप्त भय, व्याकुलता और खलबली को दर्शाता है। हनुमान जी ने लंका में प्रवेश कर यह सिद्ध कर दिया कि जहाँ अधर्म का साम्राज्य होता है, वहाँ ईश्वर के दूत का आगमन विनाशकारी और शुद्धिकरण करने वाला होता है।

भजन के प्रथम अंतरे में हनुमान जी को "अंजना के लाला" और "बाल ब्रह्मचारी" कहकर संबोधित किया गया है। यह उनके पवित्र चरित्र और असीम ऊर्जा का प्रतीक है। उन्होंने अपनी पूंछ में लगी अग्नि से रावण की घमंडी सोने की लंका को भस्म कर दिया। यह घटना दर्शाती है कि भौतिक वैभव (सोना) चाहे कितना भी विशाल क्यों न हो, यदि वह अधर्म की नींव पर खड़ा है, तो वह क्षण भर में नष्ट हो सकता है।

द्वितीय और तृतीय अंतरे में हनुमान जी के रामदूत स्वरूप और रावण की सभा में उनके निर्भीक संवाद का वर्णन है। रावण की भरी सभा में हनुमान जी ने जो सिंहनाद किया, वह आज भी भक्तों को यह सीख देता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वाले को कभी भी किसी संसारी शक्ति से डरने की आवश्यकता नहीं है। "जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं है" - यह पंक्ति इस भजन का केंद्रीय दर्शन है, जो यह स्पष्ट करती है कि बिना भगवद-भक्ति के मानव जीवन व्यर्थ है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह हनुमान जी के चरित्र के विभिन्न आयामों को उजागर करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वीर और अद्भुत रस का समन्वय: इस भजन की लय और धुन भक्तों में उत्साह का संचार करती है। यह भय को दूर भगाने और आत्मविश्वास जगाने में सहायक है।
  • अहंकार का मर्दन: सोने की लंका का जलना इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य का अहंकार चाहे कितना भी समृद्ध क्यों न हो, ईश्वर की शक्ति के सामने वह टिक नहीं सकता।
  • शरणगति का संदेश: भजन की अंतिम पंक्तियाँ मनुष्य को भगवान श्री राम के चरणों में आत्मसमर्पण करने की प्रेरणा देती हैं, क्योंकि वहीं वास्तविक कल्याण (भली) संभव है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के भजन का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस विशिष्ट भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • मंगलवार और शनिवार: ये दोनों दिन हनुमान जी की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इस दिन सुबह या संध्या काल में इस भजन का पाठ करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
  • हनुमान जयंती: हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में सामूहिक संकीर्तन के दौरान इस भजन को गाने से वातावरण अत्यंत भक्तिमय और ऊर्जावान हो जाता है।
  • सुंदरकांड पाठ के उपरांत: जब भी घर में श्री सुंदरकांड पाठ का आयोजन हो, उसके समापन पर इस भजन को गाने से आरती से पूर्व भक्तों में अपार उत्साह का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार, अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। वे ज्ञानियों में अग्रगण्य और अतुलित बल के धाम हैं। इस भजन में प्रभु श्री राम और माता सीता के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा को भी दर्शाया गया है। हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म की रक्षा और निर्बलों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज़ अख्तर ने अपनी जादुई और ओजस्वी आवाज़ से सजाया है। उनके गाने की अनूठी शैली और उच्च स्वर की तान ने इस भजन को देश-विदेश में बसे हनुमान भक्तों के बीच एक विशेष पहचान दिलाई है। इस भजन की पृष्ठभूमि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड की घटनाओं पर आधारित है, जहाँ हनुमान जी लंका गमन करते हैं, अशोक वाटिका को उजाड़ते हैं और अंततः लंका दहन करते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और जनसामान्य के हृदय को छूने वाली खड़ी बोली हिंदी है। इसमें कुछ लोक प्रचलित शब्दों जैसे "खलीबली" (खलबली/व्याकुलता) और "लाला" (पुत्र) का प्रयोग किया गया है, जो इसे और अधिक सुगम और संवादात्मक बनाते हैं। इसकी काव्य शैली मुक्तक है, जिसमें लयबद्धता और ताल का विशेष ध्यान रखा गया है। ढोलक, मंजीरे और पैड की तीव्र थाप पर गाया जाने वाला यह भजन श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन के माध्यम से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  • निर्भीकता और साहस: हनुमान जी अकेले ही राक्षसों की नगरी लंका में प्रवेश कर गए। यह हमें सिखाता है कि यदि हमारा उद्देश्य पवित्र है, तो हमें अकेले चलने से भी नहीं डरना चाहिए।
  • कर्तव्य के प्रति निष्ठा: रामदूत के रूप में हनुमान जी ने अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से किया। हमें भी अपने जीवन के कर्तव्यों को बिना किसी आलस्य के पूरा करना चाहिए।
  • अहंकार से दूरी: रावण का पतन उसके अहंकार के कारण हुआ। अतः हमें अपने धन, बल या ज्ञान पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक संदर्भ
बजरंग बलि वज्र के समान अंगों वाले बलशाली (हनुमान जी) शारीरिक और मानसिक शक्ति के प्रतीक।
खलीबली खलबली, व्याकुलता, भय का वातावरण अधर्मियों के मन में धर्म की शक्ति का भय।
अंजना के लाला माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी का वात्सल्यपूर्ण नाम।
अभिमानी घमंडी, अहंकारी (रावण) अहंकार जो मनुष्य के विनाश का कारण बनता है।
दशानंद दस सिरों वाला (रावण) दसों इंद्रियों की वासनाओं का प्रतीक।
भली होगी कल्याण होगा, भला होगा ईश्वर की शरण में जाने पर मिलने वाली परम शांति।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "कूदे लंका में बजरंग बलि, मच गई खलीबली खलीबली.."
भावार्थ: जैसे ही पवनपुत्र हनुमान जी ने लंका की भूमि पर कदम रखा, वैसे ही पूरी राक्षस नगरी में भय और व्याकुलता की लहर दौड़ गई। अधर्म के गढ़ में धर्म के प्रतीक का आगमन ही खलबली मचाने के लिए पर्याप्त था।

पंक्ति: "हे अंजना के लाला बाल ब्रम्हचारी, अग्नि लगा के है लंका उजाड़ी, पल में सोने की लंका जली..."
भावार्थ: माता अंजनी के लाडले और परम पवित्र बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी ने अपनी पूंछ की अग्नि से रावण की उस सोने की लंका को क्षण भर में जलाकर राख कर दिया, जिस पर रावण को अत्यंत घमंड था।

पंक्ति: "राम दूत बन के है लंका में आये, रावण अभिमानी का मान घटाए, हो घूमे लंका की हर इक गली..."
भावार्थ: हनुमान जी स्वयं को केवल प्रभु श्री राम का सेवक मानते हैं। वे रामदूत बनकर आए और उन्होंने महाअभिमानी रावण के गर्व को चूर-चूर कर दिया। वे निर्भीक होकर लंका की हर गली में घूमे और कोई भी राक्षस उनका बाल भी बांका नहीं कर सका।

पंक्ति: "दशानंद सभा में इक बात ये कही है, जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं है, हां उनके चरणों में होगी भली..."
भावार्थ: रावण की भरी सभा में हनुमान जी ने गर्जना करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि जो व्यक्ति भगवान श्री राम की शरण में नहीं है, उसका जीवन और ऐश्वर्य व्यर्थ है। यदि मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, तो उसे प्रभु के चरणों में आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हनुमान जी की पूजा के समय इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ: जो मन के समान तीव्र गति वाले हैं, पवनदेव के समान वेगवान हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र वानरयूथपति श्रीरामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम कूदे लंका में बजरंग बलि मच गई खलीबली
मुख्य आराध्य देव श्री हनुमान जी (बजरंगबली)
मुख्य गायिका शहनाज़ अख्तर (Shahnaz Akhtar)
काव्य रस वीर रस एवं भक्ति रस
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
मुख्य विषय लंका दहन, रामभक्ति, रावण का मान-मर्दन
सर्वश्रेष्ठ अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भजन की मुख्य गायिका सुप्रसिद्ध भक्ति स्वर कोकिला शहनाज़ अख्तर हैं। उनकी ओजस्वी शैली ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बनाया है।

"खलीबली" (खलबली) का अर्थ है व्याकुलता, घबराहट या भय का वातावरण। जब हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया, तो राक्षसों के बीच जो भय और अफरा-तफरी मची, उसी को यहाँ "खलीबली" कहा गया है।

यह पंक्ति दर्शाती है कि बिना भगवद-भक्ति और धर्म के मार्ग पर चले मनुष्य का जीवन, चाहे वह कितना भी समृद्ध क्यों न हो, व्यर्थ है। जीवन की सार्थकता केवल ईश्वर के प्रति समर्पण में ही है।

हनुमान जी ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया और अपनी संपूर्ण ऊर्जा तथा जीवन को केवल प्रभु श्री राम की सेवा में समर्पित कर दिया। इसलिए उन्हें बाल ब्रह्मचारी के रूप में पूजा जाता है।

इस भजन के श्रवण और कीर्तन से साधक के मन का भय दूर होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, और घर से नकारात्मक शक्तियों का नाश होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हाँ, इस भजन की पूरी पृष्ठभूमि गोस्वामी तुलसीदास जी रचित रामचरितमानस के 'सुंदरकांड' प्रसंग से प्रेरित है, जिसमें हनुमान जी का लंका जाना, सीता माता की खोज करना और लंका दहन करना वर्णित है।

रावण के अहंकार को तोड़ने, माता सीता को अपनी शक्ति का अहसास कराने और राक्षसों के मन में भय उत्पन्न करने के लिए हनुमान जी ने रावण द्वारा उनकी पूंछ में लगाई गई आग से पूरी लंका को भस्म कर दिया था।

इस भजन को मंगलवार या शनिवार की संध्या आरती के समय, या किसी भी धार्मिक उत्सव, सुंदरकांड पाठ और हनुमान जयंती के अवसर पर गाना सबसे उत्तम माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "कूदे लंका में बजरंग बलि मच गई खलीबली" भजन के प्रामाणिक लिरिक्स और उसके गहरे आध्यात्मिक निहितार्थों को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब भक्त पूर्ण निष्ठा से ईश्वर की सेवा में समर्पित होता है, तो वह असंभव कार्य को भी संभव बना सकता है। यह सामग्री पूरी तरह से शोधित और पारंपरिक हिंदू ग्रंथों के संदर्भों के अनुकूल है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री)

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकाण्ड प्रसंग
  • श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास (सुंदरकांड एवं लंकाकांड)
  • पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं लोक संगीत परंपरा

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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