Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा लिरिक्स (Dukh Me Naa Ghabrana Na Kar Esa Waisa Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Rekha Garg

पढ़ें दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा लिरिक्स (Dukh Me Naa Ghabrana Na Kar Esa Waisa Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Rekha Garg - Bhaktilok का शुद्

हिंदू सनातन धर्म में संकटमोचन श्री हनुमान जी की आराधना को जीवन के समस्त दुखों, भयों और मानसिक क्लेशों से मुक्ति का सबसे अमोघ साधन माना गया है। सुप्रसिद्ध भजन गायिका रेखा गर्ग द्वारा स्वरबद्ध किया गया भजन "दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा" एक ऐसा ही दिव्य और प्रेरणादायी भक्ति गीत है, जो साधक को जीवन के सबसे कठिन दौर में भी अडिग रहने, धैर्य बनाए रखने और सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत और श्री रामचरितमानस के भक्ति मार्ग का एक अत्यंत सरल और सुगम समन्वय है। जब मनुष्य जीवन के थपेड़ों से निराश होकर दिशाहीन होने लगता है, तब यह भजन उसके भीतर आशा की एक नई किरण जगाता है और उसे याद दिलाता है कि हनुमान जी की कृपा से हर संकट का निवारण संभव है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा ॥

मुखड़ा:
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।

अंतरा 1:
सुख और दुःख तो जीवन के हैं दो पहलू प्यारे,
कभी उजाला कभी अँधेरा किस्मत के मारे।
धैर्य धरम को कभी न खोना, चाहे हो दुःख कैसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा...

अंतरा 2:
हनुमत की शरण में जो भी प्राणी आता है,
संकट मोचन पल भर में दुःख दूर भगाता है।
सच्चे मन से ध्यान लगा तू, छोड़ दे लालच पैसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा...

अंतरा 3:
राम दूत की महिमा जग में सबसे न्यारी है,
भक्तों के संकट हरने की लीला प्यारी है।
मन में रख विश्वास तू बन्दे, संकट टल जाएगा ऐसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा...

अंतरा 4:
कर्मों की यह खेती बन्दे सबको ही काटनी है,
जैसी करनी वैसी भरनी, यह रीत पुरानी है।
राम नाम का सुमिरन कर ले, जीवन सुधरेगा वैसा,
जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।
दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन का मूल भाव मानव जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई—कर्म के सिद्धांत और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण—पर आधारित है। भजन की शुरुआत ही मनुष्य को सचेत करने से होती है कि जब जीवन में दुःख, विपत्ति या संकट का समय आए, तो घबराकर कोई भी अनैतिक, गलत या अधार्मिक कार्य ("ऐसा वैसा") नहीं करना चाहिए। मनुष्य को यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि प्रकृति का नियम अटल है; हम जैसा कर्म रूपी बीज बोएंगे, हमें वैसा ही फल प्राप्त होगा।

भजन के माध्यम से यह समझाया गया है कि सुख और दुःख दोनों ही जीवन के अनिवार्य चक्र हैं। जिस प्रकार दिन के बाद रात और रात के बाद दिन का आना निश्चित है, उसी प्रकार सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख का आना भी सुनिश्चित है। इसलिए, विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपना धैर्य और धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। जब हम संकटमोचन श्री हनुमान जी की शरण में जाते हैं, तो वे हमारे भीतर उस मानसिक शक्ति और साहस का संचार करते हैं जिससे हम बड़े से बड़े संकट को भी हंसते-हंसते पार कर लेते हैं। यह भजन हमें भौतिक लालच और क्षणिक सुखों से ऊपर उठकर राम-नाम के सुमिरन और निस्वार्थ भक्ति की ओर अग्रसर होने का दिव्य संदेश देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल सुनने में मधुर नहीं है, बल्कि इसके आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में कई गहरे महत्व हैं:

  • कर्म के सिद्धांत की पुष्टि: यह भजन उपनिषदों और भगवद्गीता के "कर्मण्येवाधिकारस्ते" के सिद्धांत को बहुत ही सरल लोक-भाषा में प्रस्तुत करता है। यह सिखाता है कि हमारे वर्तमान कर्म ही हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं।
  • मानसिक संबल और सांत्वना: अवसाद (Depression) और तनाव के इस आधुनिक युग में, यह भजन एक थेरेपी की तरह काम करता है। यह मन को शांत करता है और विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देता है।
  • हनुमान भक्ति का महात्म्य: श्री हनुमान जी को कलियुग का जाग्रत देवता माना गया है। यह भजन उनके प्रति अटूट विश्वास जगाता है कि वे अपने भक्तों को कभी अकेला नहीं छोड़ते।
  • अनैतिकता से बचने की चेतावनी: "ना कर ऐसा वैसा" पंक्ति मनुष्य को संकट के समय शॉर्टकट अपनाने, चोरी, बेईमानी या किसी को धोखा देने जैसे अनैतिक कार्यों से दूर रहने की चेतावनी देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की भक्ति के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण की एक विशेष शास्त्रीय और पारंपरिक विधि है जो इसके प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है:

  • शुभ दिन: इस भजन का श्रवण और कीर्तन विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि ये दिन पवनपुत्र हनुमान जी को समर्पित हैं।
  • सर्वोत्तम समय: संध्याकाल की आरती के समय या प्रातःकाल उठकर शांत मन से इस भजन को सुनने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय हाथ में झांझ, मंजीरा या ताली बजाकर सामूहिक संकीर्तन करना चाहिए। इससे वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  • विशेष अवसर: हनुमान जयंती, बुढ़वा मंगल, सुंदरकांड पाठ के समापन पर या किसी भी पारिवारिक संकट के समय इस भजन का सामूहिक पाठ अत्यंत शांति प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या और अतुलित शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके साथ ही, इस भजन में प्रभु श्री राम के नाम की महिमा का भी गान किया गया है, क्योंकि हनुमान जी की भक्ति का मार्ग राम-नाम से ही होकर गुजरता है।

इस भजन को आधुनिक समय में सुप्रसिद्ध लोक गायिका रेखा गर्ग ने अपनी मधुर और ओजस्वी आवाज से जन-जन तक पहुंचाया है। उनकी गायन शैली में हरियाणा और उत्तर भारत की लोक संस्कृति की सोंधी महक होती है, जो सीधे श्रोताओं के हृदय को स्पर्श करती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक लोक भजनों से प्रेरित है। भारत के ग्रामीण अंचलों में सदियों से कर्म की प्रधानता को दर्शाने वाले गीत गाए जाते रहे हैं। "जैसा बोएगा वैसा पाएगा" की अवधारणा कबीरदास जी के दोहों और तुलसीदास जी की चौपाइयों में भी मिलती है। आधुनिक काल में इस पारंपरिक ज्ञान को एक नए संगीतमय रूप में ढालकर प्रस्तुत किया गया है, जिससे आज की युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों और नैतिक मूल्यों से जुड़ सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें लोक-भाषा के शब्दों का सुंदर पुट है। इसकी काव्य शैली उपदेशात्मक और संवादात्मक है, जहाँ कवि सीधे "बन्दे" (मनुष्य) को संबोधित कर रहा है।

भजन में प्रयुक्त रूपक (Metaphor) जैसे "कर्मों की खेती" और "जीवन के दो पहलू" अत्यंत प्रभावशाली हैं। इसकी लय और ताल इतनी सुगम है कि एक साधारण व्यक्ति भी इसे एक बार सुनकर आसानी से गुनगुना सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख प्रदान करता है:

  1. धैर्य (Patience): कठिन समय में विचलित न होना ही सच्चे साधक की पहचान है।
  2. सदाचार (Righteousness): चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न हो, कभी भी अधर्म का मार्ग न चुनें।
  3. संतोष (Contentment): भौतिक धन-दौलत के पीछे भागने के बजाय मानसिक शांति और ईश्वर भक्ति को प्राथमिकता दें।
  4. ईश्वर पर पूर्ण विश्वास (Faith): यह विश्वास रखें कि हनुमान जी हमारे रक्षक हैं और वे हर संकट को टालने में सक्षम हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बन्दे हे मनुष्य / ईश्वर की संतान जीवात्मा को संबोधित किया गया है।
ऐसा वैसा गलत, अनैतिक या अधार्मिक कार्य संकट के समय विचलित होकर किए जाने वाले पाप कर्म।
किस्मत के मारे प्रारब्ध या भाग्य के अधीन पूर्व जन्मों के कर्मों के फल स्वरूप मिलने वाली परिस्थितियां।
संकट मोचन कष्टों को हरने वाले (हनुमान जी) हनुमान जी का वह स्वरूप जो भक्तों के विघ्न-बाधाओं का नाश करता है।
सुमिरन स्मरण करना / नाम जप मन ही मन भगवान के नाम का निरंतर ध्यान करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा, जैसा बोएगा तू बन्दे फल पाएगा वैसा।"
हे मनुष्य! जब भी तेरे जीवन में दुःख आए, तो घबराकर कोई गलत कदम मत उठाना। याद रख, यह संसार कर्म-प्रधान है; तू जैसा कर्म करेगा, तुझे वैसा ही परिणाम भुगतना पड़ेगा।

"सुख और दुःख तो जीवन के हैं दो पहलू प्यारे, कभी उजाला कभी अँधेरा किस्मत के मारे।"
सुख और दुःख जीवन की गाड़ी के दो पहिए हैं। जैसे दिन के बाद रात का आना तय है, वैसे ही परिस्थितियों का बदलना भी निश्चित है। भाग्य के खेल में कभी उजाला (सुख) होता है तो कभी अंधेरा (दुःख)।

"हनुमत की शरण में जो भी प्राणी आता है, संकट मोचन पल भर में दुःख दूर भगाता है।"
जो भी मनुष्य सच्चे हृदय से हनुमान जी की शरण ग्रहण करता है, संकटमोचन प्रभु उसके सारे कष्टों को क्षण भर में दूर कर देते हैं और उसे अभय प्रदान करते हैं।

"कर्मों की यह खेती बन्दे सबको ही काटनी है, जैसी करनी वैसी भरनी, यह रीत पुरानी है।"
यह संसार कर्मों का एक विशाल खेत है। यहाँ हम जो भी बोते हैं, उसे काटना ही पड़ता है। 'जैसी करनी वैसी भरनी' का यह नियम सृष्टि के आरंभ से चला आ रहा है और इसे कोई बदल नहीं सकता।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के मुख्य संदेश को और अधिक गहराई से समझने के लिए हनुमान जी के इस सिद्ध मंत्र का जप करना चाहिए:

॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
॥ वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥

इसके अतिरिक्त, कर्म की प्रधानता को दर्शाने वाली गोस्वामी तुलसीदास जी की यह चौपाई भी इस भजन के भाव को पुष्ट करती है:

"कर्म प्रधान विश्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दुःख में बन्दे ना घबराना ना कर ऐसा वैसा
समर्पित देवता श्री हनुमान जी एवं प्रभु श्री राम
मुख्य गायिका रेखा गर्ग (Rekha Garg)
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
मुख्य विषय कर्म का सिद्धांत, धैर्य और हनुमान भक्ति
भक्ति भाव समर्पण, विनय और शांत रस
उपयुक्त अवसर मंगलवार/शनिवार पूजा, हनुमान जयंती, दैनिक संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका रेखा गर्ग ने गाया है, जिनकी आवाज में यह भजन अत्यधिक लोकप्रिय हुआ है।

इस भजन का मुख्य संदेश कर्म का सिद्धांत है—"जैसा बोओगे, वैसा काटोगे"। यह हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी हमें अपने धर्म और सत्कर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

हनुमान जी अपने भक्तों के जीवन में आने वाले सभी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संकटों को पल भर में दूर कर देते हैं, इसलिए उन्हें संकट मोचन कहा जाता है।

इस भजन को सुबह या शाम की पूजा के समय, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को सुनना अत्यंत शुभ और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।

इसका अर्थ है कि दुःख या तंगी के समय मनुष्य को कभी भी चोरी, बेईमानी, झूठ या किसी को नुकसान पहुँचाने जैसे अनैतिक कार्य नहीं करने चाहिए।

हाँ, यह भजन बच्चों को नैतिक मूल्य, अच्छे कर्मों का महत्व और विपरीत परिस्थितियों में मानसिक रूप से मजबूत रहने की सीख देता है।

इस भजन में "राम नाम" के सुमिरन पर बल दिया गया है, क्योंकि राम नाम का जप करने से हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त की बिगड़ी बात बना देते हैं।

हाँ, यह भजन गीता के निष्काम कर्म योग और कर्म फल के सिद्धांत को बहुत ही सरल रूप में प्रस्तुत करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा सनातन धर्म के ग्रंथों, कर्म सिद्धांत की शास्त्रीय व्याख्याओं और पारंपरिक लोक भजनों के गहन अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को न केवल भजन के बोल प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक संदेशों से भी अवगत कराती है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, प्रामाणिक और प्रेरणादायी सामग्री पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - कर्म योग अध्याय
  • श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
  • पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं लोक संस्कृति संकलन

संबंधित भजन एवं लेख

हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन को भक्तिमय बनाने के लिए आप हमारे निम्नलिखित लेख भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!