hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ॐ नमः शिवाय 108 (Om Namah Shivay 108 Times Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan ANUP JALOTA Hari Keertan Mala

अनूप जलोटा द्वारा रचित ॐ नमः शिवाय 108 बार जाप के लाभ, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व जानें। महादेव की कृपा पाने के लिए इस पावन संकीर्तन का पाठ करें।

भगवान शिव को समर्पित "ॐ नमः शिवाय 108" महामंत्र और अनूप जलोटा की हरि कीर्तन माला का यह पावन संकीर्तन साधकों को देवादिदेव महादेव की अनंत चेतना, कल्याणकारी स्वरूप और परम शांति की अनुभूति कराता है। शिव सनातन संस्कृति में संहारक और कल्याणकर्ता दोनों रूपों में पूजनीय हैं। जब कोई साधक पूरी श्रद्धा, शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ 108 बार "ॐ नमः शिवाय" का जाप करता है, तो उसके भीतर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक अशांति और सांसारिक मोह-माया का शमन होने लगता है। महाशिवरात्रि, सावन मास और प्रदोष व्रत जैसे पावन अवसरों पर इस महामंत्र का संकीर्तन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। अनूप जलोटा जी की मधुर वाणी में सजी यह हरि कीर्तन माला भक्तों को ध्यानमग्न मुद्रा में ले जाती है, जहाँ केवल शिवमय चेतना शेष रहती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन, मंत्र के गहरे अर्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व, जप विधि और जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का समग्र विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
हर हर भोले नमः शिवाय
शिवजी सतनाम, शिवजी सुखधाम
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

अंतरा 1:

जटा में गंग बिराजै, चंद्र ललाट सजे
भस्म रमे अंगों में, नाग गले में विराजे
डमरू की डम डम बाजे, गूंजे भुवन सारा
भक्तों के संकट हरने, आए डमरू वाला
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

अंतरा 2:

कैलाशपति है स्वामी, भूतनाथ भगवान
जो शरण तिहारी आए, पावे पद निर्वान
बेलपत्र धतूरा प्यारे, जल धारा भाय
भोले भंडारी की महिमा, कोई अंत ना पाय
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

समापन / कीर्तन माला:

शिव शंभू जयकारा बोलो, हर हर महादेव
कण-कण में शिव बसते हैं, शिव ही है देव
ॐ नमः शिवाय जपते चलो, भवसागर तर जाओ
अनूप जलोटा गाए, तुम भी सुर में मिलाओ
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन और महामंत्र का शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। "ॐ नमः शिवाय" का अर्थ है—"मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ।" पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश, वायु) को नियंत्रित करने वाले इस पंचाक्षर मंत्र में ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा समाहित है। भजन के स्थायी भाग में शिव को 'सतनाम' और 'सुखधाम' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि शिव ही शाश्वत सत्य हैं और समस्त सुखों के मूल स्त्रोत हैं।

प्रथम अंतरे में देवादिदेव के स्वरूप का वर्णन किया गया है—उनकी जटाओं में माँ गंगा का निवास है, मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, अंगों पर भस्म रमी है और गले में सर्पराज सुशोभित हैं। यह रूप वैराग्य, त्याग और परम चेतना का प्रतीक है। जब डमरू की ध्वनि गूंजती है, तो वह सृष्टि के सृजन और विध्वंस के चक्र को दर्शाती है।

द्वितीय अंतरे में साधक शिव को 'कैलाशपति' और 'भूतनाथ' कहकर पुकारता है। भगवान शिव अत्यंत भोले हैं, जिन्हें भव्य दरबार या महंगे उपहारों की आवश्यकता नहीं होती; वे मात्र एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जो भक्त उनकी शरण में आता है, वह इस भवसागर से तर जाता है और आध्यात्मिक शांति को प्राप्त करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह हरि कीर्तन माला केवल एक संगीत रचना नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि की ध्यान साधना है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पंचाक्षर मंत्र की शक्ति: यह भजन शिव के मूल पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' की 108 बार आवृत्ति को संगीतबद्ध करता है।
  • मानसिक शांति और एकाग्रता: अनूप जलोटा की शांत और गंभीर गायकी मन को तुरंत शांत करती है और ध्यान लगाने में सहायता करती है।
  • भक्ति रस और वैराग्य: यह भजन साधक के मन में सांसारिक मोह-माया के प्रति विरक्ति और ईश्वर के प्रति गाढ़ प्रेम उत्पन्न करता है।
  • सर्वसुलभ आराधना: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं और मानसिक रूप से शिव साधना कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजन और 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' के जाप का विशेष फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:

  • ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल: प्रातः काल (सूर्योदय से पूर्व) या संध्या के समय इस भजन का श्रवण और गायन अत्यंत लाभकारी माना गया है।
  • स्थान की पवित्रता: पूजा घर, मंदिर अथवा शांत एकांत स्थान पर आसन बिछाकर बैठें।
  • सामग्री: भगवान शिव के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें और संभव हो तो शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
  • रुद्राक्ष माला: यदि आप 108 बार जाप कर रहे हैं, तो रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना सर्वोत्तम माना जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव (भगवान शिव) विराजमान हैं, जिन्हें त्रिगुण-अतीत, अद्य और अनादि माना गया है। इस सुंदर रचना को भारत के प्रख्यात भजन सम्राट पद्म श्री अनूप जलोटा ने अपनी सुरीली और समर्पित आवाज से सजाया है। अनूप जलोटा जी की हरि कीर्तन माला ने पीढ़ियों से भारतीय जनमानस में भक्ति संगीत की अलख जगाई है। शिव परंपरा में आदिगुरु शंकराचार्य से लेकर तमाम संतों ने शिव को ही परम ज्ञान और मुक्ति का द्वार बताया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

अनूप जलोटा की 'हरि कीर्तन माला' एल्बम श्रृंखला भारतीय भक्ति संगीत की अमूल्य धरोहर है। इस भजन की रचना पारंपरिक शिव स्तोत्रों और पंचाक्षर मंत्र के आधार पर की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनमानस तक भगवान शिव के सरल, सुबोध और कल्याणकारी स्वरूप को पहुँचाना है ताकि कोई भी गृहस्थ या साधक आसानी से शिव स्मरण कर सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रज-अवधि मिश्रित लोकभाषा शैली में रचित है, जिससे यह आम आदमियों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे 'जटा में गंग बिराजै, चंद्र ललाट सजे'। यह काव्यात्मक शैली चित्त को आल्हादित करने वाली और हृदय में भक्ति रस प्रवाहित करने वाली है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में अहंकार का त्याग करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे शिव ने भस्म को अपने अंगों पर लगाया है। शिव वैराग्य के प्रतीक हैं, जो हमें सिखाते हैं कि बाहरी चमक-दमक से परे आत्मिक शुद्धता ही सबसे बड़ा धन है। विकट परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना और भगवान पर अटूट विश्वास रखना ही सच्ची शिव भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
ॐ (Om) प्रणव ध्वनि, ब्रह्मांड की मूल ध्वनि परम ब्रह्म परमात्मा का प्रतीक
नमः शिवाय शिव को नमस्कार पंचमहाभूतों और आत्मा का शिव में समर्पण
सतनाम शाश्वत और सत्य नाम जो कभी नष्ट न हो, केवल ईश्वर का नाम
सुखधाम सुखों का घर या स्थान मोक्ष और परम शांति का धाम
भस्म विभूति या राख संसार की नश्वरता का बोध

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ॐ नमः शिवाय, हर हर भोले नमः शिवाय..."
इस प्रारंभिक पंक्ति में साधक ब्रह्मांड की मूल ध्वनि 'ॐ' के साथ शिव का आह्वान करता है। 'हर हर' का अर्थ है सभी दुखों और पापों को हरने वाले भोलेनाथ।

"शिवजी सतनाम, शिवजी सुखधाम..."
यहाँ शिव को शाश्वत सत्य और आनंद का धाम बताया गया है। संसार की हर वस्तु परिवर्तनशील है, केवल शिव का नाम ही स्थिर और सत्य है।

"जटा में गंग बिराजै, चंद्र ललाट सजे..."
यह पंक्ति शिव के प्राकृतिक और आकाशीय नियंत्रण को दर्शाती है। गंगा वेगवती चेतना का और चंद्रमा शीतलता व मन का प्रतीक है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

शिव साधना के दौरान निम्नलिखित पंचाक्षर एवं महामृत्युंजय मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ नमः शिवाय ॥

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

यह महामृत्युंजय मंत्र अकाल मृत्यु से रक्षा और मोक्ष प्रदाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ॐ नमः शिवाय 108 (Om Namah Shivay Hari Keertan Mala)
गायक पद्म श्री अनूप जलोटा
प्रमुख देवता भगवान शिव (महादेव, शंभू)
भाषा हिंदी / संस्कृत
संगीत शैली भक्ति संकीर्तन / भजन
मुख्य थीम शिव भक्ति, वैराग्य, ध्यान और शांति
शुभ अवसर महाशिवरात्रि, सावन मास, प्रदोष व्रत, सोमवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'ॐ नमः शिवाय' का सरल अर्थ है "मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ।" यह पंचाक्षर मंत्र पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) को संतुलित करने और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला महामंत्र है।

इस भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में, संध्या वंदन के समय, सावन सोमवार के दिन या महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सुनना और गाना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

सनातन धर्म में 108 संख्या को ब्रह्मांडीय पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। 108 मनकों की रुद्राक्ष माला से जाप करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है।

यह प्रसिद्ध भजन पद्म श्री अनूप जलोटा की लोकप्रिय 'हरि कीर्तन माला' एल्बम का हिस्सा है।

हाँ, 'ॐ नमः शिवाय' एक सार्वभौमिक पंचाक्षर मंत्र है। इसे जाति, लिंग या आयु के किसी भी बंधन के बिना हर कोई पूरी श्रद्धा के साथ जप सकता है।

शिव पूजा में जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और भस्म का विशेष महत्व माना गया है। भगवान शिव इन साधारण सामग्रियों से ही अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।

भजन के धीमे और लयबद्ध स्वर मन की तरंगों को शांत करते हैं, जिससे तनाव और चिंता कम होती है और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

निश्चित रूप से, महाशिवरात्रि की रात्रि जागरण और शिव आराधना के दौरान इस भजन का संकीर्तन और 108 बार जाप करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को शिव पुराण, पारंपरिक पंचाक्षर मंत्र साधना पद्धतियों और अनूप जलोटा की भजन परंपरा के आधार पर प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति भाव और सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण (वेद व्यास कृत) - रुद्रासंहिता
  • पारंपरिक पंचाक्षर स्तोत्र एवं शिव महिम्न स्तोत्र
  • भजन सम्राट अनूप जलोटा की हरि कीर्तन माला संकलन
  • सनातन धर्म के पंचांग एवं व्रत-उत्सव संदर्भ ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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