Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन लिरिक्स हिंदी ( He Dukh Bhanjan Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan

हे दुःख भंजन मारुति नन्दन भजन के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति और शांति के लिए इस दिव्य भजन का पाठ करें। | Bhaktilok

सनातन धर्म में श्री हनुमान जी को कलयुग के जाग्रत देव और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। "हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन" (He Dukh Bhanjan Lyrics in Hindi) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी हनुमान भजन है, जो साधक के मन से भय, संताप और चिंताओं का समूल नाश करने की क्षमता रखता है। इस भजन में हनुमान जी के दिव्य स्वरूप, उनके अतुलित बल, और प्रभु श्री राम के प्रति उनके अनन्य समर्पण का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है। जब कोई भक्त पूर्ण श्रद्धा और करुण भाव से इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो उसके भीतर अदम्य साहस, सकारात्मक ऊर्जा और अटूट विश्वास का संचार होता है। यह भजन विनय और शरणागति के भाव से ओतप्रोत है, जो हमें यह सिखाता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि हम पवनपुत्र की शरण में जाते हैं, तो वे हमारे दुखों का भंजन अवश्य करते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥


॥ अंतरा - १ ॥
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुःख हरन दास के भाग्य विधाता।
तुम मारुति सुत वीर हनुमाना, संकट मोचन कृपा निधाना।
हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार॥

॥ अंतरा - २ ॥
लक्ष्मण के जब प्राण उबारे, द्रोणागिरि सब पर्वत लाए।
राम लखन को गोद बिठाए, सीता मैया की सुध लाए।
हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार॥

॥ अंतरा - ३ ॥
अतुलित बल के धाम हो तुम, राम भक्त निष्काम हो तुम।
शरण पड़े की लाज बचाओ, संकट से तुम पार लगाओ।
हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार॥

॥ अंतरा - ४ ॥
कलयुग के तुम देव निराले, भक्त जनों के रखवाले।
करो कृपा हे अंजनी लाला, दूर करो संकट का जाला।
हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मूल भाव पूर्ण शरणागति और करुणा की याचना है। भक्त अपने आराध्य हनुमान जी को पुकारते हुए कहता है कि हे दुखों का नाश करने वाले मारुति नन्दन! आप मेरी इस आर्त पुकार को सुन लीजिए। मैं बार-बार आपके चरणों में विनती कर रहा हूँ। आप अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के स्वामी हैं, जो अपने भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर उनके भाग्य का निर्माण करते हैं।

भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी के उन महान कार्यों का स्मरण करता है जो उन्होंने त्रेतायुग में प्रभु श्री राम के लिए किए थे। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरि पर्वत उठा लाना, माता सीता की खोज करना और राम-लक्ष्मण को अपने कंधों पर बिठाना—ये सभी प्रसंग हनुमान जी की असीम शक्ति और अटूट स्वामी-भक्ति को दर्शाते हैं। अंत में, भक्त प्रार्थना करता है कि हे अतुलित बल के धाम और निष्काम रामभक्त! मैं आपकी शरण में हूँ, मेरी लाज रखिए और इस संसार रूपी भवसागर के संकटों से मुझे पार लगाइए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली प्रार्थना है जो साधक के मन को एकाग्र करती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भय और चिंता से मुक्ति: इस भजन के नियमित पाठ से मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन भक्त को अहंकार त्यागकर ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • संकटमोचन स्वरूप का स्मरण: हनुमान जी के संकटमोचन स्वरूप का ध्यान करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही दूर होने लगती हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इसके शब्दों में निहित ध्वनि तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं और घर में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के भजन के लिए हर समय शुभ होता है, परंतु हनुमान जी की आराधना के लिए कुछ विशेष नियम और समय अत्यधिक फलदायी माने गए हैं:

  • शुभ दिन: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्याकाल में हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर इस भजन का गायन करना चाहिए।
  • विधि: लाल रंग के आसन पर बैठकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शांत मन से भजन का पाठ करें। पाठ के पूर्व प्रभु श्री राम और माता सीता का स्मरण अवश्य करें, क्योंकि हनुमान जी राम नाम के संकीर्तन से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार, माता अंजनी और केसरी के पुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को चिरंजीवी माना गया है, अर्थात वे आज भी इस पृथ्वी पर सशरीर उपस्थित हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। इस भजन में प्रभु श्री राम, लक्ष्मण जी और माता सीता का भी दिव्य उल्लेख आता है, जो यह दर्शाता है कि हनुमान जी की भक्ति का मार्ग राम-भक्ति से होकर ही गुजरता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक भक्ति काव्य परंपरा का हिस्सा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में संतों और कवियों ने हनुमान जी की महिमा का गान करने के लिए अनेक पदों की रचना की। "हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन" भजन की पृष्ठभूमि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ के प्रसंगों से प्रेरित है। इसमें हनुमान जी के उन पराक्रमों का वर्णन है जो उन्होंने राम-रावण युद्ध और माता सीता की खोज के दौरान किए थे।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और संस्कृत के तत्सम शब्दों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली गेय है, जिसे किसी भी शास्त्रीय या सुगम संगीत के राग में आसानी से गाया जा सकता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसके सौंदर्य को और अधिक बढ़ा देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • निष्काम सेवा: हनुमान जी की तरह बिना किसी फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
  • अटूट विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आराध्य पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  • समर्पण और विनम्रता: असीम शक्ति के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी में जो विनम्रता थी, उसे हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ एवं महत्व
मारुति नन्दन पवन देव के पुत्र (हनुमान जी) हनुमान जी के तेज और गति का प्रतीक।
दुःख भंजन कष्टों और दुखों का नाश करने वाले भक्तों के संकटों को दूर करने वाला स्वरूप।
अष्ट सिद्धि आठ प्रकार की अलौकिक शक्तियां अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व।
नव निधि नौ प्रकार के दिव्य खजाने कुबेर के नौ दिव्य खजाने जो समृद्धि प्रदान करते हैं।
निष्काम बिना किसी स्वार्थ या फल की इच्छा के हनुमान जी की निस्वार्थ राम-भक्ति का सूचक।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन, सुन लो मेरी पुकार। पवन सुत विनती बारम्बार॥"
हे पवनपुत्र, दुखों का नाश करने वाले हनुमान जी! आप मेरी करुण पुकार सुन लीजिए। मैं आपके चरणों में बार-बार प्रार्थना कर रहा हूँ कि मेरे जीवन के कष्टों का निवारण करें।

२. "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुःख हरन दास के भाग्य विधाता।"
आप माता जानकी के आशीर्वाद से आठों सिद्धियों और नौ निधियों को देने की सामर्थ्य रखते हैं। आप अपने सेवकों के दुखों को हरकर उनके सोए हुए भाग्य को जगाने वाले हैं।

३. "लक्ष्मण के जब प्राण उबारे, द्रोणागिरि सब पर्वत लाए।"
जब युद्ध भूमि में लक्ष्मण जी मूर्छित हुए, तब आपने संजीवनी बूटी की पहचान न होने पर पूरा द्रोणागिरि पर्वत ही उठाकर ले आए और उनके प्राणों की रक्षा की।

४. "राम लखन को गोद बिठाए, सीता मैया की सुध लाए।"
आपने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी को अत्यंत प्रेम से अपनी गोद (कंधों) पर बिठाया और अथाह समुद्र को लांघकर लंका जाकर माता सीता का पता लगाया।

५. "अतुलित बल के धाम हो तुम, राम भक्त निष्काम हो तुम।"
आपकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है, आप असीम बल के स्वामी हैं। इसके बावजूद आपके भीतर कोई अहंकार नहीं है और आप प्रभु श्री राम के परम निष्काम भक्त हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ हनुमान जी के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ: मन के समान गति वाले, पवन देव के समान वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर सेना के नायक श्रीरामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हे दु:ख भंजन मारुति नन्दन (He Dukh Bhanjan Maruti Nandan)
आराध्य देव श्री हनुमान जी (Shri Hanuman)
मुख्य विषय संकट निवारण, शरणागति, बल और बुद्धि की प्रार्थना
भक्ति भाव दास्य भाव, करुणा, समर्पण (Bhakti Bhava)
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर मंगलवार पूजा, शनिवार व्रत, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ के उपरांत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के मन से भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर उसमें आत्मविश्वास, साहस और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संचार करना है।

हनुमान जी की आराधना के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से समर्पित है। इन दिनों में इस भजन का पाठ करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, महिलाएं पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस भजन का गायन और श्रवण कर सकती हैं। हनुमान जी भाव के भूखे हैं, वे सच्चे मन से की गई हर पुकार सुनते हैं।

अष्ट सिद्धि आठ प्रकार की योगिक शक्तियां हैं और नव निधि कुबेर के नौ दिव्य खजाने हैं। माता सीता ने हनुमान जी को वरदान दिया था कि वे जिसे चाहें ये सिद्धियां और निधियां प्रदान कर सकते हैं।

भजन गाते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि यह दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, पारंपरिक हनुमान भजनों और संतों के विचारों के गहन विश्लेषण के आधार पर तैयार किया गया है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के हृदय में ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम और विश्वास को जाग्रत करती है। यह सामग्री पाठकों के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - भक्तिलोक संपादकीय मंडल।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण: सुंदरकांड एवं युद्धकांड के प्रसंग।
  • श्रीरामचरितमानस: गोस्वामी तुलसीदास कृत (किष्किंधा एवं सुंदरकांड)।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: सनातन भक्ति संगीत परंपरा।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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