Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमान जी भजन (Hanuman Bhajan) - Balaji Bhajan New Hanuman Ji Bhajan

पढ़ें हनुमान जी भजन (Hanuman Bhajan) - Balaji Bhajan New Hanuman Ji Bhajan - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मि

Balaji Bhajan New Hanuman Ji Bhajan

अद्यतन तिथि: २०२६ | श्रेणी: श्री हनुमान भजन | वाचन समय: १२ मिनट

हनुमान जी की असीम कृपा और उनकी महिमा का गान करने वाले पावन भजनों की श्रृंखला में "हनुमान जी भजन (Hanuman Bhajan) - Balaji Bhajan New Hanuman Ji Bhajan" एक अत्यंत ऊर्जावान, भावपूर्ण और संकटमोचन स्तुति है। सनातन भक्ति परंपरा में संकटों, बाधाओं, भय और नकारात्मक ऊर्जा के निवारण हेतु पवनसुत हनुमान जी का स्मरण सर्वोपरि माना गया है। इस नए और आधुनिक शैली से सुसज्जित भजन में रामभक्त हनुमान के अतुलित बल, उनके अगाध समर्पण, और श्रीराम के चरणों में उनकी अनन्य प्रीति का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है। जब भक्त जीवन के किसी भी पड़ाव पर कठिनाइयों, विपत्तियों या मानसिक संताप का सामना कर रहा होता है, तब ऐसे दिव्य भजन न केवल मन को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि साधक के भीतर अदम्य साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। इस लेख में हम इस नवीन हनुमान भजन के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ, गायन की विधि, और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।


सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री हनुमान भजन - संपूर्ण बोल

स्थायी (मखड़ा):

संकट मोचन कृपा निधान, हनुमान, मेरे संकट हरो हनुमान!
बालाजी सरकार तुम्हारी महिमा गावे सारा संसार,
राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र महा सुख नामा!


अंतरा 1:

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु धरि सुधार,
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि प्रकार।
हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ साजे,
शंकरावन सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन।


अंतरा 2:

विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर,
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, विकट रूप धरि लंका जरावा,
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे।


अंतरा 3:

लाय संजीवनी लखन जियाए, श्री रघुवीर हरषि उर लाए,
रघुपति की बहुत बड़ाई की, तुम मम प्रिय भरत सम भाई।
सहस बदन तुमरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं,
सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।


समापन / अंत:

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्ध साखी गौरीसा,
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मंह डेरा!
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप,
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहू सुर भूप!
जय बजरंगबली! जय बालाजी महाराज!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस नवीन हनुमान भजन का आंतरिक भाव साधक को भगवान श्रीराम और हनुमान जी के अटूट संबंध से जोड़ता है। भजन के मुखड़े में ही हनुमान जी को 'संकट मोचन' और 'कृपा निधान' कहकर संबोधित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति असीम कृपा के सागर हैं और भक्तों के सभी प्रकार के दुखों को हरने में समर्थ हैं, वे ही हमारे संकटों का भी निवारण करेंगे।

भजन की पंक्तियों में तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहों और चौपाइयों का अत्यंत सुंदर सम्मिश्रण किया गया है। 'राम दूत अतुलित बल धामा' इस बात का प्रतीक है कि हनुमान जी में संसार की समस्त शक्तियों का वास है, परंतु उनका संपूर्ण बल और पराक्रम केवल और केवल प्रभु श्री राम की सेवा के लिए समर्पित है। जब भक्त इस भजन का गायन करता है, तो उसके मन का अहंकार स्वतः समाप्त होने लगता है क्योंकि वह यह समझ जाता है कि बल और बुद्धि का वास्तविक उपयोग दीन-दुखियों की सेवा और प्रभु भक्ति में ही है। बालाजी महाराज के दरबार में जाति, भेद, और संताप से परे होकर जो भी शरण में आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन आधुनिक संगीत शैलियों और पारंपरिक वैदिक भक्ति भाव का एक अद्भुत संगम है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • संकट नाशक प्रभाव: भजन के नियमित श्रवण या गायन से भय, अज्ञात चिंता, और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • भक्ति और शक्ति का समन्वय: यह गीत साधक के भीतर आत्मबल, निर्भीकता और सेवाभाव को जाग्रत करता है।
  • बालाजी स्वरूप की वंदना: राजस्थान के मेहंदीपुर और सालासर तथा देश के समस्त बालाजी मंदिरों की ऊर्जा को यह भजन जीवंत करता है।
  • सार्वभौमिक स्वीकार्यता: सरल और स्पष्ट हिंदी-अवधी शब्दों के प्रयोग के कारण इसे हर आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

हनुमान जी के भजनों का गायन और श्रवण करने के लिए कुछ विशेष समय और नियमों का पालन करने से आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है:

  1. ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल: प्रातः काल स्नान के पश्चात लाल वस्त्र धारण करके या संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  2. मंगलवार और शनिवार: इन दोनों दिनों को हनुमान जी और बालाजी महाराज की विशेष पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन सामूहिक सत्संग या मंदिर में इस भजन का गान विशेष रूप से करना चाहिए।
  3. नियम और पवित्रता: भजन गाते समय मन में शुद्धता, सात्विक विचार और हनुमान जी के प्रति अगाध विश्वास होना अनिवार्य है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य संकटमोचन महाबली हनुमान (बालाजी महाराज) हैं, जो भगवान श्रीराम के परम भक्त और शिवजी के रुद्रा अवतार माने जाते हैं। इसके साथ ही इस रचना में गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति परंपरा की झलक मिलती है, जिन्होंने हनुमान चालीसा और संकटमोचन स्तोत्र के माध्यम से भारतीय जनमानस को भयमुक्त होने का मार्ग दिखाया। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्मरण के बिना हनुमान जी की आराधना पूर्ण नहीं मानी जाती, इसलिए इस भजन में त्रयूरि का सुंदर समायोजन है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारा विस्तृत लेख श्री हनुमान चालीसा का पाठ और महत्व पढ़ सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

समकालीन भक्ति संगीत में 'बालाजी भजन' और 'न्यू हनुमान भजन' की मांग लगातार बढ़ रही है। नई पीढ़ी के भक्तों को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण से इन भजनों की रचना की जाती है। यह भजन उन भक्तों की प्रेरणा से रचित है जो अपने दैनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक अवसाद से मुक्ति पाने के लिए वीर हनुमान की शरण में आते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल अवधी मिश्रित हिंदी और ब्रजभाषा के शब्दों से सुसज्जित है। इसमें अनुप्रास और रुचक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। पद-विन्यास ऐसा है कि गीत गाते ही लयबद्धता और ताल का स्वतः अनुभव होने लगता है, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समर्पण ही शक्ति है: हनुमान जी यह सिखाते हैं कि जब हम पूर्ण रूप से ईश्वर को समर्पित हो जाते हैं, तब बड़े से बड़े संकट भी धूल समान हो जाते हैं।
  • निःस्वार्थ सेवा: बिना किसी फल की अपेक्षा के दूसरों की सहायता करना ही सबसे बड़ी हनुमान भक्ति है।
  • अहंकार का त्याग: अतुलित बल होने के बावजूद अत्यधिक विनम्र रहना एक सच्चे भक्त की पहचान है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
संकट मोचन कष्टों और विपत्तियों को दूर करने वाला भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के दुखों का नाश करने वाले हनुमान जी।
अतुल्जित बल धामा जिसके बल की कोई तुलना न हो, शक्ति का भंडार असीम और अनंत पराक्रम के स्वामी पवनसुत।
मुकुरु दर्पण या शीशा अज्ञान रूपी धूल से ढके मन को स्वच्छ करने का माध्यम (मन मुकुरु धरि)।
केसरी नंदन महाराज केसरी के पुत्र हनुमान जी का पारिवारिक और पौराणिक परिचय।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक को आंतरिक ऊर्जा प्रदान करती है। जब हम गाते हैं "हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे", तो इसका अर्थ है कि हनुमान जी के एक हाथ में वज्र और दूसरे में गदा व विजय पताका है जो धर्म की रक्षा करती है। इसी प्रकार "विद्यावान गुणी अति चातुर" यह दर्शाता है कि वे केवल बलशाली ही नहीं, बल्कि अगाध ज्ञान, नीति और चातुर्य के भी प्रतीक हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भजन गायन के पश्चात निम्नलिखित मंत्र का स्मरण अवश्य करना चाहिए:

ॐ अं अंजनेय्या विद्महे वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो मारुति प्रचोदयात्॥

मनोकामना पूर्ति और संकट निवारण हेतु हनुमान गायत्री मंत्र

आप हमारे अन्य लेख जैसे सुंदरकांड पाठ के लाभ और विधि का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नामहनुमान जी भजन (Balaji Bhajan New)
आराध्य देवतासंकटमोचन श्री हनुमान जी / बालाजी महाराज
भाषाहिंदी, अवधी एवं ब्रज मिश्रित
मुख्य विषयसंकट निवारण, भक्ति, शक्ति एवं शरणागति
मुख्य भाव (Bhava)वीर रस, भक्ति, समर्पण और विनय
उपयुक्त अवसरमंगलवार, शनिवार, जागरण, हनुमान जयंती, नियमित पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, घर में नए कार्य की शुरुआत, जागरण, अथवा जब भी आपको जीवन में मानसिक तनाव या संकट महसूस हो, तब अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

कोई अंतर नहीं है। हनुमान जी के बाल स्वरूप या विशेष चमत्कारी एवं संकटमोचन स्वरूप को राजस्थान और उत्तर भारत में आदरपूर्वक 'बालाजी महाराज' कहा जाता है।

हाँ, हनुमान जी की भक्ति पर सभी का अधिकार है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही इस भजन का सस्वर पाठ कर सकते हैं, बशर्ते मन में पवित्रता और अनुशासन बना रहे।

इसके श्रवण से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, भय का नाश होता है और साधक को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा, सिंदूर अर्पण और भजन-कीर्तन के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

निश्चित रूप से! ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और झांझ के साथ इस भजन को गाने से वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा और अधिक प्रगाढ़ होती है।

हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, गुड़-चने और पान का बीड़ा अत्यंत प्रिय है।

हाँ, भक्तलोक (Bhaktilok) पर आपको इसके संपूर्ण लिरिक्स लिखित रूप में मिलते हैं, जिन्हें आप पढ़कर या अपने सत्संग में गाकर लाभ उठा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन परंपरा, हनुमान भक्ति साहित्य और लोकगीतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स और उनके आध्यात्मिक भावार्थ से अवगत कराना है ताकि वे अपनी दैनिक पूजा-आराधना को अधिक सार्थक बना सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी (किष्किंधा एवं सुंदरकांड खंड)
  • हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन स्तोत्र - पारंपरिक ग्रंथ
  • भारतीय लोक भक्ति संगीत परंपरा एवं बालाजी संकीर्तन संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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