Subhash Bedardi Chhath Puja Song Anjali Yadav - Bhaktilok
प्रस्तुति: संपादन कक्ष एवं सांस्कृतिक अनुसंधान दल, Bhaktilok.in | अद्यतन संस्करण: 2026
लोक आस्था, प्रकृति की उपासना और अटूट समर्पण के महापर्व छठ की महिमा का गुणगान करने वाले भोजपुरी भक्ति गीतों में 'छठी माई पूरब ओरिया' एक अत्यंत ही कर्णप्रिय, भावपूर्ण और ऊर्जावान रचना है। लोकप्रिय गायक सुभाष बेदर्दी (Subhash Bedardi) और अंजलि यादव (Anjali Yadav) के स्वर से सजे इस पावन छठ गीत ने पूर्वांचल और संपूर्ण भारतवर्ष के लोक-मानस में अपनी एक विशिष्ट जगह बनाई है। सूर्य देव और छठी मैया (माता षष्ठी) की आराधना को समर्पित यह गीत उस सात्विक और पवित्र वातावरण को जीवंत करता है, जहां व्रती महिलाएं नदी के घाटों पर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए लालायित रहती हैं। 'तरंग म्यूजिक' (Tarang Music) के बैनर तले प्रस्तुत यह भजन न केवल संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि लोक संस्कृति की उस प्राचीन धारा से भी जोड़ता है जहां प्रकृति ही हमारा सर्वस्व है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, भावार्थ, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और छठ पर्व के आध्यात्मिक महत्व का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
भजन एवं गीत के शुद्ध देवनागरी बोल, जो छठ घाटों पर और घरों में निरंतर गूंजते रहते हैं:
॥ मुखड़ा ॥
छठी माई पूरब ओरिया सजवले बिया बरतिया,
आईहें छठी मईया घरे मोरे ललकि जनमनिया।
उगs हे सुरुज भगवान, करेली तोहरे अरगनिया,
सुनिहें छठी माई मोर अरजिया...!
॥ अंतरा १ ॥
घाटवा पर लागेला भीड़ भारी रे भैया,
दर्शन पावे खातिर तरसे नजरिया।
दउरा सजवले बिया हाथ में दियुरिया,
भक्ति में डूबल बाड़ै सभे गवरिया।
सुभाष-अंजलि के गिनल बानी सुरवलिया,
माई पूरा क दिहें मन के कवनिया!
॥ अंतरा २ ॥
नदिया के तीरे-तीरे गूंजे लेकिमनिया,
कोशिश कइल Tinku Tofaan सुर सजवनिया।
Rambabu Yadav के निर्देशन बा भइया,
Shivpujan editor कलईहें दुलरूवनियां।
रिमझिम बरसे ले आशीर्वाद धनियॉ,
छठी माई दीहें गोदिया में बालिकवनिया!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस गीत की पंक्तियां छठ महापर्व के उस अद्वितीय दृश्य का वर्णन करती हैं जहां पूरा समाज जाति, बंधन और वर्ग से ऊपर उठकर केवल मातृ-शक्ति और सूर्योपासना में लीन हो जाता है।
मुखड़ा का भाव: व्रती महिलाएं और उनके परिजन पूरी श्रद्धा के साथ पूर्व दिशा की ओर मुख करके छठी मैया के व्रत की वेदी को सजाते हैं। यह विश्वास व्यक्त किया जाता है कि छठी मैया अवश्य ही उनके द्वार पर पधारेंगी और उनके आंगन को प्रकाशमान करेंगी। उगते हुए सूर्य देव से यह प्रार्थना की जाती है कि वे व्रतियों का अर्घ्य स्वीकार करें और भक्तों की पुकार सुनें।
अंतरा का भाव: नदी के घाटों पर उमड़ने वाली अपार भीड़, हाथों में सजे बांस के सूप (दउरा) और दीपों की जगमगाहट लोक संस्कृति के सामूहिक उल्लास को दर्शाती है। संगीतकारों, निर्देशकों और कलाकारों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि लोक कला के जरिए जब ईश्वर की आराधना की जाती है, तो भक्त की झोली अवश्य भर जाती है। छठी मैया से संतान प्राप्ति, पारिवारिक सुख और आरोग्यता का आशीर्वाद मांगने का यह सबसे सुंदर और पारंपरिक माध्यम है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
'छठी माई पूरब ओरिया' गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह लोक आस्था की गहराई और कृतज्ञता का प्रतीक है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख संदेश मिलते हैं:
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य और जल, जो जीवन के आधार हैं, उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करना।
- पारिवारिक और सामाजिक सद्भाव: छठ पर्व पर पूरा परिवार मिलकर जिस प्रकार तैयारी करता है, वह आपसी एकजुटता का अनूठा उदाहरण है।
- अनन्य समर्पण: कठिन 36 घंटे के निर्जला व्रत और नियमों का पालन करते हुए छठी मैया के प्रति पूर्ण निष्ठा रखना।
गीत की तकनीकी एवं रचनात्मक जानकारी | Song Information
| गीत का नाम | छठी माई पूरब ओरिया (Chhathi Maai Purab Oriya) |
|---|---|
| मुख्य गायक | सुभाष बेदर्दी (Subhash Bedardi), अंजलि यादव (Anjali Yadav) |
| संगीतकार | टिंकू तूफान (Tinku Tofaan) |
| वीडियो निर्देशक | रामबाबू यादव (Rambabu Yadav) |
| संपादक (Editor) | शिवपूजन कुमार (Shivpujan Kumar) |
| कोरियोग्राफर | ऋतिक आरा (Ritik Ara) |
| रिकॉर्डिंग स्टूडियो | तरंग स्टूडियो, पटना (Tarang Studio, Patna) |
| निर्माता एवं निर्देशक | उमेश कुमार (Umesh Kumar) |
| संगीत लेबल | तरंग म्यूजिक (Tarang Music) |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| शैली | छठ पूजा लोक गीत / भक्ति गीत |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| पूरब ओरिया | पूर्व दिशा की ओर (जहां सूर्योदय होता है) | पूजा की दिशा और वेदी सज्जा |
| बरतिया | छठ का कठिन व्रत / अनुष्ठान | व्रती महिलाओं का संकल्प |
| अरगनिया | अर्घ्य देने की प्रक्रिया (जल अर्पित करना) | सूर्य देव की उपासना |
| दउरा | बांस से बना हुआ सूप या दपड़ा | पूजा सामग्री रखने का पारंपरिक पात्र |
| दियुरिया | मिट्टी का छोटा दीपक | घाट पर रोशनी और प्रकाश का प्रतीक |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति में एकमात्र ऐसा अनुष्ठान है जिसमें न केवल उगते हुए सूर्य की, बल्कि डूबते हुए सूर्य की भी पूजा की जाती है। यह इस दार्शनिक सत्य को रेखांकित करता है कि जो उदय हुआ है उसका अस्त होना निश्चित है, और जो अस्त हुआ है उसका पुनः उदय होना भी उतना ही शाश्वत है।
'छठी माई पूरब ओरिया' जैसे गीत इसी सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाते हैं। जब ग्रामीण और शहरी परिवेश में महिलाएं नदी के तट पर इस प्रकार के मधुर लोकगीत गाती हैं, तो पूरा वातावरण दिव्यता से भर जाता है। यह संगीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं से जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम है। छठी मैया को प्रकृति की देवी और भगवान सूर्य की बहन (या शक्ति) के रूप में पूजा जाता है, जो संतान को दीर्घायु, आरोग्यता और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
इस प्रकार के पावन छठ गीतों को सुनने और गाने के विशिष्ट अवसर निम्नलिखित हैं:
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी (छठ पर्व के दौरान): नहाय-खाय से लेकर उद्योगामी सूर्य को अर्घ्य देने तक के चार दिनों के अनुष्ठान में।
- नदी घाटों और तालाबों पर: जब व्रती महिलाएं और उनके परिजन अर्घ्य देने के लिए मार्ग तय करते हैं।
- सांस्कृतिक आयोजनों एवं मेलों में: भोजपुरी लोक संस्कृति से जुड़े मंचों और उत्सवों पर।
- दैनिक साधना काल में: चैत्र या कार्तिक मास के छठ व्रतों की तैयारी के समय घरों में प्रातर्समय।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख सांस्कृतिक धरोहर और लोक संगीत के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रस्तुत गीत के बोल, कलाकारों के नाम तथा तकनीकी विवरण 'तरंग म्यूजिक' के आधिकारिक प्रकाशन और लोक संगीत परंपराओं पर आधारित हैं। Bhaktilok.in का उद्देश्य सनातन संस्कृति और लोक पर्वों की पावन परंपरा को पाठकों तक प्रामाणिक रूप से पहुंचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References)
- पारंपरिक भोजपुरी लोक गीत संग्रह एवं छठ पूजा अनुष्ठान परंपराएं।
- तरंग म्यूजिक ऑफिशियल ऑडियो/वीडियो आर्काइव, पटना।
- पूर्वांचल की लोक संस्कृति और सूर्योपासना के ऐतिहासिक दस्तावेज।
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