कलयुग के जाग्रत देव, संकटमोचन श्री हनुमान जी महाराज की आराधना में गाया जाने वाला भजन "सुख इतना नहीं देना हनुमत (Sukh Itna Nahi Dena Hanumat)" भक्ति, समर्पण और जीवन के परम सत्य को उजागर करने वाली एक अद्भुत रचना है। सुप्रसिद्ध गायिका पामेला जैन (Pamela Jain) के सुमधुर स्वर, शार्दुल राठौड़ के मर्मस्पर्शी शब्द और सैमुअल पॉल के दिव्य संगीत से सजे इस भजन का मुख्य भाव 'समत्व' (Equanimity) है। यह भजन साधक को सिखाता है कि जीवन में अत्यधिक सुख मनुष्य के भीतर अहंकार और ईश्वर के प्रति विस्मृति पैदा कर सकता है, जबकि अत्यधिक दुख उसे हताशा की ओर ले जा सकता है। इसलिए, एक सच्चा भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि उसे जीवन में ऐसा संतुलन प्रदान करें जिससे वह हर परिस्थिति में प्रभु के चरणों से जुड़ा रहे। यह भजन श्रीमद्भगवद्गीता के 'समत्वं योग उच्यते' के सिद्धांत को अत्यंत सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ सुख इतना नहीं देना हनुमत ॥
मुखड़ा:
सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं।
दुख इतना भी मत देना बाबा, कि मैं घबरा जाऊं मैं॥
सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं...
अंतरा 1:
सुख में तो सब हंसते गाते, दुख में आंसू बहते हैं।
जो दोनों में समता रखे, उसे ही ज्ञानी कहते हैं॥
ऐसी मति देना हनुमत, कि धीरज न गंवाऊं मैं।
सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं...
अंतरा 2:
धन दौलत का मोह न होवे, मन में कोई लोभ न हो।
तेरी भक्ति ही मेरी पूंजी, और कोई चाह न हो॥
चरणों की सेवा मिल जाए, तो भव से तर जाऊं मैं।
सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं...
अंतरा 3:
संकट मोचन नाम तुम्हारा, संकट सबके हरते हो।
दीन दुखी और निर्बल जन पर, कृपा सदा ही करते हो॥
तेरे दर पे शीश झुकाकर, जीवन सफल बनाऊं मैं।
सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं।
दुख इतना भी मत देना बाबा, कि मैं घबरा जाऊं मैं॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और दार्शनिक है। यह केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि मानव मन की चंचलता और आध्यात्मिक साधना की व्यावहारिक समझ का दस्तावेज है।
सुख और दुख का संतुलन: भजन की शुरुआत में ही भक्त अपने आराध्य श्री हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि हे पवनपुत्र! मुझे इतना भौतिक सुख और ऐश्वर्य मत देना कि मैं मदमस्त होकर आपको ही भूल जाऊं। सांसारिक सुखों की यह विशेषता है कि वे मनुष्य की चेतना को ढक देते हैं और उसे भ्रम में डाल देते हैं कि वह स्वयं ही सब कुछ कर रहा है। इसके विपरीत, भक्त यह भी प्रार्थना करता है कि मुझे इतना अधिक दुख भी मत देना कि मेरा धैर्य टूट जाए और मैं घबराकर अपना मानसिक संतुलन खो बैठूं। यह प्रार्थना जीवन में 'मध्यम मार्ग' या 'संतुलन' की मांग करती है।
समता का संदेश: भजन का पहला अंतरा जीवन के सबसे बड़े सत्य की ओर संकेत करता है। सुख में हंसना और दुख में रोना तो सामान्य मानवीय स्वभाव है, परंतु जो व्यक्ति इन दोनों ही परिस्थितियों में समान रहता है, वही वास्तव में ज्ञानी और योगी है। भक्त हनुमान जी से ऐसी बुद्धि (मति) मांगता है जिससे वह विचलित न हो।
निष्काम भक्ति की कामना: दूसरे अंतरे में भक्त धन-दौलत और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति की कामना करता है। वह हनुमान जी की भक्ति को ही अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानता है। उसकी एकमात्र इच्छा प्रभु के चरणों की सेवा प्राप्त करना है, जिससे वह इस संसार रूपी सागर (भवसागर) को पार कर सके।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन आधुनिक युग में मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समत्व भाव की जागृति: यह भजन साधक को सुख और दुख दोनों में समभाव रखने की प्रेरणा देता है, जो कि हिंदू दर्शन का मूल आधार है।
- अहंकार का शमन: जब हम हनुमान जी से प्रार्थना करते हैं कि हमें अत्यधिक सुख न दें, तो यह हमारे भीतर के संभावित अहंकार को समाप्त करता है।
- आत्मसमर्पण (शरणागति): भजन की प्रत्येक पंक्ति में हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव झलकता है। भक्त अपनी बुद्धि और सामर्थ्य को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है।
- मानसिक तनाव से मुक्ति: आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में, जहां लोग सुख की अंधी दौड़ में भाग रहे हैं और दुख आने पर अवसाद में चले जाते हैं, यह भजन एक मानसिक संबल प्रदान करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए सभी समय शुभ हैं, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:
- साप्ताहिक पूजा: प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा के समय इस भजन का गायन करना चाहिए।
- संध्या काल की प्रार्थना: शाम के समय जब घर में दीपक जलाया जाता है, तब शांत मन से इस भजन को सुनने या गाने से दिनभर का मानसिक तनाव दूर होता है।
- हनुमान जन्मोत्सव: हनुमान जयंती के पावन अवसर पर सामूहिक संकीर्तन में इस भजन को शामिल करने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
- गायन की विधि: इस भजन को गाते समय हाथ जोड़कर, नेत्र बंद करके हनुमान जी के विग्रह का ध्यान करना चाहिए। गायन में करुणा और समर्पण का भाव होना अनिवार्य है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार, माता अंजनी के लाल और प्रभु श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या, और अतुलित शक्ति के दाता हैं, परंतु उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी विनम्रता और दासभाव भक्ति है।
इस भजन का दर्शन गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा और संकटमोचन हनुमानाष्टक के विचारों से मेल खाता है। तुलसीदास जी ने भी हनुमान जी को 'संकट मोचन' कहा है, जो भक्तों के सभी कष्टों को क्षणभर में दूर कर देते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक काल की एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण रचना है। इसकी पृष्ठभूमि और निर्माण से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- स्वर (Singer): इस भजन को अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से सजाया है सुप्रसिद्ध गायिका पामेला जैन (Pamela Jain) ने। उनकी आवाज में जो करुणा और समर्पण है, वह सीधे श्रोता के हृदय को छू लेता है।
- गीतकार (Lyricist): इस भजन के गहरे और दार्शनिक शब्दों को शार्दुल राठौड़ (Shardul Rathod) ने लिखा है। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में जीवन के सबसे कठिन दर्शन को पिरोया है।
- संगीत (Music): इसका सुमधुर संगीत सैमुअल पॉल (Samuel Paul) द्वारा तैयार किया गया है, जो भजन के शांत और भक्तिमय रस को और अधिक सघन बनाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और तत्सम शब्दों का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली 'प्रार्थना गीत' या 'विनय के पद' जैसी है।
भजन में प्रयुक्त बिंब और रूपक अत्यंत प्रभावशाली हैं। जैसे 'भक्ति को पूंजी' बताना और 'चरणों की सेवा से भव तर जाना' सनातन काव्य परंपरा के पारंपरिक और अत्यंत प्रिय रूपक हैं। भजन की लयबद्धता और छंद योजना ऐसी है कि इसे कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से गुनगुना सकता है और कंठस्थ कर सकता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। इससे मिलने वाली मुख्य सीखें इस प्रकार हैं:
- संतुलित जीवन (Balanced Life): जीवन में न तो सुख स्थायी है और न ही दुख। इसलिए दोनों ही स्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
- अहंकार से दूरी: भौतिक समृद्धि अक्सर मनुष्य को अहंकारी बना देती है। हमें सदैव याद रखना चाहिए कि सब कुछ ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त हुआ है।
- धैर्य (Patience): कठिन समय में घबराने के बजाय ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए और धैर्यपूर्वक संकट के टलने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
- सच्ची पूंजी: सांसारिक धन-दौलत यहीं छूट जाएगी, केवल ईश्वर की भक्ति और हमारे द्वारा किए गए सत्कर्म ही हमारे साथ जाएंगे।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| हनुमत / बाबा | श्री हनुमान जी महाराज | भक्तों के रक्षक और संकटमोचन देव। |
| समता | समानता, एक जैसा भाव रखना | सुख और दुख में विचलित न होने की मानसिक स्थिति। |
| मति | बुद्धि, विचार शक्ति | सद्बुद्धि जो सन्मार्ग पर ले जाती है। |
| धीरज | धैर्य, सहनशीलता | विपत्ति के समय मन को शांत रखने का गुण। |
| पूंजी | धन, संचित संपत्ति | भक्ति रूपी वास्तविक धन जो जन्म-जन्मांतर तक साथ रहता है। |
| भव | संसार, जन्म-मरण का चक्र | सांसारिक मायाजाल जिससे मुक्त होना मोक्ष है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
आइए इस पावन भजन की प्रत्येक पंक्ति के गहरे अर्थ को समझें:
"सुख इतना नहीं देना हनुमत, कि तुमको भूल जाऊं मैं।"
हे हनुमान जी! मुझे जीवन में इतनी अधिक सुख-सुविधाएं और विलासिता मत देना कि मैं उनके उपभोग में इतना लीन हो जाऊं कि आपके नाम का स्मरण करना ही भूल जाऊं। क्योंकि जो सुख ईश्वर से दूर कर दे, वह वास्तव में सुख नहीं, बल्कि सबसे बड़ा दुख है।
"दुख इतना भी मत देना बाबा, कि मैं घबरा जाऊं मैं।"
इसके साथ ही, हे प्रभु! मुझ पर इतने भारी कष्ट और दुख भी मत डालना कि मेरा विश्वास डगमगा जाए और मैं घबराहट में आकर अधर्म के मार्ग पर चल पड़ूं या हताश हो जाऊं। मुझे सहने की शक्ति देना।
"सुख में तो सब हंसते गाते, दुख में आंसू बहते हैं। जो दोनों में समता रखे, उसे ही ज्ञानी कहते हैं।"
संसार का यह नियम है कि अच्छे समय में सभी खुशियां मनाते हैं और बुरा समय आने पर रोते हैं। परंतु वास्तविक ज्ञानी और संत पुरुष वही है जो सुख में हर्षित नहीं होता और दुख में उद्विग्न नहीं होता।
"ऐसी मति देना हनुमत, कि धीरज न गंवाऊं मैं।"
हे अंजनीपुत्र! मुझे ऐसी दिव्य बुद्धि प्रदान करें कि विपरीत परिस्थितियों में भी मेरा धैर्य बना रहे और मैं धर्म के मार्ग से विचलित न होऊं।
"धन दौलत का मोह न होवे, मन में कोई लोभ न हो। तेरी भक्ति ही मेरी पूंजी, और कोई चाह न हो।"
मेरे मन में कभी भी भौतिक संपदा को इकट्ठा करने का लालच न आए। मेरी सबसे बड़ी और एकमात्र संपत्ति आपकी अनन्य भक्ति ही हो। इसके अलावा मेरी कोई अन्य सांसारिक इच्छा न रहे।
"चरणों की सेवा मिल जाए, तो भव से तर जाऊं मैं।"
यदि मुझे आपके श्रीचरणों की नित्य सेवा और सानिध्य प्राप्त हो जाए, तो मैं इस संसार रूपी कठिन सागर को आसानी से पार कर मोक्ष को प्राप्त कर लूंगा।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के समत्व और शरणागति के भाव को पुष्ट करने वाले कुछ पावन मंत्र और श्लोक इस प्रकार हैं, जिनका पाठ भजन के साथ करना अत्यंत कल्याणकारी होता है:
श्रीमद्भगवद्गीता से समत्व श्लोक (अध्याय 2, श्लोक 56):
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते॥
अर्थ: दुखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में जिसकी स्पृहा (लालसा) दूर हो गई है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गए हैं, ऐसा मुनि स्थिर बुद्धि कहा जाता है।
हनुमान गायत्री मंत्र:
ॐ अंजनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सुख इतना नहीं देना हनुमत (Sukh Itna Nahi Dena Hanumat) |
| समर्पित देव | श्री हनुमान जी महाराज (संकटमोचन) |
| गायिका (Singer) | पामेला जैन (Pamela Jain) |
| गीतकार (Lyricist) | शार्दुल राठौड़ (Shardul Rathod) |
| संगीतकार (Composer) | सैमुअल पॉल (Samuel Paul) |
| मुख्य भाव (Bhava) | समर्पण, समत्व, विनय, निष्काम भक्ति |
| भाषा (Language) | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| गायन का सर्वोत्तम समय | मंगलवार, शनिवार, संध्या काल, हनुमान जन्मोत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "सुख इतना नहीं देना हनुमत" भजन के आध्यात्मिक, दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत, इस भजन के मूल पाठ को शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है और इसके पीछे छिपे समत्व योग के संदेश को रेखांकित किया गया है। यह भजन आज के समाज के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है, जो हमें भौतिकता की अंधी दौड़ से बचाकर वास्तविक आध्यात्मिक सुख की ओर ले जाता है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता (समत्व योग और बुद्धि योग के प्रसंग)
- श्रीरामचरितमानस (सुंदरकांड एवं उत्तरकांड में वर्णित भक्ति के लक्षण)
- पारंपरिक हनुमान भक्ति साहित्य एवं संकीर्तन परंपरा
- पामेला जैन द्वारा गाए गए आधिकारिक भजन संग्रह
संबंधित भजन एवं लेख
हनुमान जी की भक्ति और कृपा प्राप्त करने के लिए आप निम्नलिखित पावन भजनों और स्तोत्रों का भी अध्ययन कर सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें