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एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि लिरिक्स (Ekadantaya vakratundaya by Suprabha KV lyrics in Hindi)

सुप्रभा केवी द्वारा गाये गए प्रसिद्ध गणेश भजन एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संपूर्ण बोल, अर्थ और महत्व सहित।

भगवान श्री गणेश की आराधना सनातन धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य के शुभारंभ का आधार है। "एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि" एक ऐसा दिव्य और ऊर्जावान भजन है, जो न केवल भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन करता है, बल्कि साधक के मन में भक्ति और एकाग्रता का संचार भी करता है। मूल रूप से यह स्तुति संस्कृत के अत्यंत प्रभावशाली श्लोकों पर आधारित है, जिसे सुप्रसिद्ध गायिका सुप्रभा केवी (Suprabha KV) ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाकर आधुनिक पीढ़ी के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है। इस भजन का गायन और श्रवण करने से मानसिक शांति, विघ्नों का नाश और बुद्धि का विकास होता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स, उनके विस्तृत भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ और इसके आध्यात्मिक महत्व पर गहराई से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि लिरिक्स


॥ मुख्य श्लोक एवं ध्रुवपद ॥
गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।
गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥

॥ अंतरा - १ (संगीत एवं कला) ॥
गानचतुराय गानप्राणाय गानान्तरात्मने।
गानोत्सुकाय गानमत्ताय गानोत्सुकमनसे।
गीतचरिताय गीतविचित्राय गीतप्रियाय धीमहि।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥

॥ अंतरा - २ (ज्ञान एवं ग्रंथ) ॥
ग्रन्थगीताय ग्रन्थकाराय ग्रन्थप्रायोजनकाय।
ग्रन्थश्रुताय ग्रन्थप्रियाय ग्रन्थादिमने।
ग्रन्थान्तरात्मने ग्रन्थविचित्राय ग्रन्थप्रियाय धीमहि।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥

॥ अंतरा - ३ (दिव्य स्वरूप) ॥
गीतप्रियाय गीतप्रमोदाय गन्धर्वललिताय।
गीतगुह्याय गीतानन्दाय गीतपरमसुखाय।
गीतज्ञानाय गीतविज्ञानाय गीतपरमार्थाय धीमहि।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान गणेश के विराट, गुणातीत और कलात्मक स्वरूप की वंदना करता है। यहाँ प्रत्येक पंक्ति का गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ प्रस्तुत किया जा रहा है:

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि

हम उन भगवान गणेश का ध्यान (धीमहि) करते हैं, जो सभी गणों के नायक (गणनायकाय) हैं, जो देवों के भी देवता (गणदेवताय) हैं और जो संपूर्ण सृष्टि के अध्यक्ष या स्वामी (गणाध्यक्षाय) हैं। यहाँ 'गण' का अर्थ केवल शिवजी के सेवक ही नहीं, बल्कि सृष्टि के समस्त तत्वों, इंद्रियों और मनुष्यों के समूह से भी है।

गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि

हम उन विघ्नहर्ता का ध्यान करते हैं, जिनका शरीर दिव्य गुणों से निर्मित है (गुणशरीराय), जो समस्त सत्व, रज और तम गुणों से सुशोभित हैं (गुणमण्डिताय) और जो इन सभी गुणों के ईश्वर या नियंत्रक हैं (गुणेशानाय)।

गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि

हम उन परमात्मा का ध्यान करते हैं, जो प्रकृति के तीनों गुणों से परे यानी गुणातीत हैं (गुणातीताय), जो गुणों के स्वामी हैं (गुणाधीशाय) और जो सृष्टि के प्रत्येक कण और जीव में अंतर्यामी रूप से प्रविष्ट हैं (गुणप्रविष्टाय)।

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि

हम उन गौरीपुत्र (गौरीतनयाय) का ध्यान करते हैं, जिनका एक दांत है (एकदंताय) और जिनकी सूंड घुमावदार या वक्र है (वक्रतुण्डाय)। यह स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में विषमताओं को स्वीकार करते हुए भी सीधे मार्ग पर कैसे चला जाए।

गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि

हम उन श्री गणेश का ध्यान करते हैं, जो हाथियों के राजा के समान विशाल बुद्धि वाले हैं (गजेशानाय) और जिनके मस्तक पर बालचंद्र यानी द्वितीया का चंद्रमा सुशोभित है (भालचन्द्राय), जो शीतलता और शांति का प्रतीक है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना पूर्ण शरणागति (समर्पण) और ध्यान (धीमहि) है। 'धीमहि' शब्द गायत्री मंत्र से लिया गया है, जिसका अर्थ है "हम ध्यान करते हैं" या "हम अपनी बुद्धि को उस परम सत्ता में लीन करते हैं"। यह भजन हमें संदेश देता है कि भगवान गणेश केवल विघ्नहर्ता ही नहीं हैं, बल्कि वे कला, संगीत, साहित्य, ज्ञान और विज्ञान के भी अधिष्ठाता देव हैं। जब हम इस भजन को गाते हैं, तो हमारा मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर ईश्वर की दिव्य चेतना में लीन होने लगता है। सुप्रभा केवी की प्रस्तुति में जो कोमलता और भक्ति का भाव है, वह साधक को अंतर्मुखी होने में सहायता करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
गीत का नाम एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि
गायिका (Singer) सुप्रभा केवी (Suprabha KV)
मूल संगीतकार शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan)
भाषा संस्कृत (Sanskrit)
मुख्य देवता भगवान श्री गणेश (Lord Ganesha)
भक्ति भाव (Bhava) समर्पण, ध्यान, शांति और कलात्मक वंदना
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, सुबह की प्रार्थना, दैनिक पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत की मूल रचना और गायन भारतीय संगीत जगत के दिग्गज कलाकार शंकर महादेवन द्वारा किया गया था। उनके द्वारा गाए गए इस गीत ने पूरे देश में भक्ति की एक नई लहर पैदा की थी। वर्तमान समय में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र कलाकारों ने इसे अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया है। सुप्रभा केवी (Suprabha KV) ने इस पारंपरिक और शास्त्रीय गीत को एक बहुत ही सौम्य, मधुर और आधुनिक ध्वनिक (Acoustic) रूप दिया है। उनके इस संस्करण को युवाओं द्वारा अत्यधिक पसंद किया गया है, क्योंकि यह मन को शांत करने वाला और ध्यान केंद्रित करने में सहायक है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Sanskrit Word) सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
धीमहि (Dheemahi) हम ध्यान करते हैं / बुद्धि लगाते हैं गायत्री मंत्र से प्रेरित, ध्यान की पराकाष्ठा
गौरीतनयाय (Gauritanayaya) माता पार्वती (गौरी) के पुत्र मातृ-पितृ भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण
गुणातीताय (Gunateetaya) तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) से परे परब्रह्म का निराकार और निर्गुण स्वरूप
भालचन्द्राय (Bhalachandraya) मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले मानसिक शांति और शीतलता के प्रदाता
ग्रन्थादिमने (Granthadimane) ग्रंथों के आदि पुरुष या रचयिता ज्ञान और बुद्धि के आदि स्रोत
गानमत्ताय (Ganamattaya) संगीत के रस में मग्न रहने वाले कला और नादब्रह्म के साक्षात स्वरूप

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन संस्कृति में भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' माना गया है। किसी भी पूजा, यज्ञ, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले गणेश जी की आराधना अनिवार्य है। "एकदंताय वक्रतुण्डाय" भजन का सांस्कृतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह शास्त्रीय संस्कृत भाषा को अत्यंत सरल और संगीतमय तरीके से जन-जन तक पहुंचाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, इस भजन में प्रयुक्त शब्द 'धीमहि' साधक की चेतना को जाग्रत करता है। जब हम भगवान गणेश के गुणों का गान करते हैं, तो हमारे भीतर के नकारात्मक विचार नष्ट होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह भजन मूलाधार चक्र को जाग्रत करने में भी सहायक माना जाता है, जिसके स्वामी स्वयं भगवान गणेश हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • विघ्नों से न घबराएं: भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन में आने वाली बाधाएं स्थायी नहीं होतीं, धैर्य और बुद्धि से हर समस्या का समाधान संभव है।
  • कला और ज्ञान का सम्मान: भजन में गणेश जी को संगीत, गीत और ग्रंथों का प्रेमी बताया गया है। यह हमें अपने जीवन में कला, साहित्य और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  • संतुलन और शीतलता: 'भालचंद्र' स्वरूप हमें सिखाता है कि कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, अपने मस्तिष्क को हमेशा शांत और शीतल रखना चाहिए।
  • एकता और नेतृत्व: 'गणाध्यक्ष' के रूप में वे हमें सिखाते हैं कि समाज के सभी वर्गों (गणों) को साथ लेकर कैसे चला जाता है और एक कुशल नेतृत्व कैसे किया जाता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

वैसे तो भगवान गणेश का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन इस भजन को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • प्रातः काल की वेला: सुबह के समय इस भजन को सुनने से पूरे दिन के लिए सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है।
  • गणेश चतुर्थी उत्सव: इस महापर्व के दौरान घरों और पंडालों में इस भजन का गायन वातावरण को अत्यंत भक्तिमय बना देता है।
  • विद्यार्थियों के लिए: पढ़ाई शुरू करने से पहले इस भजन का श्रवण या उच्चारण करने से एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
  • कठिन समय में: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कोई बड़ी बाधा आ रही हो, इस भजन का शांत मन से जप करने से संबल मिलता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

क्षेत्र मुख्य बिंदु
भजन का नाम एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि
मुख्य विषय भगवान गणेश की स्तुति और ध्यान
प्रस्तुति शैली भक्तिपूर्ण, शास्त्रीय एवं आधुनिक ध्वनिक (Acoustic)
प्रभाव मानसिक शांति, बुद्धि का विकास, विघ्न निवारण
संबंधित ग्रंथ गणेश पुराण एवं पारंपरिक स्तोत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका अर्थ है: "हम उन भगवान गणेश का ध्यान करते हैं जो एक दांत वाले हैं, जिनकी सूंड घुमावदार है और जो माता गौरी (पार्वती) के पुत्र हैं।"

सुप्रभा केवी ने इस पारंपरिक संस्कृत भजन को बहुत ही शांत, मधुर और आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत किया है, जो ध्यान लगाने और मानसिक शांति के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

'धीमहि' का अर्थ है "हम ध्यान करते हैं"। यह शब्द हमारी बुद्धि को ईश्वर की ओर मोड़ने और एकाग्रता बढ़ाने का प्रतीक है।

हाँ, प्रतिदिन सुबह या शाम को इस भजन का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं।

'गण' का अर्थ है समूह या सृष्टि के तत्व। भगवान गणेश इन सभी तत्वों और समूहों के स्वामी (अध्यक्ष) हैं, इसलिए उन्हें 'गणाध्यक्ष' कहा जाता है।

यह भजन बुद्धि और ज्ञान के देवता गणेश जी को समर्पित है। इसके नियमित श्रवण से छात्रों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।

'भालचंद्र' का अर्थ है जिनके मस्तक (भाल) पर चंद्रमा (चंद्र) सुशोभित है। यह मन की शांति और शीतलता का प्रतीक है।

यह भजन पारंपरिक संस्कृत गणेश स्तुतियों और श्लोकों पर आधारित है, जिसे आधुनिक संगीतकारों ने एक सुंदर गीत का रूप दिया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और संगीतमय पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सुप्रभा केवी के मधुर संस्करण को ध्यान में रखते हुए, इस सामग्री को भक्तों और संगीत प्रेमियों के लिए अत्यंत सरल और ज्ञानवर्धक भाषा में तैयार किया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों को न केवल भजन के बोल प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके गहरे दार्शनिक अर्थ से भी जोड़ती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • गणेश पुराण: भगवान गणेश के विभिन्न नामों और उनके आध्यात्मिक अर्थों का संदर्भ।
  • पारंपरिक संस्कृत स्तोत्र संग्रह: "धीमहि" और "गणनायकाय" श्लोकों की प्रामाणिक व्याख्या।
  • सुप्रभा केवी आधिकारिक संगीत प्रस्तुति: गीत के बोल और गायन शैली का विश्लेषण।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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