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किरण सिंह - चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा (Chal Ae Sakhi Kare Shiv Ke Pujanawa)

पढ़ें किरण सिंह - चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा | Chal Ae Sakhi Kare Shiv Ke Pujanawa lyrics in Hindi | Kiran Singh | Bolbam Kanwar Bhakti Song 2022 - BhaktiLo

चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा | Chal Ae Sakhi Kare Shiv Ke Pujanawa lyrics in Hindi | Kiran Singh | Bolbam Kanwar Bhakti Song 2022 - BhaktiLok

भगवान शिव की आराधना और सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान गाए जाने वाले लोकगीतों का भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा में अत्यंत विशिष्ट स्थान है। लोक गायिका किरण सिंह की मधुर और भावपूर्ण आवाज में सजा यह लोकप्रिय बोलबम कांवड़ भक्ति गीत "चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा" (Chal Ae Sakhi Kare Shiv Ke Pujanawa) वर्ष 2022 के दौरान शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा। इस गीत का मुख्य भाव सखियों या संगिनियों को एकत्रित कर सामूहिक रूप से देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना के लिए आमंत्रित करना है। शिव भक्ति केवल एकांत साधना तक सीमित नहीं है, अपितु लोकजीवन में उत्सव और सामूहिक उल्लास का प्रतीक भी है। जब महिलाएं या सखियां मिलकर सावन मास या शिवरात्रि के अवसर पर भोलेनाथ का पूजन करती हैं, तो भक्ति का वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक और आनंदमय हो जाता है। यह भजन न केवल संगीतमय दृष्टि से मनमोहक है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस साझा परंपरा को भी रेखांकित करता है जहां हर पर्व और अनुष्ठान में सामूहिक सहभागिता को सर्वोपरि माना गया है। इस विस्तृत लेख में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक संदर्भ, गायन की परंपरा और इससे जुड़े विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि भक्तजन इस रचना के मर्म को गहराई से समझ सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखाड़ा (Refrain):

चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा,
भउले बाड़े डमरू वाला भोले भंडारी ए सखी!
चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा...
डमरू बजाये आवे काशी के बटोही,
नाराज ना होईहे भोले बाबा मोरी ए सखी!

अंतरा 1:

सावन के महीना बा हरियर हरियर डाली,
गंगाजल भर के लेआइब कांवड़ खाली!
भांग धतूरा चढ़ाइब भोले के चरनवा,
अखियां से बरसे प्रेम के बरसनवा!
चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा...
भउले बाड़े डमरू वाला भोले भंडारी ए सखी!

अंतरा 2:

गउरा के लाल गणेश मनाइब,
नंदी के सींगवा पs फूलवा चढ़ाइब!
बेलपत्र गेंदा के हार लेआइब संगे,
डमरू के ताल पs झुमब उमंगें!
चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा...
भउले बाड़े डमरू वाला भोले भंडारी ए सखी!

अंतरा 3:

किरण सिंह गावे महिमा भोले के अपार,
शिव के चरन में बाटे दुनिया के सार!
भवसागर तर जाईब धियान लगा के,
हर-हर महादेव बोलs प्रेम से जगा के!
चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा...
भउले Baare डमरू वाला भोले भंडारी ए सखी!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

किरण सिंह द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय बोलबम गीत का भावार्थ अत्यंत सरल होने के साथ-साथ गंभीर आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत है। इस गीत के माध्यम से लोक जीवन की एक सखी अपनी दूसरी सखियों से आह्वान करती है कि वे अपने सारे घरेलू कामकाज को छोड़कर सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के पूजन के लिए साथ चलें। लोक संस्कृति में 'सखी' का संबोधन जीव और उसकी संगिनी या गुरु-भक्ति की भावना का प्रतीक माना जाता है, जो एक-दूसरे को सत्संग और ईश्वर-स्मरण के लिए प्रेरित करती हैं।

गीत के मुखड़े में कहा गया है कि 'डमरू वाले भोले भंडारी' भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव का एक नाम 'भोले भंडारी' भी है, जिसका अर्थ है कि वे अल्प आराधना से ही अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देते हैं। सावन के महीने की प्राकृतिक सुंदरता—चारों तरफ हरियाली, पवित्र नदियों का जल, और कांवड़ यात्रा की गूंज—भक्तों के मन में उत्साह भर देती है। गीत में कांवड़ में गंगाजल भरकर लाने, भगवान को भांग, धतूरा, बेलपत्र और गेंदा के फूल अर्पित करने का बहुत ही सुंदर सजीव चित्रण किया गया है।

अंतिम चरणों में गायिका किरण सिंह यह संदेश देती हैं कि संसार के इस भवसागर से तरने का एकमात्र मार्ग भगवान शिव के चरणों में ध्यान लगाना है। 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से न केवल वातावरण पवित्र होता है, बल्कि मनुष्य के भीतर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश भी होता है। यह गीत सामूहिक भक्ति, सांस्कृतिक धरोहर और भोलेनाथ के प्रति अनन्य समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस बोलबम गीत की केंद्रीय भावना सावन मास के उल्लास, कांवड़ यात्रा की पवित्रता और महादेव के प्रति अगाध प्रेम है। इसमें उत्सवधर्मिता के साथ-साथ आंतरिक समर्पण का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। संदेश स्पष्ट है कि ईश्वर की आराधना अकेले करने के बजाय जब समाज और सहेलियों के साथ मिलकर की जाती है, तो उसका आनंद और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भगवान शिव भेद-भाव से परे हैं और वे केवल सच्चे प्रेम और सादगी के भूखे हैं—यही इस गीत का मूल संदेश है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name)चलS ए सखी करे शिव के पुजनवा (Chal Ae Sakhi Kare Shiv Ke Pujanawa)
गायिका (Singer)किरण सिंह (Kiran Singh)
शैली (Genre)बोलबम कांवड़ भक्ति गीत / भोजपुरी लोक भजन (Bolbam Kanwar Bhakti Song)
रिलीज वर्ष (Release Year)2022
भाषा (Language)भोजपुरी / हिंदी (Bhojpuri / Hindi)
मुख्य विषय (Theme)शिव आराधना, सावन मास, कांवड़ मेला, सामूहिक भक्ति
संबंधित प्रसंग (Occasion)सावन सोमवार, शिवरात्रि, कांवड़ यात्रा

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुंदर रचना को अपनी सुरीली और ओजस्वी आवाज से सजाने वाली प्रसिद्ध लोक गायिका किरण सिंह हैं। किरण सिंह ने अपनी विशिष्ट गायन शैली और ठेठ भोजपुरी अंचल की मिठास के माध्यम से इस गीत को अमर बना दिया है। उनकी आवाज में लोकगीतों की सोंधी खुशबू और शास्त्रीय सुरावली का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। इस गीत के संगीतकार और गीतकार ने लोक परंपराओं को आधुनिक संगीत के दायरे में पिरोकर युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है। ऐसे गीत भारत के लोक-पर्वों और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word)सरल अर्थ (Simple Meaning)संदर्भ (Context)
पुजनवापूजन या पूजा करनाभगवान शिव की आराधना करने के लिए
भोले भंडारीजो बहुत भोले हों और सब कुछ देने वाले होंभगवान शिव का नाम
हरियरहरा-भरासावन मास की प्राकृतिक हरियाली
चरनवाचरण या पैरशिव के चरणों में समर्पण
भवसागरजन्म-मरण का संसार रूपी समुद्रइस संसार से मुक्ति का मार्ग
भउलेप्रसन्न हुए हैं / मोहित हुए हैंभक्तों की भक्ति देखकर शिव का प्रसन्न होना

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में ही समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिवजी ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे सृष्टि की रक्षा हुई थी। इसी उपलक्ष्य में समस्त देवी-देवता और भक्तगण शिव की आराधना करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। ऐसे पावन और ऊर्जावान समय में इस प्रकार के लोकगीत भक्तों के भीतर ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं।

सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यह गीत उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोकमानस में रमे शिव प्रेम को दर्शाता है। ग्रामीण और शहरी अंचलों में महिलाएं मिलकर जब ऐसे गीत गाती हैं, तो यह न केवल मनोरंजन का साधन बनता है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और पर्वों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध होता है। इससे सामाजिक समरसता और सामूहिक भावना को भी बल मिलता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • सामूहिक सहभागिता: जीवन के किसी भी बड़े लक्ष्य या धार्मिक अनुष्ठान को मिलकर करने से कार्य सरल और आनंददायक हो जाता है।
  • सादगी और समर्पण: भगवान शिव को किसी महंगे आभूषण या जटिल विधान की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें केवल बेलपत्र और सच्चे प्रेम की भूख होती है।
  • प्रकृति से जुड़ाव: सावन मास और हरियाली के माध्यम से यह गीत हमें प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का भी मौन संदेश देता है।
  • नकारात्मकता का त्याग: 'हर-हर महादेव' का उद्घोष मनुष्य को जीवन की हर कठिनाई से लड़ने की आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।
  • भक्ति भाव: व्यस्त दिनचर्या के बीच भी ईश्वर के स्मरण और पूजन के लिए समय निकालना ही सच्चे जीवन का सार है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह बोलबम गीत मुख्य रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुना और गाया जाता है:

  • सावन मास के प्रत्येक सोमवार: जब भक्त व्रत रखते हैं और शिवालयों में भारी भीड़ होती है।
  • कांवड़ यात्रा के दौरान: जब कांवड़िए डीजे और संगीत के साथ बोलबम के जयकारे लगाते हुए यात्रा करते हैं।
  • महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत: शिवरात्रि के पावन पर्व पर मंदिरों और घरों में होने वाले अनुष्ठानों के समय।
  • महिला संगीत और सत्संग: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सावन के झूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान।
  • दैनिक साधना के समय: सुबह या संध्या के शांत वातावरण में जब मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा की आवश्यकता हो।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

श्रेणी (Category)बोलबम कांवड़ भक्ति गीत (Bolbam Kanwar Bhakti Song)
प्रमुख देवता (Presiding Deity)भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, नंदी
कलाकार (Artist)किरण सिंह (Kiran Singh)
वर्ष (Year)2022
भाषा (Language)भोजपुरी / हिंदी
मुख्य संदेश (Main Message)मिलकर शिव पूजन करना और सावन का आनंद लेना
संबंधित लेखअन्य कांवड़ भजन एवं सावन गीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय बोलबम कांवड़ भक्ति गीत प्रसिद्ध लोक गायिका किरण सिंह द्वारा वर्ष 2022 में गाया गया है।

यह गीत मुख्य रूप से सावन मास, कांवड़ यात्रा, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के पवित्र अवसरों पर गाया और सुना जाता है।

इस गीत का मुख्य विषय सखियों को एकत्रित कर सामूहिक रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना और सावन के उल्लास का आनंद लेना है।

हाँ, गीत की पंक्तियों में "गंगाजल भर के लेआइब कांवड़ खाली" के माध्यम से कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है।

गीत में भांग, धतूरा, गंगाजल, बेलपत्र और गेंदा के फूल आदि शिव पूजन की पारंपरिक सामग्रियों का उल्लेख किया गया है।

भक्तों को सामूहिक भक्ति, ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

निश्चित रूप से, ऐसे लोकगीत हमारी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, त्योहारों और लोक कलाओं को जीवंत रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

आप इसे Bhaktilok.in पर संपूर्ण देवनागरी लिरिक्स, अर्थ और भावार्थ के साथ पढ़ और साझा कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत गीत के बोल, अर्थ, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भों को पूरी प्रमाणिकीय गरिमा के साथ संकलित किया गया है। भक्तलोक (Bhaktilok) का उद्देश्य सनातन धर्म, लोकगीतों, और भक्ति साहित्य की थाती को पाठकों तक सहज और सटीक रूप में पहुंचाना है। इस सामग्री को तैयार करते समय पारंपरिक लोक गायकी और क्षेत्रीय सांस्कृतिक मान्यताओं का पूर्ण सम्मान किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी बोलबम एवं कांवड़ लोकगीत परंपरा
  • सावन मास एवं शिव आराधना से जुड़े लोक साहित्य
  • किरण सिंह के आधिकारिक संगीत एलबम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग (2022)
  • सनातन संस्कृति एवं व्रत-पर्व लोक परंपरा संकलन

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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