Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दुर्गा अष्टमी का NO.1 भजन (Maiya Sherowali)

दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर मां शेरावाली के प्रसिद्ध भजन 'प्यारा सजा है तेरा द्वार' के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से जानें।

सनातन धर्म में महाशक्ति की आराधना का महापर्व नवरात्रि और विशेष रूप से 'दुर्गा अष्टमी' (महाष्टमी) का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, तेज और परम पावनता का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर आदि शक्ति मां दुर्गा के चरणों में समर्पित भजन "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी" भक्तों के हृदय में अनन्य भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का संचार करता है। यह भजन केवल सुर और ताल का संगम नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा का परमात्मा (जगत जननी) के प्रति विरह, प्रेम, और पूर्ण शरणागति का संगीतमय प्रकटीकरण है। दुर्गा अष्टमी के दिन इस भजन के श्रवण और गायन से साधक के अंतःकरण में सात्विक भावों का उदय होता है, मानसिक क्लेशों का शमन होता है और मां शेरावाली की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। आइए, इस अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन के संपूर्ण बोल, उसके गूढ़ आध्यात्मिक भावार्थ, शास्त्रीय महत्व और जीवनोपयोगी संदेशों का गहराई से अध्ययन करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी ॥

(कोरस / मुखड़ा)
प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी।
भक्तों की लगी है कतार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी॥
बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

(अंतरा - 1)
ऊंचे पर्वत भवन तेरा, नीचे बहती गंगा धारा।
लाल चुनरिया सोहे मैया, हाथ में सोहे खप्पर प्यारा॥
मस्तक पे चमके मुकुट भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी।
बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

(अंतरा - 2)
सिंह पे चढ़कर आई मैया, दुष्टों का संहार करने।
भक्त जनों के कष्ट मिटाने, झोलियां सबकी भरने॥
करती है सिंह की सवारी भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी।
बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

(अंतरा - 3)
ब्रह्मा विष्णु आरती उतारें, नारद वीणा बजाते हैं।
शेष महेश और इंद्र देव भी, महिमा तेरी गाते हैं॥
तेरी महिमा है अपरंपार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी।
बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

(अंतरा - 4)
जो भी श्रद्धा से द्वार पे आए, खाली हाथ न जाए वो।
मनवांछित फल पाकर मैया, तेरे ही गुण गाए वो॥
करती है सबका बेड़ा पार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी।
बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मां दुर्गा के भव्य दरबार और उनकी अलौकिक महिमा का सजीव चित्रण करता है। इसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ इस प्रकार है:

द्वार की भव्यता और शरणागति: भजन की प्रारंभिक पंक्तियां दर्शाती हैं कि मां भवानी का द्वार अत्यंत सुंदर और दिव्य है, जहां सांसारिक बंधनों से मुक्त होने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। यह कतार इस बात का प्रतीक है कि संसार का प्रत्येक प्राणी अंततः उसी परम चेतना की शरण में जाना चाहता है।

प्राकृतिक और दिव्य स्वरूप: मां का भवन ऊंचे पर्वत पर स्थित है, जो उच्च आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। नीचे बहती गंगा की धारा मन की पवित्रता और ज्ञान के प्रवाह को दर्शाती है। मां की लाल चुनरी और हाथ में खप्पर यह संकेत देते हैं कि वे एक तरफ ममतामयी मां हैं, तो दूसरी तरफ दुष्टों और आसुरी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली महाकाली भी हैं।

देवताओं द्वारा वंदना: इस भजन में बताया गया है कि केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और देवर्षि नारद भी मां की स्तुति करते हैं। यह मां दुर्गा की सर्वोपरि सत्ता और आदि शक्ति होने का प्रमाण है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति रस की प्रधानता: इस भजन में 'दास्य' और 'वात्सल्य' भाव का सुंदर मिश्रण है, जो साधक को मां के प्रति पूर्ण समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • दुर्गा अष्टमी का विशेष महत्व: महाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • मानसिक शांति: इसके सरल शब्द और मधुर धुन तनाव को दूर कर मन को एकाग्र करने में सहायक हैं।
  • सामूहिक गायन के लिए उपयुक्त: कीर्तन और जगराते में इस भजन का सामूहिक गायन भक्तों को एक सूत्र में पिरोता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • शुभ समय: नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर दुर्गा अष्टमी की सुबह और संध्या आरती के समय।
  • तैयारी: स्वच्छ वस्त्र धारण कर, मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • भाव: गायन के समय मन में पूर्ण विश्वास और श्रद्धा होनी चाहिए कि मां हमारी पुकार सुन रही हैं।
  • साधन: ढोलक, मंजीरे या हारमोनियम के साथ सामूहिक रूप से गाने पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन जगत जननी मां दुर्गा (आदिशक्ति) को समर्पित है। सनातन परंपरा में मां दुर्गा को शक्ति, बुद्धि, समृद्धि और करुणा की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। इस भजन की रचना पारंपरिक लोक-भक्ति शैली में की गई है, जिसे विभिन्न संतों और आधुनिक काल के महान भजन गायकों (जैसे लखबीर सिंह लक्खा) ने अपनी सुमधुर आवाज देकर जन-जन तक पहुंचाया है। मां दुर्गा के साथ-साथ इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) का भी उल्लेख है, जो मां की सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि उत्तर भारत की समृद्ध देवी-भक्ति परंपरा से जुड़ी है। पहाड़ों पर स्थित माता के प्रसिद्ध धामों (जैसे वैष्णो देवी, कांगड़ा देवी, और ज्वाला जी) की यात्रा और वहां के दिव्य वातावरण से प्रेरित होकर इस भजन की रचना की गई है। ऊंचे पहाड़ों पर चढ़कर माता के दर्शन करने की व्याकुलता और वहां पहुंचकर मिलने वाली परम शांति को इस भजन के माध्यम से व्यक्त किया गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोकप्रचलित हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें ब्रज और पंजाबी लोक शैली का पुट भी देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली वर्णनात्मक और संवादात्मक है। इसमें प्रयुक्त रूपक जैसे "ऊंचे पर्वत भवन तेरा" और "लाल चुनरिया" अत्यंत सजीव दृश्य उत्पन्न करते हैं, जिससे श्रोता के मन में भक्ति का चित्र खिंच जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • समानता का संदेश: मां के द्वार पर लगी कतार में अमीर-गरीब, राजा-रंक सब एक समान हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर की दृष्टि में सभी जीव बराबर हैं।
  • आशा और विश्वास: "जो भी श्रद्धा से द्वार पे आए, खाली हाथ न जाए वो" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  • आसुरी प्रवृत्तियों का अंत: मां द्वारा दुष्टों का संहार करना हमारे भीतर के काम, क्रोध, लोभ और अहंकार रूपी शत्रुओं को नष्ट करने का प्रतीक है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
भवानी जगत जननी, शिव की शक्ति सृष्टि की उत्पत्ति और पालन करने वाली देवी।
द्वार दरवाजा / चौखट मुक्ति और शरण का मार्ग।
खप्पर एक विशेष पात्र अहंकार और बुराइयों का संहार करने का प्रतीक।
बेड़ा पार नाव को किनारे लगाना संसार रूपी भवसागर से मुक्ति दिलाना।
मनवांछित मन की इच्छा के अनुसार सच्चे मन से मांगी गई कामना की पूर्ति।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी..."
हे मां! आपका दरबार अत्यंत दिव्य और अलौकिक रूप से सजा हुआ है। यहां आकर मन को असीम शांति मिलती है। आपके दर्शनों के लिए व्याकुल भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं।

"ऊंचे पर्वत भवन तेरा, नीचे बहती गंगा धारा..."
आपका पावन धाम ऊंचे पर्वतों पर स्थित है, जो सांसारिक कोलाहल से दूर उच्च चेतना का वास है। वहां से बहने वाली गंगा की पवित्र धारा भक्तों के पापों को धो देती है।

"सिंह पे चढ़कर आई मैया, दुष्टों का संहार करने..."
मां सिंह की सवारी करती हैं, जो अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक है। वे अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं और उनके जीवन की बाधाओं का नाश करती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भजन के गायन से पूर्व या पश्चात मां दुर्गा के इन सिद्ध मंत्रों का जाप करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो शरण देने वाली, कल्याण करने वाली, तीनों लोकों की स्वामिनी और पुरुषार्थ सिद्ध करने वाली हैं, उन गौरी स्वरूपा नारायणी को बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी
मुख्य देवी/देवता मां दुर्गा (शेरावाली, महागौरी)
मुख्य विषय शरणागति, महिमा गान, भक्ति रस
भाषा सरल हिंदी (भक्ति प्रधान)
उपयुक्त अवसर दुर्गा अष्टमी, नवरात्रि, जगराता, संध्या आरती
मुख्य संदेश श्रद्धा, समर्पण और आंतरिक बुराइयों का त्याग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

दुर्गा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा होती है। इस दिन इस भजन को गाने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

'ऊंचे पर्वत' उच्च आध्यात्मिक चेतना और ध्यान की पराकाष्ठा का प्रतीक हैं, जबकि 'गंगा धारा' मन की पवित्रता, ज्ञान और भक्ति के निरंतर प्रवाह को दर्शाती है।

हां, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की आरती के समय गा सकते हैं। यह मन को शांत और एकाग्र करने में मदद करता है।

सिंह निर्भयता, शक्ति और नियंत्रण का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने क्रोध और इंद्रियों पर नियंत्रण रखकर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।

इस भजन को गाते समय पूर्ण समर्पण, कृतज्ञता और वात्सल्य भाव होना चाहिए। स्वयं को मां के चरणों में समर्पित मानकर गाना सर्वश्रेष्ठ फल देता है।

दुर्गा अष्टमी पर छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है, जिससे गृह में सुख-समृद्धि आती है।

यह एक पारंपरिक भजन है, जिसे लखबीर सिंह लक्खा सहित कई प्रसिद्ध भजन गायकों ने गाकर अत्यधिक लोकप्रिय बनाया है।

जी हां, इसकी मधुर ध्वनि और सकारात्मक शब्द मस्तिष्क में शांति का संचार करते हैं, जिससे तनाव और चिंता का निवारण होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा तैयार किया गया है। इस भजन की व्याख्या और इसके आध्यात्मिक पक्षों को प्रामाणिक स्रोतों और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर संकलित किया गया है। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - मां दुर्गा की महिमा और चरित्र।
  • सनातन धर्म की पारंपरिक भजन एवं कीर्तन संग्रह।
  • नवरात्रि व्रत कथा एवं पूजा पद्धति पुस्तकें।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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