Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैया सोणा तेरा श्रृंगार Maiya Sona Tera Shringar (Naina Gupta,)

पढ़ें मैया सोणा तेरा श्रृंगार Maiya Sona Tera Shringar I Devi Bhajan I NAINA GUPTA,Full HD Video Song - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार

सनातन धर्म में आदिशक्ति महामाया, भगवती दुर्गा के दिव्य स्वरूप की आराधना का विशेष महत्व है। "मैया सोणा तेरा श्रृंगार" (Maiya Sona Tera Shringar) एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण देवी भजन है, जो माता रानी के अलौकिक सौंदर्य, उनके दिव्य आभूषणों और ममतामयी स्वरूप को समर्पित है। यह भजन मुख्य रूप से पंजाबी और हिंदी मिश्रित लोक शैली में गाया जाता है, जो भक्तों के हृदय में अपूर्व भक्ति रस, हर्ष और समर्पण का संचार करता है। जब कोई साधक या भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ इस भजन का श्रवण या गायन करता है, तो उसे जगत जननी के साक्षात दर्शन की अनुभूति होती है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, उसका गहन आध्यात्मिक भावार्थ, शास्त्रीय महत्व, और गायन विधि का सविस्तार विवेचन करेंगे ताकि आपकी साधना और भक्ति को एक नई ऊंचाई मिल सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैया सोणा तेरा श्रृंगार

(स्थायी / मुखड़ा)
मैया सोणा तेरा श्रृंगार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार।
तेरे चरणों में शीश झुकाएं, करते हैं जय जयकार,
मैया सोणा तेरा श्रृंगार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार॥

(अंतरा - 1)
लाल चुनरिया सिर पे सोहे, भक्तों का मन हरदम मोहे।
टीका चमके माथे प्यारा, जैसे चमके गगन का तारा,
गले में सोहे हीरों का हार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार॥

(अंतरा - 2)
माथे पे बिंदिया चम चम चमके, हाथों में चूड़ियां खन खन खनके।
हाथों में मेहंदी रची न्यारी, महिमा गाए दुनिया सारी,
मैया सोणा तेरा श्रृंगार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार॥

(अंतरा - 3)
पैरों में पैंजनिया बाजे, सिंह सवारी मैया साजे।
नयनों में करुणा की धारा, तू ही जग का एक सहारा,
कर दे मैया बेड़ा पार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार॥

(अंतरा - 4)
नैना गाए महिमा तेरी, काटो मैया विपदा मेरी।
शरण तिहारी जो भी आए, मुंह मांगा वो फल पा जाए,
खुला है तेरा सदा दरबार, मैया सोणा तेरा श्रृंगार॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन आदिशक्ति मां दुर्गा के दिव्य और अलौकिक श्रृंगार का सजीव चित्रण करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, देवी का श्रृंगार केवल भौतिक आभूषणों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की सृजनात्मक ऊर्जा, तेज और ऐश्वर्य का प्रतीक है।

समर्पण और वंदना: भजन के प्रारंभ में भक्त कहता है कि हे मां! आपका यह दिव्य श्रृंगार अत्यंत सुंदर और मनमोहक है। हम सभी भक्त आपके पावन चरणों में अपना मस्तक झुकाकर आपकी जय-जयकार कर रहे हैं। यह समर्पण का भाव साधक के अहंकार को नष्ट करता है और उसे ईश्वरीय चेतना से जोड़ता है।

दिव्य आभूषणों का रहस्य: लाल चुनरी, माथे का टीका, बिंदिया, और हाथों की चूड़ियां मां के सुहाग, ममता और रक्षण शक्ति को दर्शाती हैं। लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है। माथे पर चमकने वाला टीका आज्ञा चक्र की जागृति और ज्ञान के प्रकाश को इंगित करता है।

करुणा और मोक्ष: मां के नयनों से बहने वाली करुणा की धारा भक्तों के दुखों को हर लेती है। सिंह की सवारी यह दर्शाती है कि मां समस्त भय और तामसिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने वाली हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि हे मां, इस संसार रूपी भवसागर से मेरा बेड़ा पार कर दो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति रस की प्रधानता: इस भजन में 'मधुर भाव' और 'दास्य भाव' का सुंदर समन्वय है, जहां भक्त मां के सौंदर्य पर मुग्ध होकर स्वयं को उनके चरणों में समर्पित कर देता है।
  • ऊर्जा का संचार: इसके लयबद्ध संगीत और शब्दों के चयन से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का संचार होता है।
  • नवरात्रि में विशेष महत्व: नवरात्रि व्रत और पूजा विधि के दौरान इस भजन का गायन देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का एक सुगम मार्ग माना जाता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के नियमित श्रवण से मन की चंचलता दूर होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवती की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु शास्त्रों और परंपरा के अनुसार कुछ विशेष नियम और समय अधिक फलदायी माने गए हैं:

सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन सुबह के समय मंगला आरती के बाद या संध्या काल में देवी पूजन के समय करना अत्यंत शुभ होता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और प्रत्येक मास की अष्टमी व चतुर्दशी तिथि को इसका विशेष अनुष्ठान किया जा सकता है।

गायन की विधि:

  1. सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  3. मां को लाल पुष्प, रोली, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
  4. पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ, ताली या मंजीरे की थाप पर इस भजन का गायन करें।
  5. भजन की समाप्ति पर मां की कपूर से आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात त्रिगुणात्मिका महाशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, मां दुर्गा ही सृष्टि की आदि कारण हैं। वे ही महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती के रूप में प्रकट होकर सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं।

इस भजन को आधुनिक समय में सुप्रसिद्ध भजन गायिका नैना गुप्ता जी ने अपनी मधुर आवाज देकर जन-जन तक पहुंचाया है। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस पारंपरिक भजन को एक नया आयाम दिया है, जिससे युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ रही है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन उत्तर भारतीय और विशेष रूप से पंजाबी लोक संस्कृति की 'भेंट' परंपरा से प्रेरित है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों (जैसे ज्वाला जी, चिंतपूर्णी, कांगड़ा देवी) में माता के श्रृंगार और उनकी महिमा के लोकगीत गाने की प्राचीन परंपरा रही है।

इस भजन की पृष्ठभूमि भक्तों के उस उल्लास को दर्शाती है जब वे माता के मंदिर में उनके भव्य विग्रह का दर्शन करते हैं। जब भक्त मां को दिव्य वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित देखता है, तो उसके हृदय से स्वतः ही यह पुकार उठती है - "मैया सोणा तेरा श्रृंगार"।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-संवेदना से जुड़ी हुई है। इसमें हिंदी के साथ-साथ पंजाबी भाषा के मीठे शब्दों (जैसे 'सोणा', 'सोहे') का प्रयोग किया गया है, जो इसे अत्यंत कर्णप्रिय बनाता है।

काव्य शैली: यह एक मुक्तक काव्य शैली का उदाहरण है जिसमें अंत्यानुप्रास (Rhyming) का सुंदर प्रयोग किया गया है (जैसे - श्रृंगार/जयकार, चमके/खनके, तारा/सहारा)। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमा अलंकार माता के दिव्य स्वरूप को सजीव कर देते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • समर्पण की शक्ति: जब हम ईश्वर के सामने अपना शीश झुकाते हैं, तो हमारा अहंकार समाप्त होता है। अहंकार की निवृत्ति ही आध्यात्मिक प्रगति की पहली सीढ़ी है।
  • सकारात्मकता और सौंदर्य: माता का श्रृंगार हमें सिखाता है कि जीवन को हमेशा उत्साह, दिव्यता और सकारात्मकता से सजाकर रखना चाहिए।
  • अभयदान: सिंह की सवारी हमें संदेश देती है कि धर्म के मार्ग पर चलने वाले को कभी भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि मां की शक्ति सदैव उसके साथ है।
  • समानता का भाव: मां का दरबार सभी के लिए खुला है। वहां अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं है। हमें भी समाज में इसी समरसता का प्रसार करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सोणा सुंदर, आकर्षक ईश्वरीय और अलौकिक सौंदर्य का प्रतीक।
श्रृंगार सजावट, आभूषण धारण करना प्रकृति की सृजनात्मक शक्ति और ऐश्वर्य।
चुनरिया ओढ़नी, दुपट्टा भक्तों को प्रदान किया जाने वाला सुरक्षा कवच।
सिंह सवारी शेर पर सवारी करना शौर्य, साहस और तामसिक शक्तियों पर विजय।
बेड़ा पार नाव को किनारे लगाना भवसागर से मुक्ति अर्थात मोक्ष की प्राप्ति।
विपदा कष्ट, संकट प्रारब्ध जनित दुःख और सांसारिक बाधाएं।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मैया सोणा तेरा श्रृंगार... करते हैं जय जयकार"
हे जगत जननी! आपका यह दिव्य रूप और अनुपम श्रृंगार अत्यंत मनमोहक है। हम सभी भक्त आपके चरणों में नतमस्तक होकर आपकी महिमा का गान कर रहे हैं।

"लाल चुनरिया सिर पे सोहे... गले में सोहे हीरों का हार"
आपके शीश पर सुशोभित लाल रंग की चुनरी भक्तों के मन को आकर्षित करती है। आपके माथे पर लगा दिव्य टीका आकाश के चमकीले तारे के समान दैदीप्यमान है और आपके गले का हीरक हार आपके ऐश्वर्य को प्रकट करता है।

"माथे पे बिंदिया चम चम चमके... महिमा गाए दुनिया सारी"
आपके भाल पर लगी बिंदिया और हाथों में खनकती चूड़ियां आपके ममतामयी रूप को पूर्ण करती हैं। आपके हाथों की रची हुई मेहंदी संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का प्रतीक है।

"पैरों में पैंजनिया बाजे... कर दे मैया बेड़ा पार"
जब आप सिंह पर सवार होकर चलती हैं, तो आपके चरणों के नूपुरों की ध्वनि से दसों दिशाएं गुंजायमान हो उठती हैं। हे मां! आपकी आंखों में करुणा का महासागर बहता है, कृपया हमें इस संसार चक्र से मुक्त करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात देवी के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो शरण देने वाली, कल्याण करने वाली, तीनों लोकों की माता और पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, उन नारायणी स्वरूप गौरी को हमारा बारंबार प्रणाम है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मैया सोणा तेरा श्रृंगार (Maiya Sona Tera Shringar)
समर्पित देवी-देवता आदिशक्ति मां दुर्गा / शेरावाली माता
स्वर / गायिका नैना गुप्ता (Naina Gupta)
भाषा हिंदी एवं पंजाबी मिश्रित लोक भाषा
भक्ति भाव समर्पण, वात्सल्य और मधुर भाव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराता, माता की चौकी, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश शरणगति और ईश्वरीय करुणा पर अटूट विश्वास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका नैना गुप्ता जी ने गाया है। उनकी भावपूर्ण और मधुर आवाज ने इस भजन को भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाया है।

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और उनके दिव्य रूप का ध्यान करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है।

हां, नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस समय इस भजन का गायन और श्रवण करने से देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

सिंह शौर्य, साहस और शक्ति का प्रतीक है। मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना यह दर्शाता है कि वे अपने भक्तों को निर्भयता प्रदान करती हैं और बुराइयों का नाश करती हैं।

यह भजन मुख्य रूप से सरल हिंदी में है, जिसमें पंजाबी लोक शैली और शब्दावली का अत्यंत सुंदर समावेश किया गया है।

सनातन परंपरा में लाल रंग तेज, शक्ति, स्फूर्ति, और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए देवी पूजन और उनके श्रृंगार में लाल चुनरी और लाल पुष्पों का विशेष महत्व है।

इसके श्रवण से मन एकाग्र होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं, और घर के वातावरण में सुख, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बिल्कुल, आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय इस भजन को गाकर माता रानी की आराधना कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और इसके आध्यात्मिक पक्षों का संकलन प्रामाणिक देवीभागवत पुराण, सनातन लोक परंपराओं और संगीत शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्ता वाली आध्यात्मिक सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना को सही दिशा दे सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी के स्वरूप और उनके दिव्य आभूषणों के आध्यात्मिक अर्थ का संदर्भ।
  • सनातन लोक संगीत परंपरा: उत्तर भारतीय और पंजाबी भेंट गायन शैली का इतिहास।
  • भक्ति संकीर्तन परंपरा: पूज्य संतों द्वारा प्रतिपादित नाम-संकीर्तन की महिमा।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन और इसकी व्याख्या पसंद आई हो, तो आप हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध निम्नलिखित पावन लेखों और भजनों का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!