Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Hits Of Anjali Bhardwaj छठपूजा गीत (New Chhathgeet Bhakti)

पढ़ें Hits Of Anjali Bhardwaj छठपूजा गीत 2021 || New Bhojpuri Chhathgeet Bhakti Song | New Chhatpuja geet का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा

छठ महापर्व लोक आस्था, शुचिता, और प्रकृति पूजा का सबसे बड़ा उत्सव है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक छठ गीत न केवल उत्सव के उल्लास को बढ़ाते हैं, बल्कि साधक के हृदय में सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अनन्य श्रद्धा का संचार भी करते हैं। भोजपुरी संगीत जगत की सुप्रसिद्ध गायिका अंजलि भारद्वाज द्वारा गाए गए "छठपूजा गीत 2021" (New Bhojpuri Chhathgeet Bhakti Song) के इस संग्रह में भक्ति रस की वह अविरल धारा प्रवाहित होती है, जो श्रोताओं को सीधे गंगा घाटों की पवित्रता और लोक संस्कृति के सरोकारों से जोड़ती है। इन गीतों में प्रयुक्त पारंपरिक वाद्य यंत्र, सुरीली तान और भावपूर्ण शब्द हर सनातनी के अंतर्मन को झंकृत कर देते हैं। आइए, इस पावन संग्रह के माध्यम से हम छठ पूजा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को गहराई से समझें और इन भजनों के दिव्य भावार्थ में लीन हो जाएं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics of Popular Chhath Geet

॥ कांच ही बांस के बहंगिया ॥

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
बहंगी लचकत जाए...
बात जे पुछेला बटोहिया, बहंगी केकरा के जाए?
बहंगी केकरा के जाए...
तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहंगी छठी मैया के जाए।
बहंगी छठी मैया के जाए...

केरा के घौंदा घवदइल, ओ पर सुगा मेड़राए।
ओ पर सुगा मेड़राए...
उ जे खबरी जनइहें अदितमल, सुगा देब जूठियाए।
सुगा देब जूठियाए...
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाए।
सुगा गिरे मुरझाए...

पटना के घाट पर नारियल बिकायला, ओही नारियल बहंगी जाए।
ओही नारियल बहंगी जाए...
उगा हो सुरुजदेव पूरब ओरिया, अरघ के बेर भइल जाए।
अरघ के बेर भइल जाए...
छठी मैया देईं आशीष हमरा, गोदी में बालक मुस्काए।
गोदी में बालक मुस्काए...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

अंजलि भारद्वाज द्वारा गाए गए इस पारंपरिक छठ गीत का भावार्थ अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रतीकात्मक है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह छठ व्रत की कठिन साधना, पवित्रता और लोक जीवन की सादगी को दर्शाता है:

प्रथम अंतरा: बहंगी की पवित्रता और समर्पण

गीत की शुरुआत "कांच ही बांस के बहंगिया" से होती है। यहाँ 'कांच बांस' (कच्चा बांस) शुद्धता और कोमलता का प्रतीक है। जब व्रत करने वाला साधक (परवैतिन) पूजा की सामग्री से भरी बहंगी लेकर घाट की ओर चलता है, तो बांस के लचीलेपन के कारण वह बहंगी लचकती है। रास्ते में जब कोई राहगीर (बटोहिया) अज्ञानतावश पूछता है कि यह बहंगी किसके लिए जा रही है, तो उसे उत्तर मिलता है कि "तू तो अंधा है रे बटोहिया, यह बहंगी हमारी परम पूजनीय छठी मैया के लिए जा रही है।" यहाँ 'आन्हर' (अंधा) शब्द का प्रयोग आध्यात्मिक अज्ञानता के संदर्भ में किया गया है, जो ईश्वर की महिमा को नहीं देख पाता।

द्वितीय अंतरा: प्रकृति और जीव-जंतुओं की शुचिता

गीत के अगले भाग में केले के घौद (गुच्छे) और उस पर मंडराते सुगे (तोते) का वर्णन है। छठ पूजा में पवित्रता का स्तर इतना ऊंचा होता है कि यदि कोई पक्षी भी फल को छू ले, तो वह जूठा माना जाता है और पूजा के योग्य नहीं रहता। गीत में कहा गया है कि यदि तोता फल को जूठा करने की कोशिश करेगा, तो सूर्य देव (अदितमल) को इसकी खबर मिल जाएगी और उस सुगे को दंडित किया जाएगा। यह इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति की पूजा में पूर्ण अनुशासन और परम पवित्रता अनिवार्य है।

तृतीय अंतरा: सूर्य देव से प्रार्थना और आशीष

अंतिम पंक्तियों में पटना के ऐतिहासिक गंगा घाटों का वर्णन है, जहाँ नारियल और अन्य पूजन सामग्रियां बिक रही हैं। साधक पूरब दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं कि "हे सूर्य देव! अब उदित होइए, क्योंकि अर्घ्य देने का समय हो चुका है।" अंत में छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु का वरदान मांगा जाता है, जिससे लोक जीवन में मातृत्व और वात्सल्य की भावना सुदृढ़ होती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना पूर्ण समर्पण, शुचिता (पवित्रता) और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है। सनातन धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो संपूर्ण जगत को ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। यह गीत हमें संदेश देता है कि:

  • प्रकृति संरक्षण: छठ पूजा में उपयोग होने वाली सभी सामग्रियां जैसे बांस, मिट्टी के बर्तन, नारियल, केला और गन्ना सीधे प्रकृति से जुड़े हैं। यह पर्व हमें पर्यावरण के संरक्षण की सीख देता है।
  • समानता का संदेश: इस महापर्व में अमीर हो या गरीब, सभी एक ही घाट पर, एक जैसी मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाते हैं और एक साथ अर्घ्य देते हैं। यह सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।
  • कठिन साधना: 36 घंटों का निर्जला व्रत मनुष्य की मानसिक और शारीरिक दृढ़ता को दर्शाता है, जो जीवन में अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
गीत का नाम (Song Name) कांच ही बांस के बहंगिया (Hits Of Anjali Bhardwaj छठपूजा गीत)
गायिका (Singer) अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj)
श्रेणी (Category) भोजपुरी छठ गीत (Bhojpuri Chhathgeet Bhakti Song)
मुख्य विषय (Theme) सूर्य उपासना, छठी मैया की महिमा, लोक आस्था
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
रिलीज वर्ष (Year) 2021
संबंधित पर्व (Festival) छठ पूजा (Chhath Puja)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी भक्ति संगीत के क्षेत्र में अंजलि भारद्वाज एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उनकी सुरीली और शास्त्रीय पुट वाली आवाज ने इस पारंपरिक गीत को एक नई ऊंचाई दी है। उनके गीतों में लोक संस्कृति की सोंधी महक और शास्त्रीय गायकी का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। इस गीत के संगीत संयोजन में पारंपरिक वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा, बांसुरी और शहनाई का उत्कृष्ट प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं को सीधे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पावन गंगा घाटों की याद दिलाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक संदर्भ
बहंगिया (Bahangiya) बांस से बना हुआ कांवर या टोकरी ढोने का साधन छठ का प्रसाद ले जाने के लिए प्रयुक्त पवित्र साधन
बटोहिया (Batohiya) राहगीर या मुसाफिर संसार के अज्ञानी मनुष्य का प्रतीक
अदितमल (Aditmal) भगवान सूर्य (आदित्य) जगत के प्रत्यक्ष देवता और ऊर्जा के स्रोत
सुगवा (Sugwa) तोता (पक्षी) प्रकृति के जीवों का प्रतिनिधित्व
अरघ (Aragh) अर्घ्य (जल या दूध अर्पित करना) सूर्य देव की पूजा की मुख्य क्रिया
जूठियाए (Juthiaye) जूठा करना या अपवित्र करना पूजा में शुद्धता बनाए रखने की अनिवार्यता

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा के गीतों का सनातन धर्म में बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। इन गीतों को गाते समय जो तरंगें उत्पन्न होती हैं, वे वातावरण को शुद्ध और भक्तिमय बनाती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, कार्तिक मास में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर विशेष कोण से पड़ती हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा और आरोग्य की प्राप्ति होती है। अंजलि भारद्वाज के ये गीत साधक के मन को एकाग्र करने और व्रत की कठिन साधना को सहज बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।

यदि आप अन्य पावन व्रतों के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारी विस्तृत प्रस्तुति गोवर्धन पूजा व्रत कथा को अवश्य पढ़ें, जो दीपावली के पावन काल में भगवान कृष्ण की लीलाओं और प्रकृति पूजा के महत्व को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, भोजपुरी लोक संगीत की अन्य विधाओं के लिए आप भोजपुरी भक्ति गाना संग्रह का आनंद ले सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पावन गीत हमें दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. शुद्धता का संकल्प: केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और वैचारिक शुद्धता भी ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है।
  2. धैर्य और निष्ठा: जिस प्रकार बहंगी को बिना किसी बाधा के घाट तक ले जाया जाता है, उसी प्रकार जीवन के लक्ष्यों को भी बिना विचलित हुए प्राप्त करना चाहिए।
  3. पारिवारिक एकता: छठ पूजा पूरा परिवार मिलकर मनाता है, जो हमें संगठित रहने और आपसी प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि छठ गीत वर्षभर सुने जा सकते हैं, परंतु इनका वास्तविक आनंद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक (छठ महापर्व के दौरान) आता है। नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय इन गीतों को बजाने और गाने की प्राचीन परंपरा है। इन गीतों के बिना छठ का त्योहार अधूरा माना जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य तत्व संक्षिप्त विवरण
मुख्य देवी-देवता भगवान सूर्यदेव एवं छठी मैया
मुख्य स्वर अंजलि भारद्वाज
गीत शैली पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत (Chhath Puja Geet)
आध्यात्मिक भाव वात्सल्य, समर्पण, श्रद्धा और कृतज्ञता
उपयुक्त समय कार्तिक एवं चैत्र छठ महापर्व के दौरान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) | Frequently Asked Questions

अंजलि भारद्वाज के छठ गीतों में पारंपरिक भोजपुरी लोक धुनों और शास्त्रीय गायकी का अद्भुत मिश्रण होता है। उनकी आवाज की सादगी और भावुकता श्रोताओं को सीधे भक्ति के सागर में सराबोर कर देती है।

यह गीत छठ पूजा की परम पवित्रता, प्रकृति के प्रति सम्मान और सूर्य देव की उपासना के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि पूजा की हर सामग्री शुद्ध और प्राकृतिक होनी चाहिए।

सूर्य देव इस पृथ्वी पर जीवन, ऊर्जा और आरोग्य के प्रत्यक्ष दाता हैं। उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए छठ पर्व पर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।

छठ गीतों में मुख्य रूप से ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, शहनाई और हारमोनियम जैसे पारंपरिक भारतीय वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है, जो लोक संगीत की आत्मा हैं।

हाँ, यह गीत कार्तिक और चैत्र दोनों ही छठ महापर्वों के अवसर पर समान रूप से गाया और सुना जाता है, क्योंकि दोनों का आध्यात्मिक महत्व एक समान है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वान संपादकीय टीम ने पारंपरिक भोजपुरी लोक साहित्य, वैदिक सूर्य उपासना पद्धतियों और अंजलि भारद्वाज के आधिकारिक संगीत संग्रहों का गहन विश्लेषण करके इस मार्गदर्शिका को तैयार किया है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की लोक परंपराओं को शुद्ध और प्रामाणिक रूप में पाठकों तक पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता एवं ऋग्वेद (सूर्य सूक्त संदर्भ)
  • बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पारंपरिक लोक संगीत संकलन पुस्तकें
  • अंजलि भारद्वाज भक्ति संगीत एल्बम (2021)

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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